You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
आईपीएल में वो जो बिल्कुल अलग और पहली बार होगा
- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
करोड़ों रुपये में नीलाम हुए दुनिया के सबसे बेहतरीन देसी-विदेशी खिलाड़ियों से सजी आईपीएल यानी इंडियन प्रीमियर लीग के करोड़ों चाहने वाले देश और विदेश में भी हैं.
आईपीएल के पिछले बारह संस्करण बेहद कामयाब रहे हैं. दर्शकों से खचाखच भरे रहे स्टेडियम इसकी गवाही देते हैं. मैच से पहले स्टेडियम में जाने के लिए दर्शकों की लम्बी-लम्बी क़तारें, बस में आती-जाती टीम के खिलाड़ियों को आते-जाते देखने के लिए शोर मचाते लोगों का जमघट, अपनी पसंदीदा टीम का हौसला बढ़ाने के लिए उसी टीम की जर्सी पहने समर्थक, ढोल-मंजीरे और दूसरे वाधयंत्र के साथ हाथ में हाथ डाले नाचते आईपीएल दीवाने.
इसके अलावा चीयर लीडर्स, मैदान में हर चौके छक्के और आउट होते खिलाड़ियों पर बजता फ़िल्मी संगीत. इतना ही नहीं स्टेडियम की हर सीट पर प्रायोजक का नाम, वीआईपी से लेकर साधारण दर्शकों के लिए अलग-अलग स्टैंड, फ़्रैन्चाइज़ी टीमों के मालिकों साथ झूमते फ़िल्मी सितारे. सैंकड़ों से लेकर हज़ारों तक के मैदानी टिकट, कड़े सुरक्षा प्रबंघ. यह नज़ारे थे पूर्व में कराए गए आईपीएल मुक़ाबलों के लेकिन इस बार यह सब देखने को नसीब नहीं होगा.
बिना दर्शक खेले जाएंगे सभी मुक़ाबले
आईपीएल की जगमगाहट देखने के लिए अब स्टेडियम में दर्शक नहीं होंगे.
कोविड-19 के कारण बीसीसीआई के अपने घरेलू टूर्नामेंट आईपीएल के तेरहवे संस्करण का आयोजन इस बार भारत में नहीं बल्कि संयुक्त अरब अमीरात में होगा. सभी मुक़ाबले अबु धाबी, शारजाह और दुबई में खेले जाएंगे वह भी ख़ाली स्टेडियम में. यही वह पहला और सबसे बड़ा बदलाव पहले और अब होने जा रहे आईपीएल में है.
इस बार आईपीएल के चेयरमैन पूर्व क्रिकेटर ब्रजेश पटेल हैं. बीसीसीआई ने काफ़ी सोच विचार करने के बाद यह फ़ैसला किया कि भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए अपेक्षाकृत सुरक्षित संयुक्त अरब अमीरात में आईपीएल का आयोजन किया जाए. अगस्त के दूसरे सप्ताह में भारत सरकार से भी इस फ़ैसले को मंज़ूरी मिल गई. भारत का कोई भी खेल संगठन जब धरेलू टूर्नामेंट को विदेश में कराता है तो उसे गृह, विदेश और खेल मंत्रालय से मंज़ूरी लेनी पड़ती है.
सरकार से मंज़ूरी मिलने के बाद बीसीसीआई ने एमीरेट्स क्रिकेट बोर्ड को बताया और आईपीएल में हिस्सा लेने वाली टीमों को सूचित किया. आईपीएल में हिस्सा लेने के लिए टीमें बीस अगस्त के बाद संयुक्त अरब अमीरात के लिए रवाना हुई.
पृथकवास यानी क्वारंटीन
राजस्थान रॉयल्स, किंग्स इलेवन पंजाब और चेन्नई सुपर किंग्स सबसे पहले पहुँचने वाली टीमें रही. टीमों की रवानगी से पहले कई बार परीक्षण किया गया. इसके बाद उनको छह दिन के क्वारंटीन में रहना पड़ा. इसके बाद भी खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ़ का हर पाँचवें दिन परीक्षण कराया जाएगा, लेकिन लीग में खेलने वाले इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों को संयुक्त अरब अमीरात में छह दिन के पृथकवास की ज़रूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि वह पहले ही जैव सुरक्षित वातावरण में रह रहे हैं.
