भारत-पाकिस्तान क्रिकेट में ऐसा क्या है जो इसे बेहद ख़ास बनाता है

INDvsPAK, PAKvsIND, भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच

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    • Author, प्रदीप मैगज़ीन
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

भारत और पाकिस्तान एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट में रविवार को जब आमने-सामने होंगे तो एक अलग ही रोमांच होगा.

वैसे भी यह दोनों देश अब आपस में कम ही खेलते हैं, साल दो साल में इक्का-दुक्का मैच वह भी आईसीसी के टूर्नामेंट में तो रोमांच एक अलग ही स्तर का होता है. इसे एक क्रिकेट मैच की तरह ही नहीं देखा जाता बल्कि राजनीतिक रूप से भी देखा जाता है.

दोनों देशों की प्रतिद्वंद्विता क्रिकेट के मैदान से बाहर भी है. इसके अलावा भारत-पाकिस्तान के खिलाड़ियों में दोस्ती भी है. यह एक सी बोली या भाषा बोलते हैं. एक ही जैसी परिस्थितियों से आते हैं इसलिए भारत और पाकिस्तान के मुक़ाबलों में जो बात है वह किसी और देश से मुक़ाबले में नहीं.

भारत और पाकिस्तान के मुक़ाबलों को मुझे भी बहुत नज़दीक से देखने का मौक़ा मिला और उनकी बहुत सी यादें भी हैं. मुझे तीन बार पाकिस्तान जाने का तब अवसर मिला जब भारतीय क्रिकेट टीम वहां खेलने गई. ये अवसर साल 1997, 2004 और 2006 में मिले.

साल 2004 और 2006 में जब पाकिस्तान गया तो वहां के आत्मिक स्वागत को भूल नहीं सकता. साल 2006 में वहां की आम जनता ने जिस तरह भारतीय टीम और भारतीय दर्शकों को जो वहां मैच देखने गए थे, उन्हें जिस तरह का प्यार और मोहब्बत दी वह बयान नहीं कर सकता.

साल 1997 में जब मैं पाकिस्तान गया तब पहली बात दिमाग़ में ये आई थी कि यह एक धार्मिक देश है. लेकिन बाद में लगा जैसे कि हम अपने ही देश में हैं. ये वो सब यादें हैं जिसे आदमी कभी भूल नहीं सकता.

यह सोचकर कि दोनों मुल्कों की टीमें राजनीति की वजह से आपस में खेल नहीं सकती बेहद दुख होता है, क्योंकि हिंदुस्तानियों और पाकिस्तानियों का जो व्यक्तिगत संपर्क है वह यह दर्शाता है कि यह जो आपसी दुश्मनी है वह राजनीतिक ज़्यादा है वास्तविक कम.

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कारगिल युद्ध के बीच भारत-पाकिस्तान मैच का वो वाकया

मुझे भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1999 में हुए विश्व कप के मैच का एक मज़ेदार क़िस्सा याद है जब इंग्लैंड में वह मैच हुआ तब "कारगिल युद्ध" चल रहा था. तब यह भी माना जा रहा था कि शायद इस मैच को रद्द करना पड़े क्योंकि दोनों देश आपस में जंग कर रहे हैं और खेल भी रहे हैं.

इंग्लैंड में भारत और पाकिस्तानी भी बड़ी तादाद में रहते हैं. इसे देखते हुए वहां दंगों का भी डर था. हमारे साथ जो भी ड्राइवर थे वह सभी पाकिस्तानी थे. उन पाकिस्तानी ड्राइवर ने मैच के दिन कहा कि हम ऐसा करते हैं कि गाड़ी पर दोनों देशों का झंडा लगाकर स्टेडियम जाएंगे जिसे वह ख़ुद ही लेकर आया. तो यह तो तब का माहौल था जब दोनों देशों के बीच बॉर्डर पर जंग छिड़ी थी.

दूसरा क़िस्सा मुझे तब का याद है जब साल 1997 में हम कराची एयरपोर्ट पर पहुँचे और सब पत्रकार बाहर निकले लेकिन तब दिमाग़ में थोड़ी दहशत और डर था क्योंकि बहुत साल बाद भारतीय टीम या पत्रकार पाकिस्तान जा रहे थे.

लेकिन बाहर निकलकर होटल जाने के लिए हम टैक्सी में बैठे तो उसके पंजाबी ड्राइवर ने पंजाबी में बात करनी शुरू कर दी. मैं भी पंजाबी हूँ इसलिए मैं भी पंजाबी में बात करने लगा. उसके बाद उसने एक गाना लगाया जो उन दिनों बहुत पॉपुलर था "यह मेरा इंडिया आई लव माई इंडिया". वह आलिशा चिनॉय का गाना था. इसके बाद हमारे दिल का डर एकदम ग़ायब हो गया. ऐसा महसूस हुआ जैसे कि हम अपने ही घर में हैं.

