अजिंक्य रहाणे की कप्तानी और बैटिंग से भारत मस्त, ऑस्ट्रेलिया पस्त

    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ दूसरे टेस्ट मैच में भारत ने बेहतरीन जीत हासिल की है. पहले टेस्ट में दूसरी पारी में केवल 36 रन पर लुढ़ककर आठ विकेट से हारने वाली भारतीय टीम मेलबर्न में हुए दूसरे टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया पर हावी रही.

यह किसी चमत्कार और सुखद आश्चर्य से कम नहीं है, क्योंकि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में अपने सबसे कम स्कोर पर आउट होना और अगले मैच में तब जबकि लगभग आधी टीम बदली हुई हो, वह भी जिसमें दो खिलाड़ी अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे हों और तो और विराट कोहली की जगह बतौर कप्तान टीम की बागडोर संभालना हो और वो भी विदेशी धरती पर तो ये आसान तो बिल्कुल नहीं कहा जाएगा.

नए सलामी बल्लेबाज़ शुभमन गिल और बदले हुए विकेटकीपर ऋषभ पंत के साथ, सबसे अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी के बिना और नए गेंदब़ाज मोहम्मद सिराज के साथ अपने नियमित कप्तान विराट कोहली की गैर मौजूदगी में अजिंक्य रहाणे ने मेलबर्न में टीम का नेतृत्व किया. रहाणे की अगुआई में भारतीय टीम की ऑस्ट्रेलिया पर जीत लंबे समय तक याद की जाएगी.

रहाणे जब टॉस के लिए उतरे तो शायद ही किसी को यक़ीन रहा हो कि यह मैच इस कदर भारतीय टीम के पक्ष में झुका हुआ दिखेगा. ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया, लेकिन पहले ही दिन चायकाल तक पता चल गया कि अजिंक्य रहाणे कप्तान के तौर पर किस मिट्टी के बने हैं.

ऑस्ट्रेलिया टीम को भारतीय गेंदबाज़ पहली पारी में केवल 195 रन पर सिमटा चुके थे. और इसके बाद कप्तान की पारी खेलते हुए अजिंक्य रहाणे ने बेहद शानदार बल्लेबाज़ी करते हुए अपने टेस्ट करियर का बारहवाँ और बतौर कप्तान पहला टेस्ट शतक जमाया.

रहाणे के शतक की बदौलत पहली पारी में भारत 326 रन बनाकर 131 रन की महत्वपूर्ण बढ़त लेने में कामयाब रहा. रहाणे ने रन आउट होने से पहले 112 रन बनाए. विराट कोहली ने भी रहाणे की तारीफ करते हुए इसे सबसे बेहतरीन शतकीय पारी बताया.

सूझबूझ भरे कप्तान दिखे रहाणे

अजिंक्य रहाणे ने जिस तरह ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज़ों को अपनी कप्तानी के जाल में फंसाया, उसे देखकर पूर्व क्रिकेटर और चयनकर्ता रहे मदन लाल कहते हैं कि रहाणे ने फील्डर वहाँ खड़े किए जहाँ ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों ने कैच दिए.

सुनने में यह बात भले ही साधारण लगे पर है बहुत महत्वपूर्ण. रहाणे ने ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज़ बल्लेबाज़ स्टीव स्मिथ पर ऐसा दबाव बनाया कि वह एक बार फ़िर दोनों पारियों में कुछ ख़ास नहीं कर सके. 65 की औसत से सात हज़ार से अधिक टेस्ट रन बना चुके इस दशक के सर्वश्रेष्ठ टेस्ट बल्लेबाज़ चुने गए स्टीव स्मिथ को बांधना आसान नहीं है.

लेकिन सिरीज़ की चार पारियों में अब तक उनका स्कोर 1,1,0,8 रहा. जो बताता है कि इन विकेटों पर बल्लेबाज़ी करना उतना आसान भी नहीं है. ख़ुद रहाणे का शतक दोनों टीमों के किसी भी बल्लेबाज़ का पहला शतक है.

रहाणे की कप्तानी में एक सूझबूझ तब भी देखने को मिली जब पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया के पुछल्ले बल्लेबाज़ तेज़ी से खेलकर रन बटोर रहे थे. तब उन्होंने गेंद स्पिनर रवींद्र जडेजा को थमाई और फिल्डर्स को थोड़ा पीछे रखा ताकि वह आसानी से ऊँचे शॉट्स को कैच में बदल सकें.

