वर्ल्ड कप का काउंटडाउन- एक कीपर बल्लेबाज़ सफल, दूसरे पर बढ़ा दबाव

भारत-ऑस्ट्रेलिया मैच

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    • Author, विधांशु कुमार
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

कम स्कोर के मैच अक्सर रोमांचक बन जाते हैं. मिच मार्श के ताबड़तोड़ रन के बावजूद ऑस्ट्रेलिया की टीम 188 पर ऑल आउट हो गई तो लगा कि मानो भारतीय टीम आसानी से जीत हासिल कर लेगी.

लेकिन तेज़ बोलिंग के लिए मददगार पिच पर ऑस्ट्रेलिया ने, भारतीय टॉप ऑडर को फेल कर दिया और मैच पर शिकंजा कस दिया. लेकिन बड़ी उठापटक वाले इस मैच में केएल राहुल और रवींद्र जडेजा ने भारत को आख़िरकार जीत दिला दी.

इस मैच ने आगामी वनडे वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम के कुछ परेशानियों को हल किया जबकि कुछ सवालों के जवाब तलाशना अभी भी बाक़ी हैं.

मिच मार्श

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मार्श की ताबड़तोड़ पारी

मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए सिरीज़ के पहले मैच में भारत के स्टैंड-इन कप्तान हार्दिक पांड्या ने टॉस जीता और पहले बोलिंग का फ़ैसला किया.

मैच के दूसरे ओवर में ऑस्ट्रेलियाई ओपनर ट्रैविस हेड ने मोहम्मद सिराज का स्वागत कवर्स की दिशा में शानदार चौका लगाकर किया. लेकिन सिराज ने हिम्मत नहीं हारी और ओवर की आख़िरी गेंद में ट्रैविस हेड को क्लीन बोल्ड कर दिया. इस विकेट के पीछे भी सिराज ने थोड़ी तरकीब लगाई थी जिसकी तारीफ़ सुनील गावस्कर ने कमेंट्री में जमकर की .

उन्होंने कहा, "जिस गेंद पर चौका लगा वो 130 किलोमीटर की रफ़्तार से फेंकी गई थी. लेकिन चौका लगने के बाद उन्होंने बोलिंग स्पीड तेज़ कर दी. 140 की रफ़्तार से बॉल थोड़ा-सा अंदर की ओर स्विंग हुई और देखिए क्या नतीजा निकला."

लेकिन पहला विकेट पांच रन पर गिरने का बावजूद ऑस्ट्रेलिया ने रन रेट को गिरने नहीं दिया. कप्तान स्टीवन स्मिथ और मिच मार्श ने नौवें ओवर में टीम के स्कोर को 50 पार पंहुचा दिया. दोनों की जोड़ी ख़तरनाक दिख रही थी और उन्होंने 63 गेंदों पर 72 रनों की साझेदारी निभा ली थी.

लेकिन टीम के लिए ऐसी मुश्किल वक़्त में भारतीय कप्तान ने विपक्षी कप्तान को पवेलियन का रास्ता दिखा दिया. हार्दिक की बाहर जाती गेंद पर स्मिथ के बल्ले का किनारा लगा और कीपर केएल राहुल ने कैच लपक लिया.

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दूसरी छोर पर मिच मार्श बेहद आक्रामक बैटिंग कर रहे थे. दूसरे विकेट के लिए 72 की साझेदारी में उन्होंने 50 रन बनाए थे जबकि स्मिथ ने सिर्फ 22 रन बनाए. उन्होंने स्पिनरों पर कड़ा प्रहार किया और चौके-छक्के की बरसात लगा दी.

लेकिन मार्श जडेजा की जाल में फंस गए और एक फुल लेंग्थ की गेंद को मैदान से बाहर पंहुचाने की फ़िराक़ में मोहम्मद सिराज को कैच थमा बैठे. उन्होंने 65 गेंदें में 81 रन बनाए जिसमें 10 चौके और 5 छक्के शामिल रहे. मार्श जब आउट हुए तब ऑस्ट्रेलिया का स्कोर था बीसवें ओवर में तीन विकेट पर 129 रन.

