मोहम्मद अली ने बयानों के भी ख़ूब पंच जड़े

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74 की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले मोहम्मद अली के पंच बॉक्सिंग रिंग में मशहूर थे. लेकिन उन्होंने पचास साल से ज्यादा वक़्त तक अपने 'वनलाइनर पंच' से भी दुनिया का भरपूर मनोरंजन किया.
उनकी कही बातों में से कुछ बहुत मशहूर हुईं.
मोहम्मद अली ने साल 1960 के रोम ओलंपिक खेलों में लाइट हेवीवेट कैटेगरी में गोल्ड जीतने के बाद कहा, "अमरीका को महानतम बनाना मेरा लक्ष्य है. इसलिए मैंने रूस के खिलाड़ी को हराया और मैंने पोल को हराया. अमरीका के लिए सोने का तमगा जीता. ग्रीक कहते हैं कि आप गुजरे दौर के कैसियस से बेहतर हैं."
साल 1960 के ओलंपिक खेलों के दौरान मोहम्मद अली ने उस वक़्त के हेवीवेट चैंपियन फ्लॉयड पैटरसन से कहा, "हे फ्लॉयड - मैंने तुम्हें देखा है. किसी दिन मैं तुम्हें मात दूंगा! भूलो मत, मैं सबसे महान हूं! "

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फरवरी 1964 में उस वक़्त के हेवीवेट चैंपियन सोनी लिस्टन से मुक़ाबले के पहले मोहम्मद अली ने कहा, " सोनी लिस्टन कुछ नहीं हैं. ये आदमी बात नहीं कर सकता. ये आदमी मुक़ाबला नहीं कर सकता. इस शख्स को सबक़ लेने की ज़रूरत है. इसे बॉक्सिंग का सबक़ लेना चाहिए. और क्योंकि ये मुझसे फाइट करने जा रहा है, इसे गिरना सीखना चाहिए "
मुक़ाबले के पहले उन्होंने कहा, "मैं लिस्टन को इतने एंगल से इतने पंच मारूंगा कि वो ख़ुद को घिरा हुआ महसूस करेंगे."
लिस्टन को मात देने के बाद मोहम्मद अली ने कहा, "मैंने दुनिया को हिला दिया! मैंने दुनिया को हिला दिया"
साल 1965 में फ्लॉयड पैटरसन को मात देने के पहले उन्होंने कहा, " मैं उन्हें इतनी बुरी तरह हराऊंगा कि उन्हें हैट पहनने के लिए शूहॉर्न की ज़रूरत होगी. "
साल 1966 में ब्रिटेन के ब्रायन लंदन को हारने के बाद उन्होंने कहा, "आपको उन्हें श्रेय देना होगा. उन्होंने डेढ़ राउंड तक अच्छा मुक़ाबला किया."

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साल 1967 में हुए मुक़ाबले के दौरान एर्नी ट्रेल ने उन्हें मोहम्मद अली कहने से इंकार कर दिया. इस पर मोहम्मद अली ने कहा, "मेरा नाम क्या है, मूर्ख? मेरा नाम क्या है? "
साल 1973 में केन नॉर्टन के हाथों हार झेलने के बाद मोहम्मद अली ने कहा, "मैंने कभी हारने के बारे में नहीं सोचा लेकिन अब ये हो चुका है. अब इसे ठीक करना है. वो तमाम लोग जो मुझमें भरोसा रखते हैं, उनके लिए ये मेरा कर्तव्य है. हम सभी को जीवन में हार झेलनी होती है."
साल 1974 में जॉर्ज फोरमैन के खिलाफ 'रंबल इन जंगल' मुक़ाबले के पहले उन्होंने कहा, "मैंने जॉर्ज फोरमैन को शैडो बॉक्सिंग करते देखा है और उसी तरह जीतते देखा है."
उन्होंने ये भी कहा, "ये बस एक काम है. घास उगती है. चिड़िया उड़ती हैं. लहरें रेत को बहा ले जाती हैं. मैं लोगों को मात देता हूं."
मोहम्मद अली ने जो फ्रेज़र के बारे में कहा, "जो फ्रेज़र इस कदर भद्दे दिखते हैं कि जब वो रोते हैं तो आंसू रास्ता बदल लेते हैं और उनके सिर के पीछे के हिस्से की तरफ चले जाते हैं."
उन्होंने ये भी कहा, "फ्रेज़र इतने भद्दे दिखते हैं कि उन्हें अपना चेहरा यूएस ब्यूरो ऑफ वाइल्डलाइफ को दे देना चाहिए."

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थ्रिला इन मनीला में जो फ्रेज़र को हराने के बाद मोहम्मद अली ने कहा, " मैं जिन लोगों के साथ मुक़ाबला करता हूं मैं उनका सर्वश्रेष्ठ बाहर लाता हूं लेकिन मैं दुनिया को अभी बताना चाहता हूं जो फ्रेज़र मेरा सर्वश्रेष्ठ बाहर लाते हैं. भगवान उन्हें सलामत रखें. "
मोहम्मद अली के बॉक्सिंग रिंग के बाहर दिए कई बयान चर्चित रहे हैं. उनमें से एक है, "बॉक्सिंग में तमाम गोरे लोग दो काले लोगों को एक दूसरे को पीटते हुए देखते हैं."
अपना नाम बदलने को लेकर उन्होंने कहा, "कैसियस क्ले एक गुलाम का नाम है. मैंने इसे नहीं चुना है और मैं इसे नहीं चाहता हूं. मैं मोहम्मद अली हूं, एक स्वतंत्र नाम, और मैं चाहता हूं कि जब लोग मेरे बारे में बात करें तो इस नाम को लें."

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अमरीकी सेना के लिए काम करने से इंकार करने पर मोहम्मद अली ने कहा, " वो मुझे यूनिफॉर्म पहनने और घर से 10000 मील दूर जाकर वियतनाम के भूरे लोगों पर बम और गोली चलाने के लिए क्यों कहते हैं जबकि लूइविल में कथित नीग्रो लोगों से कुत्ते जैसा बर्ताव किया जाता है और मानवाधिकार से वंचित कर दिया जाता है? "
मोहम्मद अली का कहना था, "एक तितली की तरह तैरो, मधुमक्खी की तरह डंक मारो. जिसे आंखें नहीं देख सकतीं, हाथ उस पर निशाना नहीं लगा सकते."
लेकिन मोहम्मद अली का सबसे मशहूर बयान रहेगा, "मैं महानतम हूं."
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