कैसा है साईना और सिंधु का रिश्ता?

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- Author, सुशांत एस मोहन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
दो साल लगातार विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में पदक जीतने का कारनामा करने वाली भारत की पहली बैडमिंटन खिलाड़ी बन गई हैं पी वी सिंधू.
सिंधू ने साल 2013 और फिर 2014 में भी विश्व बैंडमिंटन चैंपियनशिप का कांस्य पदक अपने नाम किया लेकिन यह काम उन्होंने तब किया जब भारत की नंबर एक बैडमिंटन खिलाड़ी साईना नेहवाल भी उनके सामने थीं.
हालांकि इस वजह से सिंधू और साईना के रिश्ते में कभी कोई खटास नहीं आई.
लेकिन आज हालात अलग हैं और सिंधू और साईना के रिश्ते में एक मोड़ आ गया है गुरु पुलेला गोपीचंद की वजह से.
गुरु-शिष्याओं की लड़ाई?
साईना नेहवाल और पी वी सिंधू ने पुलेला गोपीचंद के मार्गदर्शन में अपना करियर शुरू किया.
मगर हाल ही में साईना ने भारतीय खेल प्राधिकरण को लिखे पत्र में गोपीचंद को बैडमिंटन कोच पद से हटाने का आग्रह किया.

लेकिन क्या गुरु-शिष्या के इस मनमुटाव से साईना और सिंधू के रिश्ते पर भी कुछ फ़र्क पड़ा?
सिंधू कहती हैं, "मैं और साईना कोर्ट पर प्रतिद्वंद्वी हैं लेकिन बाहर हम दोस्त हैं. गोपी सर और साईना के बीच जो हुआ वो उनका निजी मामला है. साईना सीनियर है और इस नाते मैं उनसे अच्छा ही बर्ताव करती हूं."
कौन बेहतर?

साईना नेहवाल और पीवी सिंधू दोनों ही भारत की टॉप खिलाड़ी हैं. ऐसे में कौन बेहतर है इस पर राष्ट्रीय बैडमिंटन कोच पी गोपीचंद का कहना था, "सिंधू के कद का फ़ायदा उसे मिलता है और वह ज्यादा आक्रामक भी खेलती है. वहीं साईना की तकनीक लाजवाब है."
लेकिन साईना से तुलना किए जाने पर सिंधू का कहना था, "मुझे अच्छा लगता है कोई मेरी साईना से तुलना करता है. लेकिन मैंने अभी खेलना शुरू ही किया है और अभी काफ़ी सफ़र तय करना बाक़ी है."
पी वी सिंधू का पूरा ध्यान इस समय एशियन खेलों पर है.
"हम काफ़ी मेहनत कर रहे हैं और गोपीचंद सर मुझे सिखा रहे हैं कि कैसे आखिरी कुछ मिनटों में अंक नहीं गंवाने हैं. हम उम्मीद कर रहे हैं कि एशियन खेलों में कांस्य को स्वर्ण में बदल देंगे."
17वें एशियन खेल दक्षिण कोरिया के इंचियोन में 19 सितंबर से शुरू होने वाले हैं जहां साईना नेहवाल और पी वी सिंधू एक बार फिर आमने सामने होंगी.
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