शिवम दुबे को बार-बार किस आधार पर मिल रहे हैं मौक़े?

शिवम दुबे

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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
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साल 2018. आईपीएल के 12वें सीज़न की नीलामी में रॉयल चैलेंजर्स ने मुंबई के एक युवा खिलाड़ी को पाँच करोड़ रुपए में ख़रीदा था जबकि उनका बेस प्राइस 20 लाख रुपए था.

मध्यम गति के तेज़ गेंदबाज़ और बाएं हाथ के बल्लेबाज़ शिवम ने नीलामी से ठीक एक दिन पहले बड़ौदा के ख़िलाफ़ रणजी मैच में एक ओवर में लगातार पांच छक्के मारे थे.

इस एक ओवर ने शिवम दुबे को सुर्ख़ियों में ला दिया था. उस समय 25 साल के रहे दुबे ने लॉन्ग-ऑन और मिडविकेट के ऊपर से बार-बार गेंद को बाउंड्री के पार भेजा.

उस एक ओवर में लंबे शॉट्स लगाकर चर्चा में आए शिवम दुबे अब दो साल बाद फिर से एक ओवर में लगे छक्कों-चौकों को लेकर चर्चा में हैं. मगर इस बार ये छक्के-चौके उन्होंने नहीं लगाए बल्कि उनकी गेंदों पर लगे.

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शिवम ने न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ माउंट मोन्गानुई में खेले गए पांचवें और आख़िरी टी-20 मुक़ाबले में केवल एक ही ओवर गकी गेंदबाज़ी की और उसमें 34 रन खर्च डाले.

यह न्यूज़ीलैंड की पारी का 10वां ओवर था. नौ ओवर की समाप्ति के बाद न्यूज़ीलैंड का स्कोर तीन विकेट खोकर 64 रन था, जो 10 ओवर की समाप्ति के बाद शेयर बाज़ार में अचानक आए उछाल की तरह अचानक चढ़कर तीन विकेट पर 98 रन हो गया.

उसके बाद भारत के कप्तान की हिम्मत, शुभम दुबे को दूसरा ओवर देने की नहीं हुई. वह तो भला हो बाक़ी गेंदबाज़ों का जिनकी बेहद कसी गेंदबाज़ी के दम पर भारत ने सात रन से जीत हासिल की.

वह भी तब जब न्यूज़ीलैंड के सामने जीत के लिए 164 रन का लक्ष्य था. अगर कहीं भारत यह मैच हार जाता तो इसका ठीकरा शिवम दुबे के सर ही फूटना था.

इससे पहले शिवम दुबे बल्लेबाज़ी करते हुए केवल पांच रन बना सके. लेकिन बात इसी मैच की नहीं है. दरअसल पूरी सिरीज़ में शिवम दुबे कुछ ख़ास नहीं कर सके.

उन्होंने पांच मैच खेलकर 13,नाबाद 8, 3, 12 और 5 रन ही बनाए. यानी पांच पारियों में कुल 41 रन बनाए. गेंदबाज़ी में भी उनके नाम केवल दो विकेट रहे.

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भारत ने साल 2020 के अपने पहले विदेशी दौरे में न्यूज़ीलैंड को उसी के घर में पांच मैचों की टी-20 सीरीज़ में एकतरफ़ा 5-0 से मात देकर शानदार शुरुआत तो की मगर शिवम दुबे के टीम में लगातार बने रहने पर कुछ सवाल खड़े हो गए है.

इस प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया से लेकर हर जगह क्रिकेट प्रशंसकों के बीच चर्चा होने लगी कि शिवम कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री के इतना पसंदीदा खिलाड़ी क्यों है?

बार-बार मौक़े क्यों?

शिवम दुबे को लेकर हो रही चर्चा को लेकर क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली कहते हैं कि शायद उन्हें समय से पहले मौक़ा मिल गया.

विजय लोकपल्ली कहते हैं, "शिवम इतनी बड़ी क्रिकेट के लिए पूरी तरह तैयार नहीं थे. वैसे टी-20 जैसे छोटे प्रारूप में किसी भी खिलाड़ी के लिए कोई दिन बुरा साबित हो सकता है. टीम मैनेजमेंट को लगता है कि शिवम दुबे शायद भारत का भविष्य हैं. उन्होंने मुंबई के लिए बेहतरीन क्रिकेट खेली है. चयनकर्ताओं ने भी उनमें कुछ तो देखा होगा, इसलिए उन्हें लगता है कि शिवम दुबे को सहयोग दिया जाए."

