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शुक्रवार, 18 मार्च, 2005 को 00:24 GMT तक के समाचार
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मुझ पर दबाव था: यूनिस ख़ान

यूनिस ख़ान
यूनुस ख़ान ने शतक लगा कर अपने आलोचकों को जवाब दिया
पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के उपकप्तान यूनिस ख़ान ने अपने आलोचकों को बल्ले के बाद अब बातों से भी करारा जवाब दिया है. कोलकाता टेस्ट के दूसरे दिन शतक लगाने के बाद उनके साथ ख़ास बातचीत.

इस मैच से पहले आपकी फ़ॉर्म ख़राब थी और बहुत से लोग आपको टीम से बाहर करने की माँग कर रहे थे, ऐसे लोगों के लिए अब आप क्या कहेंगे.

यूनिस- अब तो वो ख़ुद ही कहेंगे. मेरे ख़याल से जो खिलाड़ी अच्छे हैं, 30-40 टेस्ट और सौ डेढ़ सौ वनडे खेल कर अपनी काबलियत साबित कर चुके हैं उनके बारे में ऐसी बात इतनी जल्दी नहीं करनी चाहिए.

मेरी मिसाल आपके सामने है, जिन लोगों ने दो दिन पहले मुझे उड़ाया अब वो क्या करेंगे.

ऐसे अहम मोड़ पर अल्लाह ने शतक लगवा दिया, तो जवाब तो अल्लाह ताला और प्रदर्शन ख़ुद ही दे देते हैं. तो इतनी जल्दी किसी को गिराना या उठाना नहीं चाहिए.

क्या ये बात भी अजीब नहीं लगती कि टीम के उपकप्तान को बाहर करने की बात हो रही है वह भी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की तरफ़ से.

यूनिस - अजीब तो लगता ही है. मुझे पहली बार 2002 में उपकप्तान बनाने की पेशकश की गई थी लेकिन मैंने ठुकरा दी थी.

मुझे ख़ुद लेफ़्टिनेंट जनरल तौक़ीर ज़िया ने कहा था कि तुम पागल तो नहीं हो, मैं तुम्हें उपकप्तान बना रहा हूँ और तुम मना कर रहे हो.

उन्होंने कहा कि मान जाओ उपकप्तान बनने से तुम्हारा करियर लंबा हो जाएगा क्योंकि उपकप्तान बाहर नहीं होता.

उस समय वहाँ तब के कप्तान वक़ार यूनुस, कोच रिचर्ड पायबस और मैनेजर भी मौजूद थे.

मैंने तब भी कहा था कि मैं अपने प्रदर्शन के दम पर खेलना चाहता हूँ. वही लोग अब कह रहे हैं कि मुझे बाहर कर दो, ऐसा है तो मुझे बनाया ही क्यों था.

विवाद तो तब भी हुआ था जब आपको उपकप्तान बनाया गया था. बहुत से लोगों का कहना था कि योहाना इतना अच्छा काम कर रहे थे फिर उन्हें हटाया ही क्यों गया. क्या आपको भी हैरानी हुई थी.

यूनिस- हैरानी तो हुई थी, मुझे तो पता ही नहीं था कि मुझे ये पद दिया जा रहा था, मैं कभी इन पदों के चक्कर में पड़ता भी नहीं.

मैं तो मानता हूँ कि जो हक़दार है उसे ही पद मिलना चाहिए.

वैसे भी उपकप्तानी से होता क्या है, क्या मिल गया मुझे. जब योहाना थे तब उन्हें क्या ख़ास मिल गया. अब मैं उपकप्तान हूँ तो मुझे क्या मिल रहा है, कोई ज़्यादा पैसे तो नहीं मिल रहे.

और युसुफ़ योहाना से आपके रिश्ते पहले जैसे हैं.

यूनिस- बिल्कुल, ये कोई कुर्सी की जंग तो नहीं है. हालात पहले जैसे ही हैं.

आपकी बल्लेबाज़ी देख कर क्या ये समझ लें कि उपकप्तानी का कोई दबाव आपको महसूस नहीं हो रहा है.

यूनिस – मैं रन न भी बनाऊँ तो भी मुझ पर दबाव नहीं होता है.

मैं सिर्फ़ अपनी फ़ील्डिंग का मज़ा लेता हूँ और मैं सिर्फ़ अपनी फ़ील्डिंग की वजह से ही दबाव में था क्योंकि मोहाली में मुझसे दो आसान कैच छूट गए.

ऐसा होता नहीं है, साथी खिलाड़ी मुझे सेफ़ हैंड्स यानी सुरक्षित हाथ कहते हैं पर ख़राब फ़ील्डिंग की वजह से मुझ पर दबाव था.

मोहाली टेस्ट मेरे करियर के सबसे ख़राब टेस्ट मैचों में से था. पूरे मैच में बस एक अच्छी बात थी कि मैंने आख़िरी दिन सहवाग की विकेट ले ली.

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