आईसीयू में आइस हॉकी, अब चंदे का सहारा

इमेज स्रोत, AKSHAY KUMAR
- Author, सौतिक बिस्वास
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए भारत के आइस हॉकी खिलाड़ियों को चंदे का सहारा लेना पड़ रहा है.
अगले हफ़्ते होने वाले इंटरनेशनल आइस हॉकी फ़ेडरेशन चैलेंज कप में हिस्सा लेने कुवैत जाने के लिए इन खिलाड़ियों के पास पैसे नहीं हैं.
25 खिलाड़ियों के इस दल को उम्मीद है कि हफ़्ते भर तक चलने वाले इस टूर्नामेंट के लिए वे 20 लाख रुपए इकट्ठा कर लेंगे.
भारत के क्रिकेट स्टार कई लाख डॉलर कमा सकते हैं, लेकिन जब बाकी खेलों की बात आती है तो खिलाड़ियों को प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए पर्याप्त पैसा इकट्ठा करने के लिए जूझना पड़ता है.
बिज़नेस ग्रुप आगे आए

इमेज स्रोत, JONATHAN NACKSTRAND AFP
पैसा इकट्ठा करने के लिए पिछले सप्ताह देश के आइस हॉकी एसोसिएशन ने ट्विटर हैशटैग ##SupportIceHockey से एक अभियान शुरू किया है और इसके लिए एक वेबसाइट बनाई है.
एसोसिएशन के डायरेक्टर अक्षय कुमार ने बीबीसी को बताया कि बीते बुधवार तक छह लाख़ रुपए इकट्ठा हो गए थे.
इसमें एक बड़ा हिस्सा दक्षिण भारत के एक बिज़नेस ग्रुप द्वारा दिया गया अनुदान है.
खिलाड़ियों को एक और अग्रणी कारोबारी समूह महिंद्रा की ओर से पांच लाख रुपए का भरोसा मिला है.
समूह के मालिक आनंद महिंद्रा ने ट्वीट कर 'इन उत्साही खिलाड़ियों के हौसले' का समर्थन करने की घोषणा की थी.
लोगों का समर्थन

इमेज स्रोत, Reuters
अक्षय कुमार कहते हैं, "बहुत से लोग फोन कर रहे हैं और चंदा देने में रुचि दिखा रहे हैं. लोगों की अच्छी प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं."
भारत की आइस हॉकी टीम साल 2009 से ही अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेती रही है.
कुमार के मुताबिक़, "लेकिन फंड की दिक्कत बनी रहती है. टीम को आगे बढ़ते रहने के लिए हम हमेशा ही अपनी जेब से खर्च करते हैं लेकिन यह लंबे समय तक नहीं चल सकता."
उन्होंने कहा, "सरकार कहती है कि पदक जीतो, उसके बाद हम आपको फंड देंगे. यह बड़ी अजीबो ग़रीब स्थिति है."
एक सदी पुराना खेल
हालांकि भारतीय उपमहाद्वीप के एक बड़े हिस्से में आइस हॉकी अपेक्षाकृत कम जाना पहचाना खेल है. एक शताब्दी पहले इस खेल की शुरुआत शिमला में अंग्रेज़ों ने की थी.
बाद में 1970 के दशक में भारत प्रशासित लद्दाख क्षेत्र में भारतीय सेना ने इसे अपने खेलों में दोबारा शामिल किया और तबसे इसकी लोकप्रियता बढ़ी है.

इमेज स्रोत, AKSHAY KUMAR
वर्तमान में भारत में 2500 आइस हॉकी खिलाड़ी पंजीकृत हैं. यह संख्या 2002 में 300 थी. इसी दौरान इस खेल के एसोसिएशन का गठन किया गया.
भारत में लद्दाख में इस खेल के लायक कई बर्फीले मैदान हैं लेकिन केवल एक ऐसा मैदान है जो अंतरराष्ट्रीय मानकों पर ख़रा उतरता है और यह देहरादून में है.
अक्षय कुमार कहते हैं, "लेकिन इच्छा शक्ति की कमी की वजह से देहरादून का मैदान 2012 से ही बंद पड़ा हुआ है."
खिलाड़ी मुंबई, गुड़गांव, कोचीन और बैंगलुरु में मौजूद अपेक्षाकृत छोटे बर्फीले मैदानों पर अभ्यास करते हैं.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>