इसके अलावा नए गेंदबाज़ मोहम्मद सिराज को भले ही लंच के बाद गेंदबाज़ी के लिए वो लाए लेकिन इस दौरान लगातार उनसे बात करते रहे और उनका मनोबल बनाए रखा.

रहाणे की कप्तानी में खेल चुके तेज़ गेंदबाज़ ईशांत शर्मा ने मैच शुरू होने से पहले कहा था कि रहाणे गेंदबाज़ों के कप्तान हैं क्योंकि वे कभी भी उन्हें (गेंदबाज़ों को) नहीं समझाते कि वह क्या करें. इससे गेंदबाज़ का हौसला बढ़ता है. हाँ, वह गेंदबाज़ों से यह ज़रूर पूछते रहते हैं कि उन्हें फील्डर कहाँ चाहिए. ईशांत ख़ुद इस सिरीज़ में खेलते नज़र आते लेकिन वह फ़िट नहीं हैं. वैसे टीम उमेश यादव की फ़िटनेस को लेकर भी सोच में है.

कठिन परिस्थिति में मिली टीम की कमान

दूसरा टेस्ट शुरू होने से पहले ही भारतीय टीम कई सवालों में घिर गई और ऐसा माहौल तैयार हो गया जैसे बारात घर पर हो और दुल्हन वालों का कोई इंतज़ाम न हो.

ये कोई हल्के सवाल नहीं थे. पहले टेस्ट की दूसरी पारी 36 रन पर ख़त्म हो गई. नियमित कप्तान विराट कोहली पिता बनने वाले हैं और वे भारत वापस लौट गए हैं. ओपनर पृथ्वी शॉ की नाकामी का हल्ला अलग ही मचा हुआ है. शमी की कलाई में फ़्रैक्चर हो गया वह भी भारत लौट आए और पूरी सिरीज़ से बाहर हो गए. विकेटकीपर रिद्धिमान साहा भी ख़राब फ़ॉर्म के कारण टीम से जगह खो बैठे. ऐसा शायद भारतीय टीम के इतिहास में बहुत दिनों बाद हुआ.

कप्तान अजिंक्य रहाणे अपराध बोध में थे कि शायद उनकी वजह से भारत पहला टेस्ट मैच हारा क्योंकि विराट कोहली के रन आउट होने के बाद ही पहला टेस्ट ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में झुकता चलता गया.

इन परिस्थितियों से निपटने के लिए रहाणे ने बड़ा दिल दिखाते हुए पहले तो विराट से माफ़ी माँगी और फिर कहा कि भले ही ऑस्ट्रेलिया मानसिक खेल खेलता रहे लेकिन उनका फ़ोकस अपनी टीम पर रहेगा. इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के कोच जस्टिन लैंगर ने कहा था कि भारतीय टीम दबाव में रहेगी तो अच्छा रहेगा.

तो अब स्थिति ये है कि नए बदलाव, जिसमें शुभमन गिल और मोहम्मद सिराज जैसे पहला टेस्ट खेलने वाले खिलाड़ी हों, और रवींद्र जडेजा और विकेटकीपर ऋषभ पंत की टीम में वापसी के साथ एमसीजी के ऐतिहासिक मैदान में उतरने वाली भारतीय टीम ने अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में हुंकार भरी है और अब इतिहास बनने का इंतज़ार है.

कप्तानी में दमदार रहाणे की जगह दांव पर थी

जब सब अच्छा हो तो क्या बुरा हुआ, याद नहीं आता. लेकिन अजिंक्य रहाणे के लिए तो यह सिरीज़ मेक और ब्रेक वाली थी. सिरीज़ से पहले उनका बल्ला न केवल आईपीएल में ख़ामोश रहा बल्कि पिछली कुछ टेस्ट सिरीज़ में भी वह नाकाम रहे.

यहाँ तक कि एक समय तो वे एकदिवसीय क्रिकेट में टीम से इसलिए बाहर हुए क्योंकि कहा गया कि उनके पास शॉट्स नहीं हैं. इसके बावजूद उन्होंने अपना आत्मविश्वास नहीं खोया और मौक़े का इंतज़ार करते रहे.

