फ़िरोज़शाह कोटला: आसान नहीं है डीडीसीए की राह

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिन्दी के लिए
दिल्ली के फ़िरोज़शाह कोटला मैदान के प्रबंधन और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है.
फ़िलहाल भारत-अफ़्रीका के बीच चौथे टेस्ट मैच के आयोजन को लेकर भी अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा है.
साल 1996 में भारत-पाकिस्तान और श्रीलंका में सयुंक्त रूप से विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया गया.
और फ़िरोज़शाह कोटला मैदान में भारत और श्रीलंका का मुक़ाबला उसी साल दो मार्च को होना था.
जब खेल पत्रकार स्टेडियम पहुंचे तो ये देख कर दंग रह गए कि मैच के चंद रोज पहले तक स्टेडियम में नए पैवेलियन का निर्माण हो रहा था.

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फ़रवरी के अंतिम दिनों में जब हल्की-हल्की ठंड थी, तब कोटला मैदान में गर्मी बढ़ रही थी कि इन आधी-अधूरी तैयारियों के बीच दिल्ली को बीसीसीआई मैच कराने देगा या नहीं.
आख़िरकार एक रात को फ़िरोज़शाह कोटला में हलचल अचानक तेज़ हो गई और पता चला कि भारत के पूर्व कप्तान रवि शास्त्री स्टेडियम का मुआयना करने आए हैं.
रवि शास्त्री स्टेडियमों को अनुमति देने वाली समिति में थे और उन्होंने पिच और स्टेडियम का चक्कर लगाने के बाद मैच के आयोजन की अनुमति दे भी दी. ख़ैर जैसे-तैसे मैच हो गया.
इसके बाद भी न जाने कितने मैच फ़िरोज़शाह कोटला मैदान पर हुए हैं, लेकिन मैच होगा या नहीं यह सिलसिला अभी तक नहीं थमा है.
भारत और दक्षिण-अफ़्रीका के बीच चौथा और आखिरी टेस्ट मैच तीन दिसंबर से कोटला में खेला जाना है.

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फ़िरोज़शाह कोटला मैदान में होने वाली हर गतिविधि को डीडीसीए यानी दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन देखती है.
डीडीसीए पर 24 करोड़ रुपए का मनोरंजन कर बकाया है. यह कर उसे दिल्ली सरकार को चुकाना है.
दिल्ली सरकार ने उसे बकाया मनोरंजन टैक्स में राहत देने से मना कर दिया था.
हाई कोर्ट ने गत बुधवार को कहा कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम गुरुवार को ही एक दिसंबर से 10 दिसंबर तक के लिए प्रोविज़नल ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट प्रदान करे.
अदालत ने अपने फ़ैसले में डीडीसीए को एसडीएमसी को एक करोड़ रुपए 50-50 लाख की दो किस्तों में अदा करने को कहा.
इसके अलावा हाई कोर्ट ने मैच से संबंधित मामलों की निगरानी का अधिकार न्यायमूर्ति मुकुल मुदगल को सौंप दिया.

लेकिन दिल्ली सरकार और डीडीसीए के बयानों में ख़ासा अंतर दिख रहा है.
डीडीसीए ने कहा है कि उस पर केवल तीन करोड़ रुपए का कर बकाया है जबकि दिल्ली सरकार का दावा इससे कहीं अधिक है.
अब फ़ैसला हुआ है कि डीडीसीए को बीसीसीआई चौथे टेस्ट मैच के आयोजन के लिए ढ़ाई करोड़ रुपए देगी.
इससे पहले बीसीसीआई ने डीडीसीए को पिछले दो सीज़न के उसके हिस्से के 25 करोड़ रूपये नहीं दिए थे.
इसकी वजह यह थी कि डीडीसीए ने बीसीसीआई को साल 2013-14 की बैलेंस शीट पूरी करके नहीं भिजवाई थी.
ऐसे में अगर फिरोज़शाह कोटला में टेस्ट मैच का आयोजन नहीं होता तो बीसीसीआई उसे डिफॉल्टर लिस्ट में डाल सकती थी.
वैसे बीसीसीआई ने वार्षिक मदद रोकने के बावजूद डीडीसीए को पिछले दो सीज़न में क्रिकेट के विभिन्न आयोजनों के लिए 11 करोड़ रुपए दिए हैं.

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पूरे मसले को लेकर क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली कहते हैं कि डीडीसीए पर मनोरंजन कर में ज़ुर्माना भी शामिल है. अब यह उसे भरना ही होगा.
उनके मुताबिक़, डीडीसीए की छवि इतनी ख़राब हो चुकी है कि यह दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ अभ्यास मैच तक नहीं करा सके.
लोकपल्ली कहते हैं, "सुविधाओं की बात करें तो आने वाले समय में फिरोज़शाह कोटला के लिए मुश्किलें पैदा होने वाली है. अब तो बीसीसीआई भी दो बार सोचेगा कि इन्हें मैच दिया जाए या नहीं."
वो यह भी कहते हैं कि उन्हे क्लियरेंस इसलिए नहीं मिलेगी क्योंकि उन्हें डर है कि उन पर हेराफेरी के आरोप लगेंगे. कितने ही सालों से वह टेंपरेरी क्लियरेंस लेकर मैच करा रहे हैं.

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इससे पहले डीडीसीए को साल 2009 में भी तब शर्मशार होना पड़ा था जब फिरोज़शाह कोटला मैदान में भारत और श्रीलंका के बीच एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की सिरीज़ का आख़िरी मैच ख़राब पिच के कारण रद्द करना पड़ा था.
जिस समय मैच समाप्त घोषित किया गया उस समय श्रीलंका का स्कोर पांच विकेट पर 83 रन था.
पिच पर अनियमित उछाल से बल्लेबाज़ों को शुरू से ही परेशानी हो रही थी. एक गेंद तिलकरत्ने दिलशान की कोहनी पर भी लगी.
दिल्ली सरकार द्वारा उठाए गए मुद्दे पर कोर्ट ने कहा कि अभी इस मुद्दे को ही सामने रखा जाए, बाक़ी मुद्दों को बाद में देखा जाएगा.
लेकिन दिल्ली सरकार ने डीडीसीए के ख़िलाफ़ जो बाक़ी जांच बिठाई है, उस पर आने वाले समय में स्टेडियम का प्रबंधन और मुश्किल में आ सकता है.
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