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IPL FINAL: मुंबई इंडियन्स आईपीएल की 'सुपरपावर'
आईपीएल के 13 सीजन. मुंबई इंडियन्स पांच बार चैंपियन. मुंबई ने ये पांच ख़िताब आठ साल के अंदर जीते हैं और इस साल मुंबई ने ख़िताब बचाने का कमाल किया है यानी लगातार दूसरी बार ट्रॉफी जीती है.
साल 2013 में पहली बार चैंपियन बनी मुंबई इंडियन्स अब आईपीएल में 'सुपर पावर' का रुतबा हासिल कर चुकी है. कोई और टीम मुंबई के आसपास भी नहीं दिखती.
ख़िताब जीतने की बात हो तो चेन्नई सुपर किंग्स दूसरे नंबर पर है. लेकिन मुंबई ने अब चेन्नई पर अपनी बढ़त को मजबूत कर लिया है. चेन्नई ने तीन बार ख़िताब जीता है और मुंबई पांच ट्रॉफी जुटा चुकी है.
कप्तान रोहित शर्मा ने ख़िताब जीतने के बाद कहा, " टूर्नामेंट की शुरुआत में हमने कहा था कि हम जीत को आदत बनाना चाहते हैं. आप खिलाड़ियों से इससे ज़्यादा की उम्मीद नहीं कर सकते थे."
मुंबई का दबदबा
हालांकि, आईपीएल-13 में डिफेंडिंग चैंपियन मुंबई इंडियन्स की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी. पहले ही मैच में चेन्नई सुपर किंग्स ने मुंबई को पांच विकेट से हरा दिया था लेकिन उसके बाद मुंबई की टीम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. रिकॉर्ड बताएगा कि लीग राउंड में मुंबई ने पांच मैच गंवाए. इनमें से दो मैच सुपर ओवर तक खिंचे. हैदराबाद के ख़िलाफ़ आखिरी लीग मैच में मुंबई ने तीन आला खिलाड़ियों को आराम दिया था यानी ये टीम उस मैच में पूरी ताक़त से नहीं खेली थी. राजस्थान के ख़िलाफ़ जिस मैच में मुंबई को हार मिली, उसमें बेन स्टोक्स ने अदभुत शतकीय पारी खेल दी थी.
मुंबई के दबदबे का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टूर्नामेंट में दूसरे नंबर पर रही दिल्ली कैपिटल्स को रोहित शर्मा की टीम ने आईपीएल-13 में चार बार हराया. दो बार लीग राउंड में. एक बार क्वॉलिफ़ायर मैच में और फिर फ़ाइनल मुकाबले में भी पांच विकेट से पस्त कर दिया. दिल्ली से मिला 157 रन का लक्ष्य आठ गेंद बाकी रहते हासिल कर लिया.
कैसे जीता फ़ाइनल?
फ़ाइनल में मुंबई की टीम शुरुआत से ही हावी थी. उसने बेहतर रणनीति तैयार की थी और इसी के दम पर मुंबई ने फ़ाइनल मुक़ाबले को करीब-करीब एकतरफा बना दिया.
फ़ाइनल के मैन ऑफ़ द मैच ट्रेंट बोल्ट ने मैच की पहली ही गेंद पर मार्कस स्टोइनिस को आउटकर दिल्ली कैपिटल्स को ज़ोर का झटका दिया. हैदराबाद के ख़िलाफ़ स्टोइनिस से पारी की शुरुआत कराते हुए दिल्ली ने फ़ाइनल का टिकट हासिल किया था. लेकिन ये दांव मुंबई के ख़िलाफ़ नहीं चला. अपने दूसरे ओवर में अजिंक्य रहाणे को आउटकर बोल्ट ने दिल्ली पर दूसरी चोट की.
