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गांगुली चूके लेकिन और कोई नहीं... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कोच्चि में मैंच शुरू होने से पहले भारत के कप्तान सौरभ गाँगुली ने कहा था कि क्रिकेट में हर सुबह एक नई सुबह होती है इसलिए बंगलौर की यादों को भूलकर वे अपनी अगुवाई में कोच्चि में जी-जान लगाकर टीम को जीत दिलाने की कोशिश करेंगे. लेकिन जब सारा दारोमदार अपने कंधे पर लिए सौरभ मैदान पर उतरे तब सुबह न आई, शाम हो गई. खाता खोले बिना ही पेवेलियन लौटे सौरभ को देखकर लगता था जैसे भूखे शेर के मुँह से शिकार छूट गया हो. जैसे-जैसे दिन ढला और खेल आगे बढ़ा सौरभ गाँगुली के चेहरे की चमक की परछाई पसीने पर दिखने लगी. वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ के शानदार शतकों ने सौरभ को जीत के लिए आश्वस्त कर दिया. स्वयं सौरभ गाँगुली ने इसके दो कारण बताए. एक तो ये कि 280 रनों का पीछा करना किसी भी टीम के लिए बहुत आसान नहीं होता. दूसरा ये कि इस सड़ी हुई गर्मी और उमस में अगर सहवाग और द्रविड़ को मैदान छोड़कर पेवेलियन लौटने पर विवश होना पड़ा तो पहले फील्डिंग कर चुकी पाकिस्तानी टीम के लिए भी यह ‘अग्नि’ या यूँ कहें कि ‘ताप परीक्षा’ की घड़ी थी. बहरहाल सौरभ गाँगुली ने कहा कि वे निराश जरूर हैं क्योंकि पिछली कई पारियों से उन्हें कामयाबी नहीं मिली है. लेकिन जब उनसे यह पूछा गया कि ऐसी स्थिति में क्या घर बैठकर कुछ विश्राम करना और अपनी नींव को एक बार फिर मजबूत करना उचित नहीं होगा क्या, तो सौरभ का स्वाभिमान और आत्मसम्मान तर्क की चादर ओढ़े सहसा उनकी आवाज़ से प्रकट हुआ. ‘घर बैठना तो कायरता होगी, उसका कोई फायदा नहीं होगा. अगर कुछ करना है तो मैदान पर ही करना होगा. अभी तो एक लंबा सफर तय करना है.’ भारतीय कप्तान कोच्चि की जीत को विशाखापत्तनम में दोहराना चाहते हैं, लेकिन साथ-साथ यह भी कहते हैं कि पाकिस्तान की टीम काफी अच्छी है इसलिए वह एक बार फिर पूरी तैयारी के साथ मुक़ाबले के लिए मैदान पर उतरेगी. उधर सौरभ के सबसे मज़बूत सिपाहियों की बात करें तो मैच के बाद मैन ऑफ दी मैच बने वीरेंद्र सहवाग को यह कहने में ज़रा भी हिचकिचाहट नहीं हुई कि ये दिन उनके क्रिकेट जीवन के अब तक के सबसे अच्छे दिन हैं. अपने फॉर्म से ख़ुश सहवाग का आत्मविश्वास सर चढ़कर बोल रहा था और बेवजह नहीं. पाकिस्तान के कप्तान इंज़मामुल हक़ ने सहवाग के बल्ले से निकले, छोड़े गए कैचों की बात की लेकिन जब सहवाग से पूछा गया तो तुरंत जवाब आया ‘क्रिकेट में जीवनदान तो मिलते ही रहते हैं. लेकिन ऐसी परिस्थितियों में मैदान पर जमे रहने से जो आत्मविश्वास पैदा होता है, उसे देखते हुए इस पारी के महत्त्व को कैसे अनदेखा किया जा सकता है.’ उधर राहुल द्रविड़ की पारी की बात करें तो कोच्चि की जीत में उस अभेद्य दीवार ने अपने दसवें शतक से टेस्ट क्रिकेट के साथ-साथ एक दिवसीय क्रिकेट के साथ-साथ एक दिवसीय क्रिकेट में भी अपनी महारत का एक बार जबर्दस्त सबूत पेश किया. सचिन तेंदुलकर ने कोच्चि में एक बार फिर एक विकेट लेकर इतिहास को ऐसा दोहराया कि क्रिकेट समीक्षक अब शायद खुलकर यह नहीं कहेंगे कि भारत की टीम में कोई ऑल राउंडर नहीं है. पाकिस्तान के कप्तान ने भी सचिन की पारी की तारीफ करते हुए कहा कि जब सचिन जैसा, कभी-कभी गेंद डालने वाला गेंदबाज 5 विकेट चटका दे तो ये कहना गलत नहीं होगा कि कोच्चि में शनिवार का दिन भारत के लिए एक ऐसा दिन था, जिस दिन उसकी कोई भी चाल ग़लत साबित नहीं हो सकती थी. |
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