मिताली राज: भरतनाट्यम से क्रिकेट में रनों का अंबार लगा संन्यास लेने तक

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    • Author, वंदना
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है. ट्विटर पर जारी अपने बयान में उन्होंने सभी को समर्थन और प्यार के लिए शुक्रिया कहा है.

उन्होंने ये भी लिखा है कि वे सभी के आशीर्वाद और समर्थन से अपनी दूसरी पारी का इंतज़ार कर रही है

23 साल लंबा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का सफ़र, 200 वनडे पार करने वाली पहली महिला क्रिकेट खिलाड़ी ..और भी न जितने रिकॉर्ड .

जब महिला क्रिकेट को लेकर आज की तरह चर्चा नहीं होती थी, तब से मिताली राज का नाम सुनते आए हैं. उन्हें महिला क्रिकेट की पोस्टर गर्ल कहना ग़लत नहीं होगा.

26 अप्रैल 1999 को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलना शुरु किया था और ये सफ़र 23 साल बाद 8 जून को ख़त्म हुआ है जब मिताली ने क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की है.

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सचिन तेंदुलकर, जयसूर्या, मियांदाद जैसे खिलाड़ियों ने ही इतने वनडे मैच खेलें हैं.

3 दिसंबर 1992 को जन्मी मिताली दरअसल भरतनाट्यम नृतकी थीं. ऐसी डांसर जिसे क्रिकेट भी बहुत पसंद था. और एक समय आया जब दोनों में से एक हो चुनना था.

क्रिकेट को चुनना आसान था पर उसकी राह मुश्किलों भरी थी ख़ासकर 90 के दशक में जब महिला क्रिकेट को कोई ख़ास पूछ नहीं थी.

मिताली का करियर

पाँच साल पहले बीबीसी को दिए इंटरव्यू में मिताली ने बताया था, ''क्रिकेट में मुझे मेरे माता-पिता ने डाला था तो उन्होंने हमेशा मेरी हौसला अफ़ज़ाई की लेकिन दादा-दादी को पसंद नहीं था.

"उन्हें लगता था कि धूप में खेलूँगी तो काली हो जाऊंगी और शादी कौन करेगा. आप जानते ही हैं कि भारत में यह सब भी दिक़्क़त है. आंटी लोगों से भी दिक़्क़त होती थी क्योंकि मैं परिवार के किसी फ़ंक्शन में मौजूद ही नहीं होती थी."

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मिताली ने उन दिनों अपनी जगह बनाई जब सामाजिक और पारिवारिक दिक्कतों के साथ महिला क्रिकेटरों को सुविधाओं की भी परेशानी थी. बीबीसी से बातचीत में मितली ने कुछ यूँ बताया, जब मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था, तो महिला क्रिकेट के बारे में लोग ज़्यादा नहीं जानते थे.

"हम जब किट बैग के साथ सफ़र करते थे तो लोग पूछते थे आप हॉकी के खिलाड़ी हो? कोई यह नहीं सोचता कि हम क्रिकेट खिलाड़ी भी हो सकते हैं."

लेकिन उन सीमाओं के बीच ही मिताली ने अपनी सीमा इतनी बड़ी कर दी कि जल्द ही वो भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बन गईं और ऐसा हिस्सा बनीं कि रिटायर होने तक जमी रहीं. 1999 में वनडे के बाद जल्द ही 2002 में वे टेस्ट टीम का भी हिस्सा हो गईं.

मैदान पर अपने बल्ले से वो लगातार बोलती रहीं और मैदान के बाहर भी.

मुझे याद एक बार उनसे पूछा गया था कि उनका पसंदीदा पुरुष क्रिकेटर कौन है और उन्होंने पलट कर जवाब दिया था-क्या आप किसी पुरुष क्रिकेटर से पूछते हैं कि आपकी पसंदीदा महिला क्रिकेटर कौन है

महज़ 16 साल की उम्र में मिताली ने 26 जून 1999 को आयरलैंड के ख़िलाफ़ वनडे में डेब्यू किया और पहली ही पारी में नाबाद 114 रन बनाए. उनकी पारियों की बात करें तो 19 साल की उम्र में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ़ 214 रन बनाए थे. उस पारी ने उन्होंने देश की ही नहीं अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया था. ये टेस्ट में उनका अब तक का सबसे बड़ा स्कोर है.

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2005 में जब भारत पहली बार वर्ल्ड कप में पहुंचा था तो मिताली उसका अहम हिस्सा थीं. घुटने में चोट के बाजवूद उन्होंने बतौर कप्तान न्यूज़ीलैंड के खिलाफ़ 91 रन बनाए थे.

हालांकि सफलता के साथ-साथ उनकी आलोचना भी हुई , ख़ासकर पिछले कुछ सालों में उनकी फॉर्म को लेकर. आलोचकों का तर्क था कि उन्हें अब नए खिलाड़ियों को मौका देना चाहिए.

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महिला टीम के पूर्व कोच और हरमनप्रीत कौर के साथ विवाद को लेकर भी वो चर्चा में रहीं.

लेकिन मैदान पर हमेशा मिताली छाई रहीं. क्रिकेट मैच में बैटिंग करने का इंतज़ार करते हुए किताब पढ़ती हुई मिताली राज शायद मेरी नज़र में एकमात्र क्रिकेटर होंगी. अपनी बैटिंग का इंतज़ार करती, पिच पर रूमी की किताब पढ़ने वाली उनकी तस्वीर हमेशा याद आती है.

2017 में उस मैच में मिताली ने 71 रन बनाए थे. उस दिन मिताली वनडे क्रिकेट में लगातार सात हाफ़ सेंचुरी बनाने वाली पहली महिला क्रिकेटर बनी थीं. कभी कभी वो गेंदबाज़ी में भी हाथ आज़मा लेती हैं और आठ विकेट भी ले चुकी हैं.

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मिताली के करियर पर नज़र डालें तो वो हमेशा से ही लीक से हटकर कुछ करने में यकीन रखती हैं.

39 साल की मिताली 6 वर्ल्ड कप खेल चुकी हैं. 2005 के विश्व कप में मिताली ने पहली बार टीम की कप्तानी की थी और भारत उप विजेता रहा था. इस साल हुआ महिला वर्ल्ड कप वो प्रतियोगिता थी जिसमें मिताली को लोगों ने आख़िरी बार मैदान पर देखा- एक आख़िरी हाफ़ सेंचुरी लगाई थी 68 रन बनाकर.

23 सालों में उन्होंने सिर्फ़ 12 टेस्ट मैच खेले, ये भारत में महिला क्रिकेट पर बहुत कुछ कहता है.

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