धोनी की टीम पर अब भी कई सवाल

भारत इंग्लैंड ट्वेंटी ट्वेंटी क्रिकेट मैच

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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

"भारत की टीम में कोई भी खिलाड़ी ऐसा नही था, जिसने पांच टेस्ट मैचों की सिरीज़ खेली हो. पहले दो टेस्ट मैच में टीम अच्छा खेली, इसके बाद वह ऐसा नही कर सकी."

यह कहना हैं हाल ही में इंग्लैंड का दौरा समाप्त करने वाली भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का.

धोनी ने कहा, "'टेस्ट के बाद टीम ने एकदिवसीय सिरीज़ में शानदार खेल दिखाया. अब समय है कि वह गलतियों से सीखे ताकि आने वाली वेस्ट इंड़ीज़ और ऑस्ट्रेलिया सिरीज़ में अच्छा प्रदर्शन कर सके."

महेंद्र सिंह धोनी अपनी टीम को अनुभवहीन कहकर टीम का बचाव कर रहे हैं लेकिन ये अधूरा सच है. टीम इतनी अनुभवहीन और कमज़ोर भी नही थी.

इसी टीम ने इंग्लैंड से नॉटिंघम में खेला गया पहला टेस्ट मैच ड्रॉ कराया और उसके बाद लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान में इंग्लैंड को 95 रन से हराया तो उम्मीद बंधी कि यह टीम आगे भी शानदार प्रदर्शन करेगी.

बल्लेबाज़ों की हेकड़ी

भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी

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इसके बाद बाकी के तीन टेस्ट मैच में तो बस इंग्लैंड ही इंग्लैंड थी. साउथम्पटन, मैनचेस्टर और ओवल में भारतीय टीम बुरी तरह हारी. इसके कारण साफ थे.

पहला कारण शायद बाद में मिले तेज़ विकेट थे, जिन पर मुरली विजय से लेकर चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली और शिखर धवन और रोहित शर्मा को समझ ही नही आया कि कैसे स्विंग होती तेज़ गेंदों को खेला जाए.

जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड के अलावा क्रिस वोक्स और क्रिस जोर्डन की चौकड़ी के सामने भारतीय बल्लेबाज़ो की हेकड़ी निकल गई.

इसके अलावा दूसरा कारण अचानक इंग्लैंड के स्पिनर मोईन अली के सामने घुटने टेकना भी रहा.

एक दो अवसर पर अजिंक्य रहाणे और कप्तान धोनी ने कुछ संघर्ष किया लेकिन वह काफ़ी नही था.

भारत की साख

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तीसरा कारण भारत की बेहद कमज़ोर फिल्डिंग और चौथा कारण भारतीय गेंदबाज़ो की दिशाहीन गेंदबाज़ी रही.

विराट कोहली और चेतेश्वर पुजारा की नाकामी भारत की हार की सबसे बड़ी वजह रहे.

इसके बाद एकदिवसीय सिरीज़ में सुरेश रैना के आने से टीम की बल्लेबाज़ी और फिल्डिंग के साथ-साथ गेदंबाज़ी में भी सकारात्मक असर पड़ा.

लेकिन आखिरी एकदिवसीय और एकमात्र ट्वेंटी-ट्वेंटी मुक़ाबले में टीम फिर बिखर गई.

कप्तान धोनी ने ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच में अपने साथी खिलाड़ियों पर भरोसा नहीं किया और एक-एक रन छोड़े तो महज़ तीन रन से भारत हारा.

टीम के कप्तान और खिलाड़ियों को आत्मचिंतन की ज़रूरत हैं, ख़ासकर टेस्ट मैचों में भारत की साख को गहरी ठेस लगी है.

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