सलीम अल्ताफ़

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पाकिस्तानी खिलाड़ियों से जुड़े क़िस्से

पाकिस्तानी खिलाड़ियों से जुड़े क़िस्से भी मुझे याद आ रहे हैं क्योंकि भाषा एक सी है. इससे खिलाड़ियों से जुड़ाव और लगाव बड़े कमाल के होते हैं.

पाकिस्तान के मैनेजर सलीम अल्ताफ़ से मेरी अच्छी दोस्ती रही. वह तेज़ गेंदबाज़ भी रह चुके हैं. जब पाकिस्तान की टीम साल 2005 में भारत आई तब वह मैनेजर थे और मेरी मुलाक़ात चंडीगढ़ में हुई. वह टेनिस खेलना चाहते थे. उन्होंने मुझसे कहा कि क्या होटल में इसकी व्यवस्था हो सकती है, मैंने उनसे कहा कि देखता हूँ. इसके बाद लॉन टेनिस एसोसिएशन से बात कर वहां उन्होंने टेनिस खेलनी शुरू की.

उन दिनों मैं भी टेनिस खेला करता था तो हमारी दोस्ती सी हो गई. उसके बाद हम बेंगलुरु और कोलकाता गए. मैंने वह सिरीज़ कवर की. तब मैं अपना टेनिस रैकेट भी साथ रखने लगा. उनके लिए बेंगलुरु में टेनिस खेलने का इंतज़ाम कराया और टेनिस खेलने लगे.

वीडियो कैप्शन, भारत और पाकिस्तान के बंटवारे में ये स्कूल भी बंट गया

कोलकाता में भी ऐसा किया. कोलकाता में आपको मालूम ही है कि मैच के बाद स्टेडियम से बाहर निकलना कितना मुश्किल होता है, लेकिन वह गाड़ी लेकर बाहर मेरा इंतज़ार करते थे. वह जगह पवेलियन के बाहर थी जिसके ठीक सामने स्टेडियम में जाने का रास्ता था. वह ऐसा इसलिए करते थे ताकि हम जल्दी होटल पहुंचकर टेनिस खेलने जाएं.

उसी सिरीज़ का एक वाक़या है जब अहमदाबाद में एकदिवसीय मैच से पहले सलीम अल्ताफ़ मेरे साथ सुबह-सुबह नाश्ता कर रहे थे तो उन्होंने अपनी टीम को कहा कि वह थोड़ी देर से जाएंगे. इसी बीच टीम बस से निकल गई तो उन्होंने कहा कि वह गाड़ी से जाएंगे लेकिन ऐसा सुनकर सभी घबरा गए क्योंकि मामला सुरक्षा का भी था.

पाकिस्तान का मैनेजर मैच देखना चाहता है, अहमदाबाद शहर है और सिक्योरिटी का मामला है. ख़ैर क्या किया जाए. हमने टैक्सी किराये पर ली और होटल वालों ने कहा कि अपने साथ किसी पुलिसवाले को ले जाओ. तब वह एक पुलिस वाला हमें स्टेडियम तक लेकर गया और रास्ते में जो भी कोई पूछताछ होती तो वह कहता कि यह पाकिस्तान क्रिकेट टीम के मैनेजर हैं तो हमें कहीं रोका नहीं गया.

चेतन शर्मा

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मियांदाद का चेतन शर्मा की गेंद पर छक्का

इसके अलावा एक क़िस्सा और है जब जावेद मियांदाद ने चेतन शर्मा की गेंद पर छक्का मारकर मैच जिताया तो उसके दो बड़े दिलचस्प पहलू हैं.

पहला तो यह कि जब चेतन शर्मा उस मैच और टूर्नामेंट के बाद वापस भारत आए तो उन्हें कस्टमवालों ने दिल्ली एयरपोर्ट पर काफ़ी तंग किया. क्योंकि उस समय वह विलेन से बन गए थे कि भारत मैच जीत रहा था लेकिन इन्होंने आख़िरी गेंद पर छक्का खाकर मैच हरवा दिया. लोग उनसे बहुत ख़फ़ा थे.

लेकिन आज अगर आप चेतन शर्मा से बात करो तो वे कहते हैं कि उस छक्के से उन्होंने कमाई बहुत की. जब भी भारत-पाकिस्तान मैच होता तो टेलिविज़न वाले उन्हें ज़रूर बुलाते कि यह छक्का खाने वाले चेतन शर्मा हैं. कुल मिलाकर उस छक्के से उन्हें नुक़सान नहीं हुआ फ़ायदा ही हुआ. और अब तो वह चयन समिति के अध्यक्ष भी हैं.

