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सोमवार, 11 अप्रैल, 2005 को 20:59 GMT तक के समाचार
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रन रोकना चाहते हैं अगरकर

अगरकर
अगरकर को एक बार फिर मिला मौक़ा
भारत के लिए वर्षों से तेज़ गेंदबाज़ी कर रहे अजीत अगरकर वैसे तो पाकिस्तान के ख़िलाफ़ श्रृंखला के लिए चुनी गई भारत की वास्तविक टीम में शामिल नहीं थे मगर लक्ष्मीपति बालाजी के घायल होने के कारण उनको टीम में फिर से आमंत्रित किया गया. एक मुलाक़ात अजीत अगरकर के साथ.

प्रश्न- एक लंबे अरसे के बाद टीम में आपकी वापसी हुई है. अगर आप 11 में चुन लिए जाते हैं तो कैसी रणनीति के साथ आप पाकिस्तानी बल्लेबाज़ों के विरूद्ध मैदान पर उतरेंगे?

जवाब- बहुत लंबे अरसे के बाद तो नहीं, लेकिन हाँ, बांग्लादेश में जब मैंने 200 विकेट लिए थे, तब से अब तक मौक़ा नहीं मिला है क्योंकि तीन तेज़ गेंदबाज़ टीम में खेल रहे हैं. लेकिन जैसे कि सारे मैच जो अब तक हुए हैं, विशाल स्कोर वाले मैच हुए हैं, उनको देखते हुए, मूलतः इसी बात पर ज़ोर देना चाहूँगा की सीधी गेंदें डालूँ (स्ट्रेट बॉलिंग करूं) क्योंकि हमारे यहाँ बल्लेबाज़ी के लिए अच्छे विकेट होते हैं, इसलिए हमारी कोशिश होगी कि यथासंभव रनों पर अंकुश लगाया जाए.

सवाल- अभी तक जो विकेट देखने को मिली हैं, उनमें तेज़ गेंदबाज़ को मदद करने वाली कोई भी चीज़ दिखी नहीं है. ऐसी बेजान, सपाट विकेटों पर आप कुछ ख़ास कर पाने में सफल हो पाएँगे? अगर हाँ तो कैसे?

जवाब- भारत में तेज़ गेंदबाज़ों को मदद करने वाली विकेट कभी नहीं मिली. यह कोई नई बात नहीं है. पूरे देश में इक्का-दुक्का विकेटें ही ऐसी होंगी जो तेज़ गेंदबाज़ों को मदद करें. इसलिए खेलते-खेलते, सपाट विकेट पर गेंदबाज़ी की आदत पड़ जाती है. मुश्किल तो होती ही है, तेज़ गेंदबाज़ों के लिए क्योंकि गर्मी होती है, परिस्थितियाँ कठिन होती हैं और तेज़ आउटफील्ड होती है, इसलिए लगभग सबकुछ ही बल्लेबाज़ों के पक्ष में होता है, लेकिन फिर भी अगर आप इन चुनौतियों का सामना करते हुए अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं तो यह आपको हर चीज से ज़्यादा संतोष देता है.

सवाल- आपने अहमदाबाद में नेट्स पर अभ्यास किया और पिच भी आपने देखी होगी. ऐसी विकेट पर आप किस रणनीति के साथ उतरना चाहेंगे. अगर आपको मौका मिलता है?

जवाब- विकेट तो मैंने देखी नहीं है लेकिन सामान्यतः अहमदाबाद में बैटिंग के लिए अच्छी विकेट होती है. जैसे जमशेदपुर में राणा ने बहुत अच्छी बॉलिंग की, वैसे हम भी ‘विदिन दी स्टंप्स’ गेंद डालने की कोशिश करेंगे.

सवाल- आपकी फिटनेस पर सवालिया निशान लगते रहे हैं. कई बार खेलते-खेलते आप अनफिट होकर बाहर हो गए तो अब कितने फिट हैं आप और कितना विश्वास है आपको अपनी फिटनेस पर?

जवाब- मैं तो काफी निश्चिंत हूँ, ख़ासकर फिटनेस के बारे में, क्योंकि जैसे-जैसे आप खेलते जाते हैं, वैसे-वैसे आपको अनुभव सिखाता है कि आपकी बॉडी को ट्रैन कैसे किया जाए और रूटीन क्या होना चाहिए फिटनेस का. इतने सालों से मैंने क्रिकेट में यह सीख लिया है. और अभी रणजी ट्रॉफी में चार दिन का मैच खेलकर आया हूँ और भी कई स्थानीय टूर्नामेंट में खेला हूँ. इसलिए फिटनेस की कोई समस्या नहीं है.

सवाल- एक दिवसीय मैंचों में सबसे तेज़ गति से 50 विकेट चटखाने के बाद अपकी रफ़्तार कम हो गई. अब आपकी बॉलिंग की लय कैसी है. अब भी बरकरार है या नहीं?

जवाब- अगर एक दिवसीय मैचों में मुझे 200 विकेट मिले हैं तो ज़ाहिर है कि मैं काफी ख़ुश हूँ.

प्रश्न- एक बल्लेबाज़ के रूप में आपने कई महत्वपूर्ण पारियाँ खेली हैं. अब क्या स्थिति है?

जवाब- हम सभी गेंदबाज़ बॉलिंग पर काफी ध्यान देते हैं. अगर कोई गेंदबाज़ रन भी बनाता है तो टीम के लिए काफी अच्छा होता है. इस प्रकार यह तो एक बोनस है.

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