जब तक मार्श बैटिंग कर रहे थे ऐसा लग रहा था मानों ऑस्ट्रेलियाई टीम 350 का टारगेट भारत को देना चाहती है. मार्श ने इतनी आसानी से बैटिंग की, कि बाद के बल्लेबाज़ों ने भी बेसब्री दिखाई और एक के बाद एक विकेट झटके.

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दरअसल इस पिच पर तेज़ गेंदबाजों को अच्छी उछाल और स्विंग मिल रही थी. मार्श ने मुश्किल पिच पर भी अग्रेसिव बैटिंग की और ऑस्ट्रेलिया के बाक़ी बल्लेबाज़ों के लिए चुनौती खड़ी कर दी. उनकी कॉपी करने के चक्कर में विकेट जल्दी-जल्दी गिरे. ऑस्ट्रेलिया ने अंतिम छह विकेट सिर्फ 20 रनों पर गंवा दिए और मात्र 36वें ओवर में टीम ऑल आउट हो गई.

ऑस्ट्रेलिया के इस साधारण बैटिंग प्रदर्शन में मोहमम्द शमी, मोहम्मद सिराज और रवींद्र जडेजा की बेहतरीन बोलिंग का बड़ा हाथ रहा. ऑस्ट्रेलियाई पारी के मिड इनिंग्स के बाद शमी ने शानदार स्पेल फेंकते हुए तीन विकेट लिए. उन्होंने 28वें ओवर में इंग्लिस, 30वें ओवर में ग्रीन और 32वें ओवर में ख़तरनाक स्टॉयनिस को आउट करके ऑस्ट्रेलिया लोवर ऑर्डर की कमर तोड़ दी. सिराज ने हेड के अलावा आख़िरी दो विकेट लेकर कंगारूओं की पारी को समेट दिया. वहीं जडेजा ने मार्श और ग्लेन मैक्सवेल के अहम विकेट लिए.

ऑस्ट्रेलिया की पारी 35.4 ओवर में 188 रनों पर ख़त्म हो गई. एस समय 350 का स्कोर सेट करने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम शायद 250 के लक्ष्य को नज़र में रखती तो शायद एक चैलैंजिग स्कोर भारत के सामने पेश आता.

ऑस्ट्रेलियाई टीम

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ऑस्ट्रेलियाई बोलिंग की शानदार शुरुआत

छोटे स्कोर का पीछा करते हुए टीम इंडिया ने बेहद ख़राब शुरुआत की. ऑस्ट्रेलिया के सीमर्स पिच से मिल रही मदद का फ़ायदा उठा रहे थे. मिचेल स्टार्क ने पहले ओवर से ही भारतीय बल्लेबाज़ों को परेशान किया. पारी की दूसरे ओवर में इशान किशन स्टॉयनिस की गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट हो गए.

वहीं स्टार्क ने विराट कोहली को लगातार स्टंप के बाहर बीट किया और आख़िरकार उन्हें अंदर आती गेंद पर आउट कर दिया. स्टार्क ने यही हाल सूर्यकुमार यादव का भी किया और 16 रनों पर भारत ने 3 विकेट गंवा दिए. दूसरी छोर पर शुभमन गिल को विकेट के पीछे दो जीवनदान भी मिला जिसका उन्होंने फ़ायदा उठाने की कोशिश की. उनके बल्ले से तीन चौके निकले और केएल राहुल के साथ उन्होंने पारी को संभालने की कवायद शुरु कर दी.

लेकिन स्टार्क की ही गेंद पर वो बैकवर्ड प्वाइंट में लाबुशान के हाथों लपके गए. इस ज़बरदस्त कैच ने भारतीय चेज़ को और पीछे धकेल दिया.