वैसे रहाणे इससे पहले अपनी घरेलू पिचों पर ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 2017 में धर्मशाला में और 2018 में बेंगलुरु में अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ कप्तानी कर चुके हैं और दोनों ही मैच में जीत भारत की हुई थी. इसके अलावा रहाणे ने 2015 में ज़िम्बॉब्वे के ख़िलाफ़ हरारे में खेली गई एकदिवसीय सिरीज़ भी 3-0 से जीती थी.

उस सिरीज़ को जीतकर उन्होंने दिखाया था कि वह बेहतरीन कप्तान और बल्लेबाज़ हैं. इसके साथ ही वे दो टी-20 मैच में भी भारत की कप्तानी कर चुके हैं. जिसमें एक में उन्हें जीत और एक में हार मिली.

भारत के झुके कंधे उठाए

रहाणे की विपरीत परिस्थितियों में की गई कप्तानी को लेकर क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन कहते हैं, "रहाणे को बेहद कठिन हालात में कप्तानी मिली. पहले मैच में टीम 36 रन के ऐतिहासिक न्यूनतम स्कोर पर सिमट गई. टीम का मनोबल और कंधे दोनों ही झुके हुए थे."

"लेकिन दूसरे टेस्ट मैच में पहले उन्होंने अपने गेंदबाज़ों का हौसला बढ़ाया और बेहतरीन फील्डिंग सजाई जो बताता है कि बतौर कप्तान उनका तजुर्बा कैसा है और टेस्ट क्रिकेट की उनकी सोच कैसी है. उन पर दबाव था."

"टीम में उनकी जगह भी है या नहीं यह भी पक्का नहीं दिख रहा था क्योंकि उनके लिए लगातार रन बनाना मुश्किल हो रहा था. यह भी चर्चा थी कि उनकी जगह युवा खिलाड़ी को मौक़ा मिलना चाहिए. ऐसी स्थिति से निकलकर टीम को नई राह दिखाई."

मेमन कहते हैं, "रहाणे के लिए ये अच्छा रहा कि ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाज़ी की और भारतीय गेंदबाज़ों ने पहले ही दिन उसे ऑलआउट कर दिया. भारत के लिए बहुत ज़रूरी था कि वह एक बड़ी बढ़त बनाए और ऐसा करने में खुद रहाणे का बहुत बड़ा किरदार रहा."

सबकी पैनी नज़र थी रहाणे पर

रहाणे पर बने दबाव को लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं कि कोई भी खेल हो उसमें बने दबाव से खिलाड़ी कैसे निपटता है यह देखना बेहद ज़रूरी है. एक स्तर पर खिलाड़ी तो बराबर हो ही जाते हैं लेकिन दबाव सहकर प्रदर्शन करना बताता है कि वह किस तरह के खिलाड़ी है फ़िर इस टेस्ट मैच में तो उन पर बेहद मानसिक तनाव और दबाव था.

इससे पहले आईपीएल में राजस्थान से दिल्ली गए, उनकी राजस्थान की कप्तानी चली गई. वह पूरा सीज़न भी नहीं खेल पाए क्योंकि उन्हें टीम से बाहर रखा गया. भारत के लिए भी वह फ़िलहाल न तो एकदिवसीय क्रिकेट खेलते हैं और न ही टी-20. जबकि शुरू में वह यह सफ़ेद गेंद की क्रिकेट खेलते थे.

सीधी सोच रखने वाले क्रिकेटर

अब उनके लिए केवल टेस्ट क्रिकेट बचा है और यहाँ भी सब उन्हे माइक्रोस्कोप से देख रहे थे. वह कहाँ ग़लती कर रहे हैं, उनके स्ट्रोक कैसे लग रहे हैं? ऐसी परिस्थिति किसी के लिए भी बहुत मुश्किल होती है.

मेमन कहते हैं कि मुंबई का ही होने के नाते वह रहाणे को अच्छी तरह जानते हैं और कई बार उनसे बात भी हुई है. वह ज़मीन से जुड़े हैं और स्टार जैसी उनमें कोई भावना नहीं है.

"वह किसी भी परिस्थिति में जल्दी ढलने वाले खिलाड़ी हैं और उनके पास हर तरह के स्ट्रोक्स हैं. वह एक सीधी सोच वाले खिलाड़ी हैं और उनका मानना है कि मेहनत से ही आगे बढ़ सकते है. उन्हें शतक बनाते देखकर बहुत ख़ुशी हुई."

