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ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन के फ़ाइनल में लक्ष्य सेन पर क्यों भारी पड़े विक्टर एक्सल्सन
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
भारत के बैडमिंटन सेंसेशन लक्ष्य सेन भले ही ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप के फ़ाइनल में हार गए हों, लेकिन उनके कोच और पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी विमल कुमार को भरोसा है कि जब अगली बार रैंकिंग जारी होंगी तो उनके शाग़िर्द का नाम दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में होगा.
हालाँकि, विमल कुमार ने माना कि लक्ष्य सेन को हराने वाले विक्टर एक्सल्सन ने बहुत बेहतर खेला, ठीक वैसा ही जैसा लक्ष्य ने एक सप्ताह पहले उनके ख़िलाफ़ खेला था और जीते थे. विमल कुमार ने बीबीसी हिंदी से कहा, "कुल मिलाकर, विक्टर मैच में कहीं बेहतर खिलाड़ी थे और इसमें कोई शक नहीं है."
उन्होंने कहा, ''मैच के बाद लक्ष्य ने मुझसे बात की और बताया कि विक्टर की लेंथ आज बहुत अच्छी और तेज़ थी. लक्ष्य ने कहा कि वो भविष्य में ऐसी स्थितियों से बाहर निकलने के तरीकों पर काम करेंगे."
विमल कुमार कहते हैं, "मैच में विक्टर ने अधिकांश समय लक्ष्य को कोर्ट के पिछले हिस्से में रखा. उन्होंने लक्ष्य को नेट के क़रीब या अटैकिंग मोड में नहीं आने दिया. पहले गेम में लक्ष्य इस स्थिति से बाहर नहीं निकल सके और विक्टर ने बहुत ही आसानी से बढ़त ले ली."
उन्होंने कहा, "हालाँकि, दूसरे गम में लक्ष्य ने विक्टर जैसा खेला, लेकिन खेल के बीच में उन्होंने बेहद आसानी से प्वॉइंट दे दिए. इससे लीड इतनी बड़ी हो गई कि लक्ष्य बराबरी नहीं कर सके."
दूसरे गेम में लक्ष्य और विक्टर के बीच 70 शॉट की रैली भी हुई. इसमें आख़िरकार विक्टर ही जीते. सेमी फ़ाइनल मैच में ली ज़ी जिया के ख़िलाफ़ लक्ष्य सेन ने मैच पर पूरी तरह नियंत्रण रखा और 67 शॉट तक की रैली के बाद वो 21-13, 12-21 और 21-19 से जीते.
लगातार हावी रहे एक्सल्सन
डेनमार्क के विक्टर एक्सल्सन ने लक्ष्य को 21-10, 21-15 से हराया. लक्ष्य सेन पाँचवें भारतीय ख़िलाड़ी हैं जो ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप के फ़ाइनल तक पहुँचे. प्रकाश पादुकोण ने साल 1980 में और पुलेला गोपीचंद ने साल 2001 में ये टाइटल जीता था.विमल कुमार कहते हैं, "स्कोर से ये नहीं लगता कि मैच क़रीबी था."
कुमार पिछले एक दशक से लक्ष्य को बेंगलुरु के प्रकाश पादुकोण एकेडमी में प्रशिक्षण दे रहे हैं. लक्ष्य को यहां उनके पिता डी के सेन लाए थे. डी के सेन ख़ुद भी साल 2018 में बतौर कोच इस एकेडमी से जुड़े. लक्ष्य सेन मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा से हैं.
साइड का चुनाव अहम रहा
विमल कुमार ने कहा, "विक्टर ने कोर्ट की सही साइड चुनी और हवा का इस्तेमाल शटल को कोर्ट के पीछे डालने में किया. लक्ष्य शटल को क्लियर नहीं कर सके क्योंकि जब लेंथ अच्छी हो तो आपको शटल दूसरे साइड के कोर्ट के पीछे क्लियर करनी होती है और जब आप ये करते हैं तो कई बार हवा की वजह से शटल कोर्ट के बाहर चली जाती है.
इस वजह से लक्ष्य को डाउनवॉर्ड सॉफ़्ट शॉर्ट्स खेलने पड़े और विक्टर उन्हें नेट के पास आने का समय नहीं दे रहे थे. दूसरे गेम में, लक्ष्य ने अलग रणनीति अपनाई, लेकिन उनके लिए वो काम की साबित नहीं हुई."
विमल कुमार कहते हैं कि लक्ष्य ने विक्टर से ग़लतियां करवाने की कोशिश की, लेकिन विक्टर का ख़ेल काफ़ी बेहतर था. वो कहते हैं, "कुछ दिन आपके होते हैं. विक्टर की तकनीक इस खेल में बेहतर रही और वो अच्छा खेले. हमें ये मानना होगा. बीते सप्ताह खेल अलग था."
उन्होंने कहा, "एक बात जो लक्ष्य के डिफ़ेंस में अच्छी रही वो ये कि उन्होंने मुश्किल स्थिति में भी शांति से खेला. उनके इस कौशल में काफ़ी प्रगति हुई है."
ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप के फ़ाइनल तक पहुंचने वाले भारतीयों में से लक्ष्य सबसे कम उम्र के भी हैं. लक्ष्य महज़ 20 साल के हैं. वहीं, प्रकाश पादुकोण ने जब 1980 में ये मुक़ाबला जीता था तो उनकी उम्र 25 साल थी, जबकि गोपीचंद ने 28 की उम्र में ये टाइटल अपने नाम किया था. विक्टर एक्सल्सन भी 28 साल के ही हैं.
विक्टर काफ़ी अनुभवी खिलाड़ी हैं. उन्होंने साल 2020 में भी ये मुक़ाबला जीता था और 2020 के ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं.
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