इस विकेट के पीछे ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्मिथ का भी बड़ा हाथ रहा. उन्होंने देखा की स्टार्क शानदार बोलिंग कर रहे हैं तो पांच ओवर के बाद एक और ओवर उन्हें क्यों ना दे दिया जाए. लो-स्कोरिंग मैच में दूसरी टीम को ऑल आउट करना ही जीत की चाबी होती है ऐसे में अपने मुख्य स्ट्राइक बोलर से उन्होंने एक और विकेट की उम्मीद रखी और स्टार्क ने उन्हें निराश नहीं किया.

चार विकेट पर 39 के स्कोर पर भारतीय टीम दबाव में आ गई थी. ऐसे में कप्तान हार्दिक पांड्या बैटिंग करने आए और पहली गेंद पर ही चौका लगाकर अपनी मंशा साफ़ कर दी. उन्होंने केएल राहुल के साथ पारी को संभालने की कोशिश की. दोनों ने 5वें विकेट के लिए 44 रन जोड़ लिए लेकिन स्टॉयनिस की एक बढ़िया बाउंसर गेंद पर पंड्या स्कवायर लेग पर कैच आउट हो गए.

केएल राहुल और रवींद्र जडेजा

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इमेज कैप्शन, केएल राहुल और रवींद्र जडेजा की पार्टनशिप

राहुल और जडेजा की मैच-जिताउ पार्टरनशिप

भारतीय टीम को अभी भी 100 से ज़्यादा रन बनाने थे और आधी टीम पवेलियन लौट चुकी थी. राहुल और जडेजा की जोड़ी के बाद लोवर-ऑर्डर के बोलर्स की आने बाक़ी थे.

ऐसे में मैच जिताने की ज़िम्मेदारी इन दोनों पर ही थी. केएल राहुल अभी हाल ही में टेस्ट टीम में अपनी जगह खो चुके थे ऐसे में उन पर दबाव ज़रूर रहा होगा. लेकिन वो बेहद शांत हो कर बैटिंग कर रहे थे. जडेजा ने भी समझ लिया कि रन 100 से ज़्यादा है लेकिन गेंदें भी काफ़ी बची है ऐसे में संभल कर खेलना बेहतर होगा.

दोनों ने नो-रिस्क बैटिंग का अप्रोच अपनाया. उनकी ये तरकीब रंग लाई. राहुल ने अपना अर्धशतक पूरा किया और 75 रनों पर नाबाद रहे जबकि जडेजा 45 रनों पर नॉट आउट रहे. भारत ने 39वें ओवर में मैच पांच विकेट से जीत लिया.

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संभल कर खेलना रंग लाया

मैच के बाद राहुल ने कहा कि उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई बोलर्स से निपटने के लिए ख़ास स्ट्रेटेजी बनाई. उन्होंने कहा, "स्टार्क की गेंद काफी स्विंग कर रही थी और विकेट भी जल्दी गिर रहे थे. मैंने और जडेजा ने तय किया कि स्टार्क को संभलकर खेला जाए और बाक़ी बोलर्स के ख़िलाफ़ रिस्क ना लें लेकिन रन बनाने के मौक़े भी न गंवाए. हम चाह रहे थे कि जो भी मौके़ आएं उन पर हम रन बनाएं, जिससे बोलर्स पर भी प्रेशर बन सके. जडेजा ने भी अच्छी पारी खेली और हमें सफलता मिली."

वहीं रवींद्र जडेजा को ऑलराउंड प्रदर्शन की वजह से प्लेयर आफ़ द मैच का ख़िताब मिला. उन्होंने 46 रन देकर दो विकेट लिए और 45 नाबाद रन बनाए. लगभग 8 महीने बाद वनडे मैच खेल रहे जडेजा अपने परफॉरमेंस से खुश नज़र आए.

