ये कोहली का क्रिकेट है....

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- Author, पंकज प्रियदर्शी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
सोशल नेटवर्किंग साइट्स ट्विटर और फेसबुक पर नई-नई उपमाएँ गढ़ी जा रही हैं. कोई कह रहा है बुरा न मानो कोहली है, तो कोई कोलावेरी डी की तर्ज पर कोहलीवेरी डी गुनगुना रहा है.
क्रिकेट के दिग्गज हों या हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के महानायक, अमरीका में कैंसर का इलाज करा रहे युवराज सिंह हो या टीम के उनके साथी खिलाड़ी, सभी एक सुर में इस विराट क्रिकेटर के सम्मान में सुर मिला रहे हैं.
हो भी क्यों न हो. कोई एक शतक मारे तो तुक्का हो सकता है, कोई 10 में एक पारी अच्छा खेले तो तुक्का मान सकते हैं, लेकिन ये विराट कोहली का क्रिकेट है.
ऑस्ट्रेलिया की त्रिकोणीय सिरीज के दौरान होबार्ट में उनकी पारी हो या एशिया कप के तीन मैचों में दो शतक और एक अर्धशतक हो, विराट ने बता दिया है कि उन्हें हल्के में लेना उचित नहीं और टीम की उप कप्तानी यूँ ही नहीं मिली है.
पृष्ठभूमि
बात 2006 की है. नई दिल्ली के फ़िरोज़शाह कोटला मैदान पर दिल्ली और कर्नाटक के बीच रणजी ट्रॉफ़ी का मैच चल रहा था.
मैच अहम मोड़ पर था. लेकिन मैच की एक सुबह दिल्ली की टीम के एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के पिता का निधन हो गया. टीम को जितनी उनकी ज़रूरत थी, परिवार को भी उतनी ही.
लेकिन कठिन घड़ी में अपने भावनाओं को काबू में करते हुए न सिर्फ़ वो खिलाड़ी मैदान पर आया बल्कि 90 रन भी बनाए और अपनी टीम को बचाया भी.
आउट होने के बाद फिर वो अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल हुआ. ये था उस खिलाड़ी का दृढ़ निश्चय और क्रिकेट के प्रति उसकी दीवानगी.
अब वो खिलाड़ी और अनुभवी हो गया है, लेकिन उसकी दीवानगी बरकरार है और बहुत कुछ करने का जोश इतना कि पूछिए मत.
आज जब वो खिलाड़ी पिच पर होता है, तो ऑफ़ साइड में उसके लगाए स्ट्रोक इतने कलात्मक होते हैं कि विरोधी खिलाड़ी भी दिल थामे देखते हैं. कवर ड्राइव उनकी इतनी ख़ूबसूरत है कि लगता है बस समय रुक जाए.
विश्व कप के बाद विराट कोहली ने अपने को क्रिकेट में इतना परिपक्व बना लिया है कि आज एक दिवसीय टीम में वे उप कप्तानी करते हैं.
होबार्ट में श्रीलंका के खिलाफ उनकी धमाकेदार पारी हो या फिर एशिया कप के मैच में पाकिस्तान के खिलाफ उनकी बेहतरीन बल्लेबाजी, विराट कोहली ने अपनी उपयोगिता साबित की है.
दोनों ही मैचों में भारत के लिए करो या मरो की स्थिति थी और दोनों की मैचों के संकट मोचक बने विराट कोहली. श्रीलंका के खिलाफ मैच में भारत को 40 ओवर में ही 321 रन बनाने का लक्ष्य मिला था.
एक नहीं कई बेजोड़ पारियाँ

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होबार्ट की वो शानदार पारी क्रिकेट प्रेमी भूले नहीं होगे. विराट ने 86 गेंदों पर नाबाद 133 रनों की पारी खेलकर न सिर्फ भारत को जीत दिलाई बल्कि फाइनल की दौड़ में बनाए रखा.
एशिया कप के तीन में से दो मैचों में शतक लगा चुके विराट के सामने एक बार फिर वही चुनौती थी. भारत के सामने पाकिस्तान ने 330 रनों का लक्ष्य रखा था. ये लक्ष्य इतना बड़ा था जैसा भारत ने कभी पूरा नहीं किया था.
लेकिन विराट ने पाकिस्तान गेंदबाजों के हर आक्रमण का दिलेरी से सामना किया और नतीजा सबके सामने है. भारत न सिर्फ जीता बल्कि दो ओवर पहले ही जीत गया.
आउट होने के बाद ड्रेसिंग रूम में पहुँचे विराट कोहली को बाद में इसका अंदाजा हुआ कि उन्होंने मैदान पर क्या कमाल दिखाया है.
बांग्लादेश के खिलाफ विश्व कप के अपने पहले ही मैच में शतक ठोंकने वाले विराट कोहली दृढ़ निश्चय की एक प्रतिमूर्ति हैं.
याद कीजिए वर्ष 2008 का वो समय जब भारत की सीनियर क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में धूल चटाई और उसी दिन विराट कोहली के नेतृत्व में भारतीय अंडर-19 टीम ने विश्व कप का ख़िताब जीता.
और अब ये विराट भारतीय क्रिकेट के युवा सम्राट से आगे बढ़ते-बढ़ते एक भरोसेमंद सम्राट बनते जा रहे हैं.