इस बार आईपीएल की शुरुआत 19 सितंबर को चार बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस और तीन बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स के बीच होने वाले मुक़ाबले से होगी. सभी मुक़ाबले ख़ाली स्टेडियम और जैविक रूप से सुरक्षित माहौल में होंगे.
आईपीएल में शामिल सभी आठ टीमों को संयुक्त अरब अमीरात और जहां-जहां उनके मुक़ाबले होंगे वहां अलग-अलग होटल में ठहरना होगा.
बीसीसीआई ने सभी फ़्रैन्चाइज़ी को एक मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करने को कहा है. इसके तहत सभी फ्रैंचाइज़ी को चिकित्सा टीम के साथ-साथ इस साल मार्च से सभी खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ़ का मेडिकल और यात्रा इतिहास बताना होगा. यह नियम सभी विदेशी खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ़ पर भी लागू होगा.
जैव सुरक्षित माहौल से जुड़े नियमों के खिलाड़ी और सहयोगी स्टाफ़ द्वारा किसी भी नियम के उल्लंघन पर आईपीएल आचार संहिता के नियमों के अनुसार सज़ा दी जाएगी. जो भी कोरोना पॉज़िटिव पाया जाएगा उसे क्वारंटीन में रहने के अलावा चौदह दिन के बाद चौबीस घंटे में दो कोविड-19 परिक्षण कराने होंगे. दोनों के नतीजे निगेटिव आने के बाद ही संयुक्त अरब अमीरात जाने की अनुमति मिलेगी.
अब ऐसा नहीं है कि केवल बीसीसीआई या आईपीएल की संचालन समिति ही खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है बल्कि बाकि टीमें भी अपने तौर पर एहतियात बरतने को तैयार हैं.
रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के कप्तान विराट कोहली ने खिलाड़ियों से जैविक रूप से सुरक्षित माहौल को बनाए रखने की अपील की है. विराट कोहली ने चेतावनी दी है कि खिलाड़ियों की एक ग़लती से पूरा टूर्नामेंट ख़राब हो सकता है.
खाना अपने कमरे में खा सकेंगे खिलाड़ी
ज़ाहिर है कि खिलाड़ी भी समझ चुके हैं कि कई पाबंदियों के बीच और पहले से अलग इस बार का आईपीएल होने वाला है. खिलाड़ी उचित दूरी बनाकर और मास्क पहनकर मिल सकेंगे. खिलाड़ी अपने कमरें में खाना मंगा सकेंगे. उन्हें डायनिंग एरिया में जाने की ज़रूरत नहीं होगी.
ख़ाली स्टैंड को ट्रेनिंग और मैच के दौरान ड्रैसिंग रूम के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा मैच के दौरान होने वाली बैठक भी मैदान की जगह ख़ाली स्टैंड में हो सकेगी.
खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ़ के परिवार उनके साथ रह सकते हैं लेकिन उन्हें सुरक्षित माहौल छोड़ने की अनुमति नहीं मिलेगी.
वेन्यू क्रिकेट ऑपरेशन टीम ड्रेसिंग रूम के लिए सही जगह का चुनाव करेगी. टीमों को भी टीम शीट के लिए हार्ड कॉपी की जगह इलेक्ट्रॉनिक टीम शीट का प्रयोग करने को कहा गया है.
होटल लौटने पर सबसे पहले नहाने की सलाह
फ़्रेंचाइज़ी कम जगह वाले स्थान में फ़ैले वायरस को समाप्त करने वाली मशीन भी लगा सकते हैं. मेडिकल टीम को भी खिलाड़ियों के संपर्क में आने के लिए पीपीई किट पहननी होगी. खिलाड़ियों को होटल लौटने पर सबसे पहले नहाने की सलाह दी गई है.
