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जूनियर हॉकी एशिया कप जीत कर वापसी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पहली बार जूनियर एशिया कप हॉकी प्रतियोगिता जीतकर लौटी भारतीय टीम का स्वागत उस ज़ोर-शोर से प्रशंसक नहीं कर पाए जितना भारी बरसात ने किया. ढोल-ताशों की गूंज के बीच फूलमालाओं से लदीं, हाथ में कप उठाए, हवाई अड्डे से बाहर ननिकली टीम के चेहरे से जीत की ख़ुशी साफ़ झलक रही थी. पाकिस्तान में खेले गए इस टूर्नामेंट के फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 5-2 से हराकर ने केवल पहली बार यह कप जीता बल्कि अगले साल हॉलैंड में होने वाली जूनियर विश्व कप प्रतियोगिता में भी अपनी जगह पक्की कर ली है. कोरिया को इस प्रतियोगिता में तीसरा स्थान मिला है. उत्साह से लबालब कप्तान संदीप माइकल ने इस जीत को एक बड़ी कामयाबी बताते हुए कहा, "पूरी टीम को इस जीत का श्रेय है. हम सब एक परिवार की तरह हैं और सभी खिलाड़ी पूरी लगन और आत्मविश्वास के साथ खेले." "हम जीत की इस कड़ी को और आगे ले जाना चाहते हैं." भारतीय टीम के कोच हरेन्द्र सिंह ने इस एक ऐतिहासिक जीत बताते हुए कहा, "जिस तरह से खिलाड़ियों ने मानसिक दृढ़ता और अनुशासन का परिचय दिया है उससे टीम के कई खिलाड़ियों को सीनियर टीम में मौक़ा मिल सकता है. इस टूर्नामेंट में पैनल्टी कॉर्नर के माहिर संदीप सिंह का खेल बहुत अहम रहा. उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में सबसे अधिक 16 गोल दागे और सीनियर टीम में जुगराज सिंह की जगह अपना दावा पेश किया. संदीप सिंह का कहना था, "मौक़ा मिलेगा तो देश का नाम रौशन करने में पीछे नहीं हटूँगा." टीम का स्वागत भारतीय राष्ट्रीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान धनराज पिल्लै और वर्तमान गोलकीपर देवेश चौहान सहित कई सीनियर और जूनियर खिलाड़ियों ने किया. धनराज पिल्लै ने इस जीत को मनोबल बढ़ाने वाली तो बताया लेकिन टीम में अपने वापस लौटने की बात को टाल गए. पिल्लै का मानना है कि एंड्रियन डिसूज़ा, तुषार खांडेकर और संदीप सिंह भविष्य के स्टार खिलाड़ी हैं. इस जीत के साथ ही भारत ने पुरुष, महिला और जूनियर तीनों वर्गों के एशिया कप अपनी झोली में डाल लिए हैं. |
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