उन्होंने मैच के बाद कहा, "वनडे में बोलिंग टेस्ट से काफ़ी अलग होती है. यहां गेंद की स्पीड, एंगल आदि में काफ़ी वैरिएशंस करने होते हैं. मैं खुश था क्योंकि मेरा टप्पा सही पड़ रहा था जिससे मुझे विकटें भी मिली. जहां तक बैटिंग की बात है, जडेजा और राहुल जानते थे कि अगर हम क्रीज पर डटे रहे थे जीत हमारी होगी इसलिए विकेट ना खोना हमारी प्राथमिकता थी."

वहीं भारतीय कप्तान हार्दिक पांड्या ने भी टीम की जमकर तारीफ़ की. उन्होंने कहा, "मैच में बोलिंग और बैटिंग दोनों के दौरान हम दबाव में आ गए थे लेकिन हमने अपना संयम नहीं खोया. हमें पता था कि अगर हमने हालात पर काबू पा लिया तो आगे का रास्ता हमारे लिए आसान हो जाएगा. फील्डिंग में भी हमने अच्छा खेल दिखाया और गिल और जडेजा ने बेहतरीन कैच लपके. जीत के लिए आपको ऐसा ही करना होता है."

रवींद्र जडेजा

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इमेज कैप्शन, ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पहले वनडे मैच के दौरान शॉट लगाते भारत के रवींद्र जडेजा

वर्ल्ड कप का काउंटडाउन शुरु

दरअसल सिरीज़ के अलावा भी ये मैच जीतना भारत के लिए ज़रूरी था. वनडे मैचों का अगला आईसीसी वर्ल्ड कप भारत में ही होना है और उसकी तैयारी के लिए सिर्फ 14 इंटरनेशनल मैच बचे हैं जिसका पहला मैच वानखेड़े में खेला गया.

इस मैच में कप्तान रोहित शर्मा पारिवारिक कारणों से नहीं खेले और उनकी जगह ईशान किशन को ओपनिंग का मौक़ा मिला. बांग्लादेश में शानदार दोहरा शतक लगाने के बाद किशन का बल्ला खामोश-सा हो गया है और इस मैच में मात्र तीन रन पर आउट होकर उन्होंने एक बड़ा मौक़ा गंवा दिया. अगले मैच में रोहित शर्मा वापसी करेंगे और किशन को फिर बेंच पर बैठना होगा.

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देखने वाली बात ये भी थी कि मैच में किशन से कीपिंग नहीं कराई गई और वो बतौर बल्लेबाज़ ही खेले. विकेट के पीछे कीपिंग करने की ज़िम्मेदारी हाल ही में टेस्ट टीम से निकाले गए केएल राहुल को मिली. राहुल इस मौक़े की अहमियत को समझते थे.

उन्होंने बेहतरीन कीपिंग की और बैट से भी भारत को जीत दिलाई. यानी जहां एक कीपर-बैट्समैन ने वर्ल्ड कप के लिए अपनी दावेदारी को मज़बूत की तो वहीं दूसरे ने मौक़ा गंवा दिया.

वर्ल्ड कप के ही टीम को देखते हुए इस मैच में रवींद्र जडेजा पर भी काफ़ी दबाव था, जिसकी दो वजह थी. पहला, वो 8 महीने बाद वनडे में वापसी कर रहे थे और दूसरा टीम में उनके प्रतिद्वंदी अक्षर पटेल शानदार बैटिंग फ़ॉर्म में चल रहे हैं.

वहीं जडेजा के लिए आते के साथ सिलेकटर्स को प्रभावित करना जरूरी था जो उन्होंने बखूबी किया. मैच के बाद अजीत अगरकर ने भी उनकी तारीफ़ करते हुए कहा कि वो जडेजा ने वनडे के लिए ज़रूरी सटीक गेंदबाज़ी करके दिखाई.

इस सिरीज़ में अभी दो और वनडे मैच खेले जाने हैं जिनमें भारतीय टीम अपनी कुछ और दिक्कतों को निपटाना चाहेगी.

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