यह सब खिलाड़ियों के लिए नया अनुभव होगा. इसके अलावा नाडा यानी राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी के तीन अधिकारी और छह डोप नियंत्रण अधिकारी आईपीएल में खिलाड़ियों के नमूने लेने के लिए संयुक्त अरब अमीरात जाएँगे.
साल 2008 में आईपीएल के उद्घाटन समारोह में मोहम्मद आसिफ़ को ड्रग मामले में पॉज़िटिव पाया गया था. नाडा 10 नवंबर तक चलने वाले आईपीएल में कम से कम पचास नमूने एकत्रित करने का लक्ष्य सामने रखकर चल रही है. अगर उन्हें ज़रूरत पड़ी तो वह संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रीय डोपिंग रोधी संगठन की मदद ले सकते हैं.
तो यह थी वह सब बातें जो इस बार के आईपीएल को एक अलग रूप प्रदान करती हैं लेकिन क्रिकेट समीक्षक क्या सोचते हैं?
'क्रिकेटर्स को दम लगाकर खेलना होगा'
इसे लेकर क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन मानते हैं कि एक तो यह जैविक सुरक्षित माहौल में खेला जाएगा और इससे जुड़े नियमों का पालन भी करना होगा. दर्शक नहीं होंगे. टीमें अलग होटल में रहेगी जिससे जैविक सुरक्षित माहौल बन जाएगा. खिलाड़ियों की आपस में मुलाक़ात अधिक नहीं होगी. आईपीएल को जो फ़्लेवर होता है उससे यह बिलकुल अलग है. अब आईपीएल मेले जैसा नहीं लगेगा.
अयाज़ मेमन मानते हैं कि ब्रॉडकास्टिंग स्टूडियो में पुराने क्रिकेटर मिलेंगे, वहॉ काफ़ी धमाल होगा लेकिन मैदान में नहीं होगा. लेकिन क्रिकेट खेलने में ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ेगा क्योंकि जिस तरह इंग्लैंड में क्रिकेट हो रही है या कैरेबियन प्रीमियर लीग, इन सबमें अच्छा ख़ासा संघर्ष हुआ. कभी ऐसा नहीं लगा कि खिलाड़ी अपना सौ प्रतिशत नहीं दे रहे हैं. खिलाड़ियों को भी शायद समझ में आ गया है कि दम लगाकर खेलना होगा वर्ना क्रिकेट को फिर से वापस लाने की कोशिश नाकाम हो सकती है.
क़ायदे क़ानून की भरमार के बीच खिलाड़ियों को खेलने के सवाल पर अयाज़ मेमन मानते हैं कि वह तो खिलाड़ियों को मानने ही होंगे. वेस्टइंडीज़ इंग्लैंड क्रिकेट सिरीज़ में जोफ़्रा आर्चर ने नियम को तोड़ा और वह घर चले गए. बदले में उन पर जुर्माना लगा और एक टेस्ट मैच वह नहीं खेल पाए. शुक्र है कि बड़ा नुक़सान नहीं हुआ लेकिन कोई भी हादसा हो सकता है क्योंकि एक टीम के साथ कम से कम चौबीस व्यक्ति शामिल हैं. सहयोगी स्टाफ़ और कोच अलग से हैं. ब्रॉडकास्टिंग टीम और मीडिया के लोगों के अलावा कुछ दूसरे लोग भी होंगे, ऐसे में एहतियात रखना बहुत ज़रूरी है. सबको फूँक-फूँक कर क़दम रखना होगा.
ख़ाली स्टेडियम में होते मैच से खिलाड़ियों के मनोबल पर पड़ने वाले असर को लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं कि खिलाड़ियों को ही इस मानसिकता से निकलना पड़ेगा. वैसे यह सही है कि दर्शकों के बिना उनका जोश थोड़ा कम हो सकता है. खिलाड़ी एक तरह से अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करते हैं. ख़ाली थिएटर में कलाकारों को ड्रामा दिखाना भारी लगता है, लेकिन कोविड के कारण खिलाड़ियों के पास दूसरा कोई रास्ता नही है.