विराट के रन आउट के दबाव को अपनी कप्तानी और बल्लेबाज़ी के हराया

पहले टेस्ट में विराट कोहली के रन आउट होने के बाद से उपजे अपराध बोध से बने दबाव को लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं कि उस टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने अच्छी बल्लेबाज़ी की थी. फ़ॉर्म में भी थे लेकिन एक रन आउट ने मैच का टर्निग पॉइंट बना दिया.

"दूसरी पारी में वह बिना कोई रन बनाए आउट हो गए. बेहद शर्मनाक हार के बाद कप्तान कोहली भारत वापस चले गए. मोहम्मद शमी भी चोटिल होकर वापस लौट आए. इस तरह एक हारी हुई और परेशानी में पड़ी टीम को लेकर यह सोचना कि यह एक अवसर है तब जबकि टीम को संभालकर आगे बढ़ने पर भी अगर अगर नाकाम हो गए तो पूरी दुनिया उन पर टूट पड़ेगी, उन्होंने बेहतरीन कप्तानी की है."

अयाज़ मेमन कहते हैं कि टिम पेन का टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करना रहाणे के लिए फ़ायदेमंद हो गया. अगर पेन भारत को पहले बल्लेबाज़ी करने के लिए कहते और पहले टेस्ट में ताश के पत्ते की तरह ढह गई टीम यहाँ भी कुछ खास नहीं कर पाती तो रहाणे का आत्मविश्वास टूट जाता. लेकिन इसके उलट गेंदबाज़ों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और उनका आत्मविश्वास बढ़ता चला गया. फ़िर उन्होंने शतक जमाकर अपने किरदार के बखूबी अंजाम दिया.

मास्टर स्ट्रोक

पहले टेस्ट में जहाँ साझेदारियाँ नहीं बन सकीं वहीं मेलबर्न में साझेदारियाँ बनी और टीम का काम आसान हुआ. अच्छे खिलाड़ी की यही पहचान है कि वह अपने दिमाग़ को भार से दूर रखे. रहाणे ने विकेट पर जमने का काम किया जो बहुत ज़रूरी है.

रहाणे का स्मिथ को जाल में फ़ंसाने और मोहम्मद सिराज के इस्तेमाल को लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं कि यहाँ ग्याहरवें ओवर के बाद ही अश्विन को गेंदबाज़ी के लिए लाना रहाणे का मास्टर स्ट्रोक साबित हुआ. तब खब्बू बल्लेबाज़ मैथ्यू वेड क्रीज़ पर थे और अश्विन जैसे ऑफ़ स्पिनर उन्हें परेशान कर सकते थे. स्मिथ तो इस सिरीज़ में अश्विन के सामने बेहद तनाव में दिखे हैं. एक तरह से अश्विन उन पर हावी हैं.

एक कप्तान के तौर पर चालाकी से ऐसे हालात को समझना ज़रूरी होता है. किस गेंदबाज़ को लाया जाए, वह कैसी गेंदबाज़ी करेगा, उसके लिए कैसी फील्डिंग सजाई जाए, वह किस लाइन और लेंथ के साथ गेंद फेंकेगा.

अगर कोई बल्लेबाज़ स्पिनरों के ख़िलाफ़ कठिनाई में है तो उसे दो चार ओवर लगातार स्पिनर के सामने रखना यह सब सोचना कप्तान का काम है. हर ओवर के बाद एक निर्णय लेना पड़ता है जिसमें रहाणे ने परिपक्वता दिखाई. यहाँ मुंबई, आईपीएल और भारत के लिए कप्तानी का अनुभव उनके काम आया.

विदेशी धरती पर दमदार हैं रहाणे

6 जनवरी को 33 साल के होने जा रहे रहाणे का रिकॉर्ड बताता है कि विदेश धरती पर उनकी बल्लेबाज़ी किस कदर निखर जाती है. उन्होंने अब तक अपने टेस्ट करियर के दो तिहाई रन विदेशी धरती पर ही बनाए हैं. 67 टेस्ट में 12 शतकों समेत अब तक 4349 रन बनाने वाले रहाणे ने 2856 रन 8 शतक विदेशी धरती पर बनाए हैं.

