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विराट का रोहित से रिश्तों में खटास से इनकार, लेकिन क्या सच में मिठास भी है?
- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
पिछले दो साल से भारत की क्रिकेट दुनिया बहुत बड़े बदलाव और विवाद का केंद्र बनी हुई है.
वैसे तो बीसीसीआई और उसकी चयन समिति के फ़ैसलों के अलावा कप्तान और खिलाड़ियों के आपसी संबंधों में खटास और मिठास का भी नाता बहुत पुराना रहा है, लेकिन साल 2019 के आईसीसी एकदिवसीय विश्वकप के सेमीफ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड से हारने के बाद से ही भारत के दो दिग्गज खिलाड़ी विराट कोहली और रोहित शर्मा के आपसी रिश्तों को लेकर बहुत कुछ कहासुना जा चुका है.
पिछले कुछ दिनों से यह बात भी जंगल में आग की तरह फैल रही है कि यह दोनों खिलाड़ी एक दूसरे के साथ खेलना नहीं चाहते. इस आग को और हवा तब मिली जब रोहित शर्मा चोट के कारण दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ से अलग हो गए.
रोहित शर्मा को हाल ही में भारत की टेस्ट टीम का उपकप्तान भी बनाया गया है. दक्षिण अफ़्रीका में टेस्ट सिरीज़ के तुरंत बाद तीन एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की सिरीज़ भी शुरू होगी, जिसमें भारत के कप्तान रोहित शर्मा होंगे.
बीसीसीआई की चयन समीति ने उन्हें पिछले सप्ताह ही भारत की एकदिवसीय कप्तानी भी पूर्ण रूप से सौंप दी है जबकि टी-20 में भी वह कप्तान के तौर पर विराट कोहली की जगह ले चुके हैं.
ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर एकदिवसीय सिरीज़ से पहले रोहित शर्मा पूर्ण रूप से ठीक नहीं हुए, तो क्या टीम की कमान एक बार फ़िर विराट कोहली संभालेंगे?
लेकिन इससे पहले कि इस नई समस्या का समाधान निकलता सोशल मीडिया और तमाम बड़े अख़बारों के खेल पन्नों की सुर्ख़ियों में विराट कोहली के दक्षिण अफ्रीका में एकदिवसीय सिरीज़ से अपना नाम वापस लेने की ख़बरें छा गई.
यहाँ तक कि मंगलवार को भारत के पूर्व कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने भी ट्वीट कर दिया कि रोहित शर्मा के टेस्ट सिरीज़ से अलग होने के बाद विराट कोहली भी एकदिवसीय सिरीज़ नहीं खेलेंगे. क्रिकेट से अवकाश लेना ठीक है लेकिन आपसी रिश्तो में दरार या टकराव नहीं होना चाहिए.
वहीं खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा है कि खेल से बड़ा कोई नहीं है.
इसके अलावा भारत के पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आज़ाद ने भी कहा है कि अगर रोहित और विराट साथ में नहीं खेलते हैं तो इससे नुक़सान भारत को होगा.
क्या विराट और रोहित के बीच तनातनी है?
वैसे विराट कोहली या बीसीसीआई ने ऐसी कोई सूचना या जानकारी नहीं दी थी कि वह एकदिवसीय सिरीज़ के लिए उपलब्ध नहीं है या पारिवारिक कारण से एकदिवसीय सिरीज़ खेलना नहीं चाहते.
ऐसे में बुधवार को सबकी नज़र विराट कोहली पर थी कि वह दक्षिण अफ्रीका के दौरे से पहले संवाददाता सम्मेलन में रोहित शर्मा से अपने रिश्तों और एकदिवसीय सिरीज़ में अपनी उपलब्धता को लेकर क्या कहते है.
विराट कोहली ने तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया कि उनके और रोहित शर्मा के बीच कुछ भी ऐसा नहीं है, जिसे लेकर कुछ बात की जाए. उनका कहना था कि यह सब कुछ लोगों के दिमाग़ की उपज है जो ना जाने कहाँ से कुछ ना कुछ बाते बनाते रहते है. ऐसी बातें सुन-सुनकर वह खुद पक चुके है.
