अब कहां हैं क्रिकेट के 'वंडर किड्स'?

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- Author, प्रदीप कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मुंबई के 15 साल के बल्लेबाज़ प्रणव धनावड़े ने क्रिकेट के मैदान में वो कारनामा कर दिखाया है, जिसकी अब तक केवल कल्पना की जाती थी.
एक पारी में 1009 नाबाद रन. इतने रन तो एक पारी में पूरी टीम से नहीं बनते.
यही वजह है कि ऑस्ट्रेलियाई दौर पर रवाना होने से पहले वनडे टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा, “इतने रन बनाना मजाक नहीं है. किसी भी तरह की परिस्थिति में, किसी भी तरह के मैदान में इतनी कम उम्र में इतने रन बनाना, बड़ी बात है. यह बहुत है, अब सुधार करना अहम है. वह जरूर विशेष प्रतिभा है. वह अपनी बल्लेबाज़ी के दौरान कैलकुलेट कर रहा था, यह काफी दुर्लभ है.”

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धोनी ने केवल प्रणव के करिश्मे की तारीफ़ ही नहीं की बल्कि उस ख़तरे की ओर भी इशारा किया है कि जिसमें कम उम्र में क्रिकेट के मैदान में धमाकेदार पारियां खेलने वाले वंडर किड्स क्रिकेट के मैदान में बहुत करिश्मा नहीं दिखा पाते.
हालांकि सचिन तेंदुलकर, विनोद कांबली और राहुल द्रविड़ सरीखे क्रिकेटरों ने स्कूली क्रिकेट के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट में भी कामयाबी का सफर जारी रखा.
लेकिन ऐसे दूसरे उदाहरण भी हैं, जहां वंडर किड बहुत आगे नहीं जा पाते हैं.
प्रणव धनावड़े ने भारतीय क्रिकेट में जिन पृथ्वी शॉ के 546 रनों का रिकॉर्ड तोड़ा है, उन्होंने हैरिश शील्ड क्रिकेट में नवंबर, 2013 में 546 रनों की पारी खेली थी.

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इसके बाद, दो साल बीतने के बाद भी पृथ्वी शॉ कोई बड़ा करिश्मा नहीं दिखा पाए हैं.
हालांकि अभी उनकी उम्र 16 साल ही है और वे मुंबई की अंडर-16 टीम के कप्तान भी हैं. उनकी तुलना सचिन तेंदुलकर से भी होती है, लेकिन उनके सामने उम्मीदों का मुश्किल पहाड़ है.
इन दोनों से पहले दिसंबर, 2010 में 13 साल के अरमान जाफ़र ने स्कूली टूर्नामेंट में 498 रनों की तूफानी पारी खेली थी.
पांच साल बीतने के बाद भी अरमान जाफ़र को अब भी अपने पांव मज़बूती से टिकाने की जरूरत पड़ रही है. हालांकि वे मुंबई की अंडर 23 और वेस्ट जोन की अंडर 19 टीम में शामिल हैं. लेकिन वे अब तक मिले मौकों को बड़े मौके मे तब्दील नहीं कर पाए हैं.

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उन्होंने अंडर 19 क्रिकेट में बीते साल लगातार तीन दोहरे शतक जरूर बनाए हैं, लेकिन उनका ये प्रदर्शन मुंबई की रणजी टीम में उन्हें जगह नहीं दिला पाया.
हालांकि उनसे एक साल पहले वंडर किड के तौर पर धमाका करने वाले सरफराज ख़ान जरूर थोड़े कामायब नजर आते हैं. सरफराज ख़ान ने महज 12 साल की उम्र में दिसंबर, 2009 में हैरिश शील्ड इंटर स्कूल टूर्नामेंट में 439 रनों की पारी खेली थी.
इसके बाद उन्होंने मिले मौके का काफी हद तक फ़ायदा उठाया है. महज 15 साल की उम्र में भारत की अंडर 19 टीम में जगह बनाने में कायमाब रहे. अंडर 19 टीम में नंबर छह बल्लेबाज़ के तौर पर उन्होंने कुछ धमाकेदार पारियां खेली हैं. मुंबई रणजी टीम में जगह हासिल करने में आ रही मुश्किलों को देखते हुए सरफराज ख़ान अब उत्तर प्रदेश की टीम में शामिल हो गए हैं.
इंडियन प्रीमियर लीग में उन्हें रॉयल चैलेंजर्स बेंगलौर की टीम में मौका मिला है. राजस्थान रायल्स के अपने दूसरे ही मैच में उन्होंने महज 21 गेंद पर 45 रन भी बनाए थे.

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हालांकि अरमान जाफ़र और सरफराज़ ख़ान के लिए बांग्लादेश में 22 जनवरी, 2016 से शुरू होने वाला अंडर 19 वर्ल्ड कप बड़ा मौका है.
वैसे क्रिकेट के वंडर किड्स में अमोल मजूमदार और वसीम जाफ़र का नाम भी आता है. अमोल मजूमदार भारतीय टीम में कभी शामिल नहीं हो पाए, जबकि वसीम जाफ़र का 31 टेस्ट और 2 वनडे का इंटरनेशनल करियर भी चमकदार नहीं रहा.
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