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हॉकी वर्ल्ड कप 2023: भारतीय टीम स्पेन से हर पहलू में बीस साबित हुई
- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत ने हॉकी विश्व कप के ग्रुप डी में जीत के साथ अभियान शुरू किया है. उन्होंने स्पेन को 2-0 से हराया.
इस जीत से भारत ने ग्रुप में पहला स्थान बनाने की उम्मीदों को बनाए रखा है.
भारत की जीत में अमित रोहिदास और हार्दिक ने गोल जमाए.
भारत ने इस मुक़ाबले में गेंद पर ज़्यादा क़ब्ज़ा रखने की रणनीति अपनाई और यह रणनीति कारगर साबित हुई.
भारत ने 67 प्रतिशत समय गेंद को अपने नियंत्रण में रखा. इस कारण स्पेन भारत पर दवाब बनाने में कामयाब नहीं हो सकी.
भारतीय फॉरवर्डों ने ढिलाई दी ही नहीं
भारतीय फारवर्ड लाइन पूरी तरह से एकजुट होकर खेली. इसमें हाफ लाइन ने भी अहम योगदान किया.
इस फारवर्ड लाइन की खूबी यह रही कि उसने हमले बनाने में दोनों फ्लैंकों का इस्तेमाल किया.
इसकी वजह से स्पेन के डिफेंस में दरारें दिखने लगीं और इसका भारत ने भरपूर फ़ायदा उठाया.
ललित उपाध्याय, अभिषेक, सुखजीत, मनदीप, आकाशदीप और शमशेर सिंह लंबे समय से एक साथ खेल रहे हैं. इस वजह से उनकी आपसी-समझ बहुत अच्छी दिखी.
इस कारण स्पेन के मुक़ाबले भारतीय हमलों में ज़्यादा पैनापन नज़र आया. पर भारत को अगले मुक़ाबले में इंग्लैंड का सामना करना है, इसलिए हमलों को गोल में बदलने में और पारंगत हासिल करनी होगी.
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भारतीय डिफेंस का जीत में अहम योगदान
भारतीय टीम को आमतौर पर बढ़त बनाने के बाद आखिरी क्वार्टर में बढ़त खोने के लिए जाना जाता है.
हमें कॉमनवेल्थ गेम्स में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ 4-1 की बढ़त बनाने के बाद उसे 4-4 की बराबरी करने का मौका दे दिया था. लेकिन भारतीय डिफेंस इस मुक़ाबले में अधिक चुस्त दिखे.
स्पेन ने आखिरी पांच मिनट में एक गोल निकालने के लिए हमलावर रुख़ अपनाकर दवाब बनाने का प्रयास किया. पर भारतीय डिफेंस ने सर्किल में जरा भी हड़बड़ाहट नहीं दिखाई और शांत दिमाग से खेलते हुए गेंद को क्लियर करने का प्रयास किया.
भारतीय डिफेंस का सफ़ाई के साथ अपने सर्किल में टैकल करने का ही परिणाम था कि भारत ने स्पेन को ज़्यादा पेनल्टी कॉर्नर नहीं दिए.
इसके अलावा जो उन्हें मिले भी, उन्हें गोल में बदलने से रोके रखने में वह कामयाब रही.
हमें याद है कि एफ़आइएच प्रो लीग के मुक़ाबले में भारतीय डिफेंस ने स्पेन को 19 पेनल्टी कॉर्नर दे दिए थे और यही भारत की हार का कारण भी बनी थी. लेकिन इस मैच में भारतीय टीम एकदम से बदली हुई नज़र आई.
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हार्दिक का रहा कमाल का प्रदर्शन
भारतीय मिडफील्डर हार्दिक सिंह के प्रदर्शन की जितनी भी तारीफ़ की जाए, वह कम है.
उन्होंने हमले बनाने में तो अहम योगदान किया ही, साथ ही दूसरे क्वार्टर के 11वें मिनट में जिस खूबसूरती से गोल जमाया, उसे देखकर मजा आ गया.
वह बाएं फ्लैंक में अकेले ही गेंद लेकर निकले और चार डिफेंडरों को गच्चा देने में सफल हो गए और गोल पोस्ट के पास से गेंद गोल में डालकर सभी को हतप्रभ कर दिया.
तीसरे क्वार्टर में भारत को भले ही आकाशदीप के प्रयास से पेनल्टी स्ट्रोक मिला पर इसका भी आधार बनाने वाले हार्दिक ही थे. उन्होंने ही हमला बनाकर गेंद आकाशदीप सिंह को दी थी.
भारत ने इस पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में बदल दिया होता तो 3-0 की बढ़त के साथ मजबूत स्थिति में पहुंच सकता था. लेकिन हरमनप्रीत की पुश पर स्पेन के गोलकीपर आंद्रेस राफी के शानदार बचाव से यह गोल नहीं हो सका.