रहाणे को लेकर अयाज़ मेमन बड़ी दिलचस्प बात बताते हैं कि आज एकदिवसीय और टी-20 टीम से बार रहाणे आईपीएल की बदौलत ही टीम में आए थे. बाद में वह टेस्ट क्रिकेट में ख़ासकर विदेशों में चमके. ऑस्ट्रेलिया में भी उनका यह दूसरा शतक है. विदेशों में ऐसा प्रदर्शन करने के लिए किसी भी खिलाड़ी के पास तकनीक और हौसला होना चाहिए. उनका यह हौसला तब मार खा गया जब पिछले दिनों उनसे कम रन बने और वह एकदिवसीय टीम में जगह खो बैठे.

रहाणे के साथ अच्छी बात यह रही कि वह टेस्ट टीम में बने रहे. अपने करियर में वह एकाध बार ही टेस्ट टीम से बाहर हुए हैं.

दूसरे टेस्ट मैच में टीम चयन में रहाणे की भूमिका को लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं कि यहाँ तो सब कुछ स्वाभाविक रूप से हो गया. विराट कोहली और शमी के बदले खिलाड़ी चाहिए ही थे. पृथ्वी शॉ का हटना तय था क्योंकि वह नाकाम हो गए और शुभमन गिल ने अभ्यास मैच में कुछ अच्छे रन बना दिए. हनुमान विहारी और केएल राहुल को लेकर रहाणे से अधिक चयनकर्ता मन बना चुके थे कि एक मैच का प्रदर्शन चयन का पैमाना नहीं हो सकता जब तक बहुत बुरा प्रदर्शन न हो. विहारी कुछ रन तो बना रहे हैं लेकिन बड़ी पारी नहीं खेल रहे हैं लिहाजा राहुल को थोड़ा इंतज़ार तो करना पड़ेगा.

लेकिन अभी कई चुनौती बाक़ी हैं

बल्लेबाज़ी में अब तक दोनों ही टीमें कमज़ोर साबित हुई हैं. ऑस्ट्रेलिया खास तौर पर ज़्यादा बिखरी हुई टीम दिख रही है. वॉर्नर बाहर हैं तो स्मिथ बुरी तरह फ़्लॉप हुए हैं. सलामी जोड़ी भी लय में नहीं है जिसका फ़ायदा भारतीय गेंदबाज़ों ने बखूबी उठाया.

लेकिन अयाज मेमन कहते हैं कि धरेलू पिचों पर अगर उनके बल्लेबाज़ चल गए तो उनकी टीम हावी हो जाती है क्योंकि उनके गेंदबाज़ ग़ज़ब के हैं.

मेमन कहते हैं कि रहाणे क्रिकेट के अच्छे स्टूडेंट हैं लेकिन अगले मैच में टीम चयन को लेकर परेशानी होगी क्योंकि रोहित शर्मा को किसकी जगह टीम में रखेंगे. रोहित को सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर रखते हैं तो मयंक अग्रवाल को बाहर करना पड़ेगा जो पिछली सिरीज़ तो अच्छा ही खेलते आए हैं. हनुमा विहारी भी 30-35 रन बना रहे हैं लेकिन बड़ी पारी नहीं खेल रहे. रोहित शर्मा अलग तरह के खिलाड़ी हैं लेकिन अब उन्हें मिडिल ऑर्डर में रखना पड़ेगा. गेंदबाज़ी में कोई दिक़्क़त नहीं है.

भारत ने मेलबर्न टेस्ट जीतकर सिरीज़ 1-1 से बराबर कर दिया है और इस परिस्थिति का पूरा श्रेय अजिंक्य रहाणे, शुभमन गिल, मोहम्मद सिराज और अश्विन जैसे खिलाड़ियों को जाता है.

यहाँ यह जानना भी दिलचस्प है कि रहाणे ने जिस भी मैच में शतक जमाया है वो मैच भारत कभी नहीं हारा और यहाँ तो वह अपनी कप्तानी में भारत को जीत दिलाई है.

रहाणे से पहले गुंडप्पा विश्वनाथ ने भी जिस टेस्ट मैच में शतक लगाया वो मैच भारत कभी नहीं हारा. यह महज संयोग है लेकिन अजिंक्य रहाणे की कप्तानी के बूते भारत के सिर पर लटकती तलवार फ़िलहाल हट गई है.

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