उन्होंने यह भी कहा कि वे वनडे सिरीज़ खेलेंगे और टेस्ट सिरीज़ में रोहित शर्मा की कमी को महसूस करेंगे. विराट कोहली ने यह भी कहा कि रोहित शर्मा की अनुपस्थिति में मयंक अग्रवाल और केएल राहुल के पास मौक़े का फ़ायदा उठाने का बेहतरीन अवसर हैं क्योंकि सलामी बल्लेबाज़ी खेल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है.
अब विराट कोहली ने तो अपनी तरफ़ से बहुत सी बातों को लेकर सफ़ाई दे दी लेकिन अपनी कप्तानी को छोड़े जाने से लेकर छोड़े जाने के लिए बनाए गए दबाव पर भी बात की.
क्रिकेट समीक्षक प्रदीप मैगज़ीन ने हाल ही में 'नॉट जस्ट क्रिकेट' नाम की एक क़िताब लिखी है. बीबीसी ने उनसे सबसे पहले यही जानना चाहा कि क्या रोहित शर्मा से रिश्तों में अनबन को लेकर उनका जवाब सोचा समझा और नपा तुला है या पर्दे के पीछे की कहानी कोई ओर है?
इसे लेकर प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं, "आज के दौर में किसी भी पत्रकार की पहुँच इतनी नहीं है कि उसे इन दोनों खिलाड़ियों के आपसी संबंधों की कोई सही जानकारी हो. उनका ऐसा जवाब आना अपेक्षित ही था, और अगर उनके संबंध अच्छे नहीं भी है तो उसे वह सावर्जनिक रूप से नहीं कहेंगे. इसके अलावा दोनों के संबंध ख़राब भी हो तो उनमें से कोई नहीं चाहेगा कि टीम का प्रदर्शन ठीक ना हो."
प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं, "विराट कोहली की प्रेस कॉन्फ़्रेंस इसलिए महत्वपूर्ण रही कि उसमें उन्होंने बताया कि उन्हें एकदिवसीय क्रिकेट की कप्तानी से एक तरह से बर्खास्त या निरस्त किया गया. वह तो उस प्रारूप में कप्तानी भी करना चाहते थे. ऐसे में बोर्ड का यह कहना कि उसने विराट कोहली से इस मामले में सलाह ली थी ठीक नहीं है क्योंकि विराट ने कहा है कि उन्हें डेढ़ घंटे पहले बोर्ड ने सूचित किया कि वह उन्हें हटा रहा है."
"दूसरा विराट ने आज यह भी बताया कि बोर्ड के किसी भी सदस्य ने उनसे यह नहीं कहा कि वह टी-20 की कप्तानी छोड़े जैसा कि माना गया कि बोर्ड के अध्यक्ष सौरव गांगुली नहीं चाहते कि टी-20 और वन डे में दो अलग-अलग कप्तान नहीं हो सकते. इस तरह से विराट कोहली ने अपनी बात से यह कहने की कोशिश की कि बोर्ड या उसके पदाधिकारी सच नहीं बोल रहे है."
तो क्या इसके मायने यह है कि बोर्ड किसी को भी कप्तान बना या हटा सकता है? इसके जवाब में प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं कि इससे तो यही साबित होता है कि कोहली को कप्तानी से हटाने का निर्णय चयनकर्ताओं का था. ऐसे निर्णयों की सूचना तो बोर्ड ही चयनकर्ताओं को देता है. बोर्ड तो सालों से यही करता आ रहा है. सब सोचते थे कि आज के दौर में ऐसा नहीं होगा. लेकिन अगर विराट कोहली जैसे बड़े खिलाड़ी को एक घंटे पहले तक पता ही नहीं है कि उन्हें कप्तानी से हटाया जा रहा है तो यह ठीक नहीं है.
