टीम इंडिया में सबकुछ ठीक चल रहा है?

महेंद्र सिंह धोनी

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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

आख़िरकार एक लम्बी जद्दोजहद के बाद ये तय हो गया है कि भारतीय क्रिकेट टीम ज़िम्बाब्वे का दौरा करेगी.

भारतीय टीम वहां तीन एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय और दो ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच खेलेगी.

इससे पहले भारतीय टीम ने पिछले दिनों बांग्लादेश का दौरा किया था, जहां वह अपने क्रिकेट इतिहास में पहली बार किसी एकदिवसीय सिरीज़ में बांग्लादेश के हाथों 2-1 से हारी.

माना जा रहा है कि बांग्लादेश दौरे के बाद अब भारतीय चयनकर्ता ज़िम्बाब्वे दौरे पर कुछ अनुभवी खिलाड़ियों को आराम दें.

सनसनी

महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली

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इनमें टीम के नियमित कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और उपकप्तान विराट कोहली और आर अश्विन भी शामिल हो सकते है. बांग्लादेश में तो भारत की सबसे मज़बूत टीम गई थी और एकदिवसीय सिरीज़ समाप्त होते-होते खिलाड़ियों के बीत मतभेद की बातें भी खुलकर सामने आ गईं.

दरअसल बांग्लादेश के हाथों पहला मैच हारने के बाद भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टीम में तीन परिवर्तन करते हुए अजिंक्य रहाणे और उमेश यादव तथा मोहित शर्मा को बाहर कर दिया.

अजिंक्य रहाणे को टीम से बाहर करने की चारों तरफ आलोचना हुई क्योंकि पिछले काफ़ी समय से वह टीम के सबसे कामयाब बल्लेबाज़ो में से एक है.

इत्तेफ़ाक से टीम दूसरा मैच हार गई. उसके बाद कप्तान धोनी ने यह कहकर सनसनी फैला दी कि अगर टीम के हालात बदल जाएंगें तो मैं कप्तानी छोड़ने के लिए तैयार हूं.

नहीं है सही सबकुछ

सुरेश रैना और महेंद्र सिंह धोनी

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इतना ही नहीं उन्होंने रहाणे को टीम से बाहर करने के अपने फ़ैसले का यह कहकर बचाव किया कि रहाणे धीमी विकेटों पर स्ट्राइक रोटेट नहीं कर पाते. उनका यह तर्क किसी के गले नहीं उतरा.

इसके बाद तो तब हद ही हो गई जब टीम के उपकप्तान विराट कोहली ने मैच से पहले ही खुलेआम कह दिया कि इस समय खिलाड़ी निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हैं और इस हालात को साफ़-साफ़ समझा जा सकता है.

टीम के बीच बढ़ती दूरियों की बात को तब और बल मिला जब आर अश्विन धोनी के बचाव में उतरे और उन्होंने कहा कि वह धोनी के लिए मैदान पर जान देने को तैयार है. उन्होंने टीम की तुलना सेना से की.

इसके बाद सुरेश रैना ने भी कहा कि महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत में आईसीसी के तमाम टुर्नामेंट जीते हैं. वे कामयाब कप्तान हैं, उनका सम्मान होना चाहिए. ऐसे में लगता तो यही है कि टीम में सब कुछ सही नहीं चल रहा है.

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