किस्मत के धनी

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- Author, प्रदीप मैगज़ीन
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए विशेष
जब भी मैं कप्तान के तौर पर महेंद्र सिंह धोनी के असाधारण करियर के बारे में सोचता हूं मेरे दिमाग मैं वही पुराना शाश्वत प्रश्न उठता है कि क्या हमारे कर्म हमारे भाग्य को प्रभावित करते हैं या भाग्य हमारे क्रमों को.
लॉर्ड्स की हार अब इतिहास है, नॉटिंघम टेस्ट संभावनाओं से भरा है और जैसाकि हाल के सालों में हुआ है, इस टेस्ट में भारतीय टीम वापसी भी कर सकती है.
लॉर्ड्स की चुभने वाली हार के पीछे वजहों और भारतीय टीम की वापसी करने की क्षमता पर काफ़ी कुछ लिखा जा चुका है.
पहले की भारतीय टीमों की तुलना में मौजूदा टीम मुसीबत के समय और मज़बूती से वापसी करती है. यही वजह है कि ये टीम अब भी रैंकिंग में नंबर एक है.
आत्मविश्वास

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धोनी पारंपरिक तर्क के विपरीत विश्व कप के फ़ाइनल में फ़ॉर्म में चल रहे युवराज सिंह से पहले बैटिंग करने के लिए उतरे थे. धोनी का आत्मविश्वास और अपने फ़ैसलों पर यक़ीन उनके व्यक्तित्व का सराहनीय हिस्सा है.
उन्होंने कई विवादास्पद निर्णय किए और अधिकतर बार पासा उनके हक़ में ही गिरा है. मसलन टी20 विश्व कप में आख़िरी ओवर जोगिंदर शर्मा सरीखे नए खिलाड़ी को देना. अगर मिसबाह के शॉट पर श्रीसंत ने वो कैच नहीं पकड़ा होता, तो सकता है कि धोनी को दोबारा कभी कप्तानी नहीं मिलती.
वो कहावत कि भाग्य दिलेर लोगों का साथ देता है, बहुत बार दोहराई जा चुकी है लेकिन चाहे टी20 विश्व कप हो या एक दिवसीय विश्व कप धोनी के लिए ये हमेशा सच साबित हुई है.
मुंबई में हुए विश्व कप के फ़ाइनल में धोनी ने जो क़दम उठाया उसमें विफलता कोई विकल्प ही नहीं था लेकिन उन्होंने भाग्य को चुनौती दी और जीत हासिल की.
किस्मत का खेल

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अब लॉर्ड्स टेस्ट की ओर लौटते हैं. अपने प्रमुख गेंदबाज़ के घायल होने पर धोनी ने एक और हिम्मतवाला काम किया. उन्होंने विकेटकीपर के पैड खोलकर गेंद अपने हाथ में ले ली. और अपनी पहली ही गेंद पर उन्होंने पीटरसन का विकेट लगभग झटक लिया था. उसके बाद उन्हें दूसरा मौक़ा मिला.
उनकी गेंद पर विकेटकीपर ने कैंच पकड़ा और सारी टीम जीत की ख़ुशी में डूब गई लेकिन टीवी अंपायर ने फ़ैसला पलट दिया. इस बार किस्मत ने बहादुर व्यक्ति का साथ नहीं दिया.
लॉर्ड्स की हार के बाद भारतीय टीम की काफ़ी आलोचना हो रही है और इसमें सबसे अधिक गुस्सा धोनी पर उतारा जा रहा है. उनकी कप्तानी पर कई ओर से सवाल उठे हैं. ये हैरानगी की बात नहीं है क्योंकि हमारा समाज खेलों में जीत-हार पर ऐसी ही प्रतिक्रिया देता रहा.
बहरहाल एकमात्र हार त्रासदी नहीं बन सकती. मौजूदा भारतीय टीम अपना ख़्याल रख सकती है और अगर ये ऐसा नहीं कर सकती तो भविष्य वो अपना चैंपियन स्टेट्स खो देगी.
शेक्सपीयर के नाटक किंग लियर में एक किरदार कहता है, "सब सितारों का खेल है....सितारे हमारे भाग्य पर राज करते हैं." जो लोग इस किरदार पर यक़ीन रखते हैं उन्हें ये चिंता करनी चाहिए कि क्या सितारों ने धोनी का साथ छोड़ दिया है?