प्रदीप मैगज़ीन अंत में विराट कोहली और रोहित शर्मा के बीच आपसी रिश्ते और क्रिकेट को लेकर कहते हैं कि आज के दौर में कोई भी खिलाड़ी जानबूझकर चोटिल होने का बहाना कर किसी की कप्तानी में नहीं खेलने का फ़ैसला नहीं कर सकता. रोहित शर्मा फ़ॉर्म में हैं और उन्होंने सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर इंग्लैंड में भी शानदार प्रदर्शन किया. उनका अपना करियर और इच्छाएं दांव पर है. ऐसे में यह क़यास लगाना एक मज़ाक़ ही है और नहीं लगता कि कोई भी खिलाड़ी इतनी दूर तक जाएगा.
'रोहित के बिना विराट को होगी मुश्किल'
इसी ख़बर को लेकर क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन कहते हैं कि यह एक बड़ा ही नाटकीय परिवर्तन है.
वो कहते हैं, "टेस्ट सिरीज़ में रोहित और एकदिवसीय सिरीज़ में अगर विराट नहीं खेलते हैं तो दोनों टीमें सिरीज़ के लिए कमज़ोर हो जाएंगी. रोहित शर्मा भारत के सर्वश्रेष्ठ और शानदार फ़ॉर्म के बल्लेबाज़ है. विराट कोहली के लिए टेस्ट सिरीज़ चुनौती है क्योंकि भारत दक्षिण अफ्रीका में कभी नहीं जीता."
"रोहित के बिना उन्हें निश्चित रूप से दिक़्क़त होगी. विराट के एकदिवसीय सिरीज़ को खेलने को लेकर भी कुछ अटकलें थीं लेकिन अब साफ़ हो गया है कि वह खेलेंगे लेकिन पिछले दो साल से उनके बल्ले से किसी भी प्रारूप में कोई शतक नहीं निकला है. इसके बावजूद एकदिवसीय क्रिकेट में वह अभी भी विश्व के सबसे माहिर बल्लेबाज़ है. उनके प्रतिद्वंद्वी के रूप में रोहित शर्मा ही है. उनके ना खेलने से भारतीय क्रिकेट का ही नुक़सान है."
इसे लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं कि हवा में यह ख़बरें तो फैल रही हैं, लेकिन इसमें षड्यंत्र जैसी कोई चीज़ नहीं है. आपसी अनबन के बावजूद भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तो इन्हें खेलना ही है.
फ़िलहाल रोहित शर्मा जिस फ़ॉर्म है तो उसमें तो उन्हें खेलना ही चाहिए क्योंकि ऐसा मौक़ा उनके हाथ से निकल सकता है. वह चोट की वजह से बाहर है और कोई कारण नहीं है कि वह जानबूझकर दौरे पर ना जाएं. इसके बावजूद कहीं अगर ऐसा है तो बीसीसीआई की ज़िम्मेदारी है.
कुछ ऐसा ही वरिष्ठ खेल पत्रकार और क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली का भी मानना है. वह कहते हैं कि आज के बाद विराट कोहली और रोहित शर्मा के बीच आपसी संबंधों में खटपट की बातों पर पूर्णविराम लग जाना चाहिए.
वो कहते हैं "दोनों एक ही टीम में खेलते हैं और दोनों में से किसी ने भी आमतौर पर एक दूसरे के ख़िलाफ़ कुछ नहीं कहा है. रोहित शर्मा भी कुछ समय पहले ऐसी ही बातों को लेकर बहुत अच्छी तरह समझा चुके हैं कि विराट के साथ उनके किस तरह के रिश्ते है. दूसरी तरफ़ यह विराट का भी बड़प्पन है कि उन्होंने जिस तरह से हालात संभाले और जवाब दिए."
अब रही बात अगर रोहित शर्मा एकदिवसीय सिरीज़ भी नहीं खेलते हैं तो उसमें कप्तानी का भार केएल राहुल या ऋषभ पंत उठा सकते है. ऐसे में यह भी पता चल जाएगा कि बिना किसी भार के विराट कोहली कैसी बल्लेबाज़ी करते है.
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