विजेंदर लगा पाएंगे जीत का पंच?

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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
विजेंदर सिंह की छवि ऐसे भारतीय मुक्केबाज़ की है जो रिंग के अंदर मुक्कों से और रिंग के बाहर स्टार लुक की वजह से सुर्खियां बटोरता रहा है.
हरियाणा में भिवानी के छोटे से गांव से निकले इस लड़के ने बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर बताया था कि इरादा बुलंद हो तो नामुमकिन कुछ भी नहीं.
ये अंदाज़ बढ़ती उम्र के बावजूद जारी रहा जब उन्होंने प्रोफ़ेशनल मुक्केबाज़ी की दुनिया में क़दम रखा.
प्रोफ़ेशनल मुक्केबाज़ी में लगातार दो मुक़ाबले जीतने के बाद इन दिनों वे ब्रिटेन में ज़ोरदार अभ्यास में जुटे हैं. उनका लक्ष्य साफ़ है, हर हाल में 19 दिसंबर को मैनचेस्टर एरेना में होने वाले तीसरे पेशेवर मुक़ाबले में बुल्गारियाई मुक्केबाज़ सामेट ह्यूसेनोव को हराना.

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विजेंदर पिछले दो मुक़ाबलों में सोनी विटिंग और डीन गिलेन को आसानी से हरा चुके हैं. मगर उन्हें अहसास है कि इस बार मुक़ाबला ज़्यादा वज़नदार खिलाड़ी से है.
लिहाजा वे 29 नवंबर से ही अपने ट्रेनर ली बियर्ड से ख़ास ट्रेनिंग ले रहे हैं.
विजेंदर ने पिछले दोनों मुक़ाबले में चार-चार राउंड जीते थे. इस बार उन्हें ह्यूसेनोव के सामने छह राउंड तक भिड़ना होगा.
ह्यूसेनोव विजेंदर के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा अनुभवी हैं. वे अब तक 14 मुक़ाबले में हिस्सा ले चुके हैं जिनमें सात में वे जीते हैं और सात में हारे हैं.
विजेंदर के पास केवल दो मैचों का अनुभव है, पर उनकी कामयाबी का प्रतिशत सौ फ़ीसदी है.
वैसे राउंड बढ़ने पर मुक़ाबले के लिए फ़िटनेस बेहतर होना ज़रूरी है. ली बियर्ड आजकल विजेंदर के फ़ुटवर्क और पंचों पर काम करने के साथ उनकी फ़िटनेस बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं.
विजेंदर बीच में थोड़े दिन के लिए भारत आए थे और कहा था कि वे अपनी तकनीक बेहतर करने पर फ़ोकस रखे हैं.

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विजेंदर हमेशा पक्के इरादों वाले रहे हैं. ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले देश के पहले मुक्केबाज़ बनने के बाद जब 2012 के लंदन ओलंपिक में क्वार्टर फ़ाइनल में हारे तो कहा गया कि उन्हें संन्यास ले लेना चाहिए.
विजेंदर ने आलोचनाओं से विचलित हुए बगैर इस साल पेशेवर मुक्केबाज़ी में क़दम रखा.
असल में यह अगले साल रियो में हो रहे ओलंपिक खेलों की तैयारी का साल था और विजेंदर को प्रमुख दावेदार माना जा रहा था.
इसलिए उनके पेशेवर मुक्केबाज़ बनने के फैसले से लोगों का चौंकना स्वाभाविक था.

विजेंदर ने पहली दो जीतों का जश्न नहीं मनाया है. उनके मुताबिक़ वे जब दो-तीन टाइटिल जीत लेंगे, तब जश्न मनाएंगे.
हालांकि उनके टाइटिल जीतने के दावे पर लोग उनकी बढ़ती उम्र को रोड़ा बता रहे हैं, बावजूद इसके विजेंदर के हौसलों में कोई कमी नहीं.
यह भी संयोग है कि विजेंदर के पेशेवर मुक्केबाज़ बनते ही भारतीय बॉक्सिंग फ़ेडरेशन के पूर्व महासचिव विंग कमांडर मुरलीधरन राजा ने देश में पेशेवर मुक्केबाज़ी की इंडियन बॉक्सिंग काउंसिल का गठन कर लिया.

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यही नहीं देश में पेशेवर बॉक्सिंग लीग शुरू करने की योजना पर तेज़ी से काम चल रहा है. इसलिए विजेंदर को पेशेवर मुक्केबाज़ी में हीरो बनाने का प्रयास हो रहा है.
पांच-छह मुक्केबाज पेशेवर बनने की लाइन में हैं. इसके लिए पहले इन्हें इंडियन बॉक्सिंग काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराना होता है.
फिर इन्हें फ़िटनेस टेस्ट के लिए ली बियर्ड के पास भेजा जाएगा. यदि वे पास हुए, तो उनकी पेशेवर मुक्केबाज़ बनने की राह खुल जाएगी लेकिन तब तक उनके नामों का खुलासा नहीं किया जाएगा.
विजेंदर को अपना चौथा या पांचवां मुक़ाबला भारत में राजधानी के इंदिरा गांधी स्टेडियम में खेलना है. शायद तब तक देश में पेशेवर बॉक्सिंग के लिए माहौल पूरी तरह बन जाएगा.
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