अब दोनों देश आपस में प्रतिद्वंद्वी भी हैं, मैच में हार जीत भी होती है लेकिन लम्बे समय बाद तो खिलाड़ी की योग्यता ही याद रहती है और उसका प्यार.

पाकिस्तान से जुड़ी एक और याद है जब मैं साल 2004 में अपनी फ़ैमिली के साथ लाहौर गया. एक दिन शाम को हम मार्केट गए. तभी अंग्रेज़ी बोलने वाली दो तीन महिलाएं हमारे पास आईं. उन्होंने शायद पहचान लिया कि यह भारत से आए हैं क्योंकि मेरी पत्नी के माथे पर बिंदी लगी हुई थी.

तब बहुत से भारतीय मैच देखने पाकिस्तान गए थे. उन्होंने हमसे कहा कि यह आपका ही मुल्क है और आप ज़रा भी दिक़्क़त महसूस नहीं करें. अगर आपको कोई भी ज़रूरत हो तो प्लीज़ हमको बता दीजिए. इससे हमें बहुत ही संतुष्टि और सुकून मिला कि पहले ही दिन हमारे साथ ऐसा व्यवहार हुआ.

इसके अलावा साल 2006 के दौरे में हम मोहनजोदाड़ो गए. वहां एक छोटा सा लड़का जो हमारे आगे चल रहा था उससे हमने बात करनी शुरू की. जब उसे पता चला कि हम भारत से हैं तो वह कहने लगा, "मैंने शाहरुख़ खान को एक लेटर लिखा है. वह लेटर क्या आप उन्हें दे देंगे वहां?"

शाहरुख ख़ान

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मैंने कहा दे दूँगा तो वह अपने घर गया. मैंने उसका आधे घंटे तक इंतज़ार किया. वह उर्दू में लिखी एक चिट्ठी लेकर वापस लौटा और कहा कि प्लीज़ यह आप उन्हें दे दीजिएगा.

इसके अलावा साल 2004 में जब लाहौर में भारत-पाकिस्तान से टेस्ट मैच हार गया था तब उनका एक कदम बहुत अच्छा था कि दोनों देशों के दर्शकों को अलग अलग नहीं बैठाया जाएगा. वैसे भारत और पाकिस्तान के दर्शकों को जो वीज़ा मिलता है उसके तहत उन्हें अलग अलग बिठाया जाता है. ऐसा दर्शकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए होता है.

यह बड़ा ही मास्टर स्ट्रोक टाइप था क्योंकि इसके बाद हम सब आपस में घुल मिल गए और महसूस किया कि हम दोनों एक जैसे हैं. उस लाहौर टेस्ट मैच में आप मानेंगे नहीं कि मैं दर्शकों के बीच बैठा हुआ था और जब लोगों को पता चला कि मैं भारतीय हूँ तो उन्होंने मेरे ऑटोग्राफ़ तक लिए. वह एक हिंदुस्तानी का ऑटोग्राफ़ ले रहे थे. यह सब वह कमाल के दृश्य या सीन हैं जिनके बारे में मैं और कुछ बोल नहीं सकता.

जब पाकिस्तान ने अपने भारत दौरे में चेन्नई में जीत हासिल की तो स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने खड़े होकर जिस तरह उनका सम्मान किया वह दृश्य भी भुलाए नहीं भूलता. ऐसा आज के दौर में होना संभव नहीं लगता. एक तो हम एक दूसरे देश का दौरा नहीं कर रहे और दूसरा दूरी बढ़ती जा रही है.

पाकिस्तानियों को लगता है कि भारतीयों के सिर पर सींग हैं जैसे कि लाहौर में मैच देखते समय एक पाकिस्तानी ने मुझसे कहा, "आप तो हम जैसे ही हैं. मैं तो समझता था या जैसा मुझे हिंदुस्तानियों के बारे में बताया गया था तो ऐसा लगता था कि उनके सिर पर सींग लगे हैं, बड़े ख़तरनाक से लोग हैं, लेकिन यह तो अच्छा हुआ कि मैं आपसे मिला और पहली बार अहसास हुआ कि आप भी तो हम जैसे हैं."

अब हम है तो एक जैसे ही लेकिन ओटीटी प्लेटफ़ार्म पर ऐसे दिखाया जाता है कि हम आपस में दुश्मन है और जंग चल रही है. यह चीजें न हों तो अच्छा है- खेल के लिए भी और मुल्क के लिए भी.

(जैसा प्रदीप मैगज़ीन ने आदेश गुप्त को बताया)

वीडियो कैप्शन, भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान ये दोस्त विरोधी बन जाते हैं

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