वे कहते हैं, "क्रिकेट तभी दोबारा शुरू हो सकता था जब दर्शक स्टेडियम से दूर रहें. अब खिलाड़ियों को मैदान में अधिक ज़ोर लगाना पड़ेगा क्योंकि अगर बीस पच्चीस हज़ार लोग मैदान में नहीं हैं तो भी लोग उन्हें टेलीविज़न पर देख रहे हैं. अगर दर्शकों को यह अहसास हो गया कि यह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं तो उनका दिल भी ऊब सकता है.
एहतियात ज़रूरी है
मैदान में दर्शक एक दूसरे का जोश बढ़ाते हैं, तो क्या ख़ाली स्टेडियम में होते मैच घर पर बैठे लोगों में दिलचस्पी बनाए रखेंगे? इसे लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं कि आजकल तो सब घर में ही हैं. यह एक आपातकालीन स्थिति है. सबको कुछ न कुछ त्याग और समझौते करने की ज़रूरत है. अब यह जैविक सुरक्षित माहौल क्यों ज़रूरी है यह जानना भी आवश्यक है.
वो कहते हैं कि कुछ समय पहले जाने माने टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच ने चैरिटी के लिए टेनिस टूर शुरू किया. पहले ही चरण में चार खिलाड़ी पॉज़िटिव हो गए जिनमें जोकोविच ख़ुद शामिल थे इसके बाद टूर रोकना पड़ा. यह सब इसलिए हुआ क्योंकि खिलाड़ी दर्शकों के बीच खेल रहे थे और पार्टी कर रहे थे. शायद उन्हें लग रहा था कि चोटी के खिलाड़ियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी अधिक है कि उन्हें कुछ नहीं हो सकता, लेकिन उन्हें एक सप्ताह में ही पता चल गया कि कुछ भी हो सकता है, इसलिए एहतियात ज़रूरी है.
इन सबके बीच बिना किसी विवाद या कथित स्पॉट फ़िक्सिंग और किसी क़िस्से के बिना आईपीएल हो जाए तो इसे बड़ी कामयाबी माना जाए. इसे लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं कि बिलकुल कामयाबी माना जाए लेकिन पिछले दस बारह साल से ऐसा हुआ है कि बिना किसी विवाद के होने से ऐसा लगता है कि आईपीएल हुआ ही नहीं.
वे कहते हैं कि इस बार ऐसा लगता है कि सारा दारोमदार क्रिकेट पर रहेगा कि क्या रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर चैंपियन बनती है या नहीं, महेंद्र सिंह धोनी की फ़ॉर्म बरक़रार रहती है या नहीं. क्या वह चेन्नई सुपर किंग्स को अब भी जीत दिला सकते हैं या नहीं. जहां तक स्पॉट फ़िक्सिंग या मैच फ़िक्सिंग की बात है तो इनका ख़तरा हमेशा रहता है. यह सिर्फ़ क्रिकेट में नहीं हर खेल में है.
मेमन कहते हैं कि यह कहने से कि दर्शक नहीं हैं, जैविक सुरक्षित माहौल है इस वजह से यह सब चीज़ें नहीं होंगी यह सोचना बेवक़ूफ़ी है. जिन्हें स्पॉट फ़िक्सिंग करनी है उन्हें दर्शकों से कोई लेना देना नहीं है. लेकिन आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल ने पहले ही बता दिया है कि वहां की लोकल पुलिस एंटी करप्शन यूनिट के साथ काम करेगी.
अब देखना है कि इतने सारे बदलाव के बीच इस बार आईपीएल कितना कामयाब होती है और केवल टेलीविज़न और मोबाइल फ़ोन के सामने बैठे दर्शक उसकी नाव कितना पार लगाते हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकतेहैं.)