नीरज चोपड़ा के लिए 90 मीटर की बाधा बनी असली चुनौती

नीरज चोपड़ा

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    • Author, मनोज चतुर्वेदी
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए

टोक्यो ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत के लिए रजत पदक जीतने वाले पहले एथलीट बन गए.

उन्होंने यूजीन (अमेरिका) में चल रही विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप की पुरुष जैवलिन स्पर्धा में 88.13 मीटर की थ्रो से रजत पदक जीता.

इससे पहले भारत के लिए सिर्फ़ लॉन्ग जंपर अंजू बॉबी जॉर्ज ही कांस्य पदक जीत सकी हैं. उन्होंने 2003 की पेरिस चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था.

एक साल पहले टोक्यो ओलंपिक में अप्रत्याशित रूप से स्वर्ण पदक जीतने वाले नीरज चोपड़ा ने रजत जीतकर भले ही देश का मान बढ़ाया पर उनके चेहरे पर इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद भी टोक्यो वाली ख़ुशी नहीं दिखी.

इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स जब स्पर्धा की समाप्ति पर गले मिलकर बधाई देने आए, उस समय उनके चेहरे पर ख़ुशी नज़र नहीं आई. शायद उन्हें स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने का मलाल रहा.

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टोक्यो से बेहतर प्रदर्शन

नीरज चोपड़ा ने हालांकि टोक्यो ओलंपिक में 87.53 मीटर की थ्रो से स्वर्ण पदक जीता था और वह यहाँ पर उससे बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहे हैं. इसके बाद भी वह एंडरसन पीटर्स को चुनौती देते नज़र नहीं आए. पीटर्स के 90 मीटर से आगे निकलते ही उनका स्वर्ण पदक जीतना पक्का हो गया था.

एंडरसन पीटर्स 2019 की विश्व चैंपियनशिप के भी स्वर्ण पदक विजेता हैं. इस चैंपियनशिप में नीरज चोटिल होने की वजह से भाग नहीं ले सके थे. चेक गणराज्य के वेल्दाच ने कांस्य पदक जीता है.

नीरज ने जैवलिन स्पर्धा के क्वॉलिफायर में 88.29 मीटर की एक ही थ्रो से फ़ाइनल में स्थान बना लिया था. पर वह फ़ाइनल में क्वॉलिफायर वाले प्रदर्शन को नहीं दोहरा सके. नीरज चोपड़ा के बारे में माना जाता है कि वह पहले और दूसरे प्रयास में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयास करते हैं.

लेकिन फ़ाइनल में वह ऐसा करने में सफल नहीं हो सके. उनकी पहली थ्रो पर फाउल हो गया और दूसरी पर वह 82.39 मीटर ही जैवलिन फेंक सके. नीरज ने तीसरे प्रयास में 86.37 मीटर की थ्रो से टॉप ब्रेकेट में स्थान बना लिया.

उन्होंने चौथे प्रयास में 88.13 मीटर का प्रदर्शन करके रजत जीतना तो पक्का किया पर एंडरसन पीटर्स से पार पाने के लिए वह अगले दो प्रयासों पर सफल नहीं हो सके. दोनों ही प्रयास फाउल हो गए. इस कारण उन्हें रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा.

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90 मीटर की बाधा

नीरज चोपड़ा का सपना है कि वह 90 मीटर के बैरियर को पार करें. उन्होंने इस सीजन की जिस तरह शुरुआत की, उससे लग रहा था कि वह इस चैंपियनशिप में अपने इस सपने को हासिल कर लेंगे क्योंकि वह स्टॉकहोम डायमंड लीग में 89.94 मीटर की थ्रो कर चुके थे और उन्हें मात्र छह सेंटीमीटर की दूरी ही हासिल करनी थी. पर वह इस चैंपियनशिप में सीजन की शुरुआत वाले प्रदर्शन को दोहराने में कामयाब नहीं हो सके.

यह माना जाता है कि जैवलिन में प्रदर्शन ताक़त और गति के संतुलन से परिणाम निकलता है. कई बार आप वह संतुलन नहीं बना पाते हैं. इसमें खिलाड़ी के मानसिक दबाव की भूमिका अहम होती है.

नीरज चोपड़ा टोक्यो में बिना उम्मीद के गए थे. लेकिन अब ओलंपिक स्वर्ण विजेता के तौर पर जाने से सवा अरब देशवासियों की भावनाओं का दबाव होना स्वाभाविक है.

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नीरज के बारे में माना जाता है कि वह भावनाओं पर काबू रखकर अंदर के डर से पार पाते हैं. फिर भी नीरज ने अपने नाम जो उपलब्धि दर्ज कराई है, वह कोई अन्य नहीं करा सका हैं.

नीरज चोपड़ा भले ही इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते कि वह शुरुआती थ्रो में अपना बेस्ट देने का प्रयास करते हैं. लेकिन उन्होंने टोक्यो में इसी तरह स्वर्ण जीता था और यहाँ वह शुरुआती थ्रो में बेस्ट देने में सफल नहीं हो सके.

इससे बने दबाव से शायद वह 90 मीटर के बैरियर को पार करने में असफल रहे. हालांकि वह अपनी बात के पक्ष में यह दलील देते हैं कि 2017 की एशियाई चैंपियनशिप में आखिरी प्रयास में 85.23 मीटर की थ्रो से स्वर्ण पदक जीता था. इसी तरह उन्होंने पिछले साल इंडियन ग्रां प्री में आख़िरी थ्रो पर 88.07 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था.

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