फिर एक्शन में आए जयंत यादव. मुंबई ने उन्हें ख़ास तौर पर फ़ाइनल की टीम में जगह दी थी. उन्हें राहुल चाहर की जगह मौका दिया गया था. जयंत यादव ने दिल्ली के सबसे बड़े बल्लेबाज़ शिखर धवन को बोल्ड कर दिया. इसके बाद दिल्ली के ख़िताब का जीतने का सपना लगभग-लगभग टूट ही गया. दिल्ली के कप्तान श्रेयस अय्यर और ऋषभ पंत दम लगाकर लड़े. अय्यर ने नाबाद 65 और पंत ने 56 रन बनाए और दिल्ली टीम 20 ओवर में 156 रन बनाने में कामयाब रही लेकिन ये मुंबई को रोकने के लिए काफी नहीं था.
कप्तान का कमाल
दिल्ली की टीम शुरुआत में विकेट ले पाती तो कुछ उम्मीद जग सकती थी. लेकिन पिछले कुछ मैचों में फिटनेस और फॉर्म के मोर्चे पर जूझते रहे कप्तान रोहित शर्मा सही मौके पर लय में आए. रोहित ने मुंबई को क्विंटन डि कॉक और सूर्यकुमार यादव के सस्ते में आउट होने पर भी दबाव में आने नहीं दिया. रोहित शर्मा 68 रन बनाकर 17वें ओवर में आउट हुए तब जीत सिर्फ़ 20 रन दूर थी.
केरोन पोलार्ड और हार्दिक पांड्या फ़ाइनल में फेल हो गए लेकिन पूरे सीजन में बल्ले का दम दिखाते रहे ईशान किशन मजबूती के साथ क्रीज पर जमे हुए थे. नाबाद 33 रन बनाकर वो टीम जीत पक्की करके ही लौटे.
बेजोड़ है मुंबई की टीम
दरअसल, मुंबई के दबदबे की बड़ी वजह ये है कि इस टीम के पास हर पोजीशन के लिए दमदार खिलाड़ी मौजूद है. बल्लेबाज़ी की बात करें तो रोहित शर्मा और क्विंटन डि कॉक जैसे दमदार ओपनर हैं. मिडिल ऑर्डर में सूर्यकुमार यादव और ईशान किशन जैसे उभरते सितारे हैं और लोअर ऑर्डर में केरोन पोलार्ड और हार्दिक पांड्या जैसे पावर हिटर मौजूद हैं. गेंदबाज़ी में जसप्रीत बुमराह और ट्रेंट बोल्ट टीम की अगुवाई करते हैं. बॉलिंग अटैक इतना सॉलिड है कि जेम्स पैटिंसन जैसे उम्दा गेंदबाज़ को हर मैच में प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिल पाती.
प्रदर्शन की बात करें तो ईशान किशन ने इस साल 516 रन बनाए और मुंबई के सबसे कामयाब बल्लेबाज़ रहे. क्विंटन डि कॉक ने 503 और सूर्य कुमार यादव ने 480 रन बनाए. हार्दिक पांड्या के बल्ले से 281 और केरोन पोलार्ड के बल्ले से 268 रन निकले. पोलार्ड ने 191 से ज़्यादा के स्ट्राइक रेट से रन बनाए और स्टाइक रेट के मामले में टूर्नामेंट के नंबर एक बल्लेबाज़ रहे. करीब 179 के स्ट्राइक रेट के साथ पांड्या तीसरे नंबर पर रहे. लोअर ऑर्डर में पोलार्ड और पांड्या की मौजूदगी ने मुंबई को विरोधियों पर हर मैच में बढ़त दिलाए रखी. इन दोनों बल्लेबाज़ों ने कई उपयोगी पारियां खेलीं.
गेंदबाज़ी में 27 विकेट लेने वाले जसप्रीत बुमराह और 25 विकेट लेने वाले ट्रेंट बोल्ट का ख़ौफ़ हर विरोधी बल्लेबाज़ पर दिखा. इसी दमखम ने मुंबई को पांचवीं बार आईपीएल की ट्रॉफी दिला दी.
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