असल में वह सही पूर्वानुमान लगाने में सफल रहे. पर गेंद उनके पैर से टकराकर गोल लाइन पर तो गई पर पूरी लाइन पार नहीं पर पाने की वजह से यह गोल नहीं दिया गया.
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कृष्ण पाठक साबित हुए मजबूत दीवार
भारतीय टीम के बारे में अक्सर कहा जाता है कि हम पीआर श्रीजेश का विकल्प तलाशने में सफल नहीं हो सके हैं. लेकिन इस महत्वपूर्ण मैच में भारतीय कोच ग्राहम रीड ने कृष्ण पाठक पर भरोसा किया और वह इस भरोसे पर पूरी तरह से सफल साबित हुए.
कृष्ण पाठक ने कम से कम चार मौकों पर शानदार बचाव करके भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई.
एक तो उनका पूर्वानुमान बहुत ही अच्छा रहा और उन्होंने बचाव के समय हमेशा अच्छी लाइन पकड़ी.
आमतौर पर देखा जाता है कि पहले क्वार्टर में पिछड़ने के बाद टीम दूसरे क्वार्टर में वापसी करने का जबरदस्त प्रयास करती है. स्पेन ने भी ऐसा ही किया और वह इस क्वार्टर के पहले पेनल्टी कॉर्नर को पाने में सफल हो गई.
इस मौके पर लिए गए शॉट पर भारतीय डिफेंस के गच्चा खा जाने पर कृष्ण पाठक ने दाहिनी ओर डाइव लगाते हुए गेंद पर स्टिक लगाकर उसे बाहर की दिशा दिखाकर ख़तरा टाल दिया. यही नहीं पाठक ने जब भी गोल ख़तरे में पड़ा, वह चट्टान की तरह खड़े नज़र आए.
आमतौर पर किसी भी गोलकीपर के बेहतर प्रदर्शन में डिफेंस की भूमिका अहम होती है. डिफेंस के सजग भरा प्रदर्शन करने से गोलकीपर की जिम्मेदारी थोड़ी कम हो जाती है और वह महत्वपूर्ण मौकों के लिए तैयार रहता है. इस मैच में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला.
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आखिरी मौकों पर गलतियों से बचने की ज़रूरत
खेल समाप्ति में 11 मिनट बाकी रहने पर अभिषेक ने जिस तरह से ग़लत टैकल करके येलो कार्ड प्राप्त किया. इसका स्पेन को फ़ायदा मिला, क्योंकि भारत को 10 मिनट 10 खिलाड़ियों से खेलना पड़ा.
अभिषेक के बाहर जाते ही भारतीय टीम अपने हाफ़ में 25 गज की रेखा के अंदर नज़र आई, इससे भारतीय गोल ख़तरे में पड़ता नज़र आया.
हालांकि भारत ने जल्द ही रक्षात्मक रुख छोड़कर हमले बोलने शुरू किए.
अभिषेक ने जिस पोजिशन में फाउल किया, उससे बचा जा सकता था. यह बात समझने की है कि किसी भी मैच में 2-0 की बढ़त बहुत ज़्यादा नहीं होती है और एक गोल पड़ जाने पर विपक्षी टीम को मुक़ाबले में वापसी का मौका मिल जाता है.
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आक्रामक शुरुआत का फ़ायदा
स्पेन ने भले ही विश्व कप हॉकी के इस मुक़ाबले में हमलों की शुरुआत की. पर जल्द ही पहल भारत के हाथों में आ गई और उसने हमलावर रुख अपनाकर स्पेन को रक्षात्मक रुख़ अपनाने के लिए मजबूर कर दिया.
शुरुआत में भारतीय हमलों को होशियारी के साथ टैकिल करके उन्होंने भारत को पेनल्टी कॉर्नर तक लेने से दूर बनाए रखा.
भारत ने इसके बाद भी हमलावर रुख़ बनाए रखा और पहले क्वार्टर के 12वें मिनट में मिले दूसरे पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर भारत को बढ़त दिला दी.
यह गोल जमाने वाले अमित रोहिदास थे.
अमित ओडिशा के इसी इलाके से ताल्लुक रखते हैं और उनके लिए इससे ज़्यादा गर्व की बात क्या हो सकती है कि घरेलू मैदान पर भारत को बढ़त दिलाने वाला गोल उन्होंने जमाया.
इस मौके पर भारत के ड्रैग फ़्लिकर हरमनप्रीत सिंह के शॉट को डिफेंडर ने रोक दिया, पर छिटककर गेंद अमित रोहिदास को मिली और उन्होंने थोड़ा ऊंचा रहता शॉट खेलकर गोल भेद दिया.
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