"कई बार खिलाड़ी अच्छी फॉर्म में नहीं होते या फिर अच्छी फॉर्म में होते हुए भी अच्छी गेंदबाज़ी नहीं कर पाते. उनसे रन भी कई बार नहीं बन पाते. शिवम दुबे अभी बेहद युवा खिलाड़ी हैं. उन्हें लेकर थोड़ा धैर्य रखना होगा."

"ऐसा नहीं लगता कि वह ख़राब खिलाड़ी हैं. कप्तान विराट कोहली उनकी बड़ी तारीफ़ करते है. रोहित शर्मा भी मानते है कि शिवम दुबे बहुत उपयोगी खिलाड़ी हैं, ख़ासकर यह देखते हुए कि टी-20 में उनके पास बड़े और लम्बे शॉट्स खेलने की क्षमता है."

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ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ी की प्लइंग इलेवन में जगह नहीं बन सकी थी क्योंकि केएल राहुल एक विकेटकीपर के तौर पर बेहतरीन कर रहे हैं. बल्लेबाज़ी में तो वो ख़ैर इन दिनों अपनी सर्वश्रेष्ट फॉर्म में हैं ही. फिर भी ऋषभ पंत एक बल्लेबाज़ के तौर पर तो खेल ही सकते थे.

मगर शिवम दुबे को हार्दिक पांड्या के चोटिल होकर टीम से बाहर होने का फ़ायदा मिला था. इसके बावजूद शिवम दुबे का प्रदर्शन हार्दिक पांड्या जैसे ऑलराउंडर की परछाई जैसा भी नहीं कहा जा सकता.

विजय लोकपल्ली भी मानते हैं कि शिवम दुबे उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे. वह कहते हैं, "कुछ खिलाड़ी बहुत अधिक घरेलू क्रिकेट खेले बिना जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आते हैं तो शुरुआती मैचों में चमक गए तो ठीक है, वरना बहुत अधिक उम्मीदों का भार उन पर भारी पड़ता है."

"अब यह मानकर चलना पड़ेगा कि अभी शिवम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. लेकिन फिर वही बात ध्यान देने लायक है कि पांच चयनकर्ताओं, कप्तान विराट कोहली, कोच रवि शास्त्री और बल्लेबाज़ी कोच विक्रम राठौर का भी मानना है कि इस खिलाड़ी में कुछ तो दम है."

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ऐसा क्या है शिवम में?

शिवम दुबे का क़द लंबा है, दिखने में मज़बूत हैं और लंबे शॉट्स खेलने की क्षमता रखते हैं. वह स्कूल के दिनों से ही क्रिकेट खेलते थे. मुंबई की तरफ से अंडर 23 में शिवम ने कई अच्छी पारियां खेली हैं. 2018 में तो वो मुंबई की टीम के लिए ख़ासे अहम खिलाड़ी बन गए.

विजय हजारे ट्रॉफ़ी में मुंबई की जीत में भी शिवम की बड़ी भूमिका रही थी. मुंबई टी-20 लीग में शिवम ने प्रवीण तांबे के एक ओवर में छह छक्के मारे थे. बाद में बड़ौदा के ख़िलाफ़ स्वप्निल सिंह के ओवर में उन्होंने पांच छक्के लगाए थे, जिसका ज़िक्र हम शुरू में कर चुके हैं.

शिवम दुबे ने भारत के लिए अपनी पहली टी-20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज़ पिछले साल 2019 में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ खेली थी. इसमें उन्होंने पहले मैच में 30 रन देकर तीन विकेट झटके और नाबाद नौ रन बनाए. इस हिसाब से उनका आगाज़ बेहतरीन रहा. अगले मैच में उन्होंने केवल गेंदबाज़ी की लेकिन कोई विकेट नहीं ले सके. तीसरे मैच में उन्होंने केवल एक रन बनाया और कोई विकेट नहीं लिया.

पूर्व क्रिकेटर और चयनकर्ता रहे अशोक मल्होत्रा कहते है कि शिवम दुबे अधिक प्रभावित नहीं कर सकते.

वह इसकी वजह बताते हैं, "ऐसा इसलिए नहीं है कि उन्होंने एक ओवर में 34 रन दिए. बात यह है कि उन्होंने बल्लेबाज़ी में अपना प्रभाव नहीं छोड़ा. सब जानते हैं कि वह गेंदबाज़ी में साधारण हैं. बल्लेबाज़ी उनकी ताक़त है लेकिन उन्हें नम्बर तीन पर मौक़ा नहीं मिलने वाला और छह नम्बर पर वह अपना दबदबा नहीं दिखा पा रहे हैं."

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न्यूज़ीलैंड में खेली गई सिरीज़ से पहले शिवम दुबे ने बीते साल वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ यादगार पारी खेली थी. तीन मैचों की टी-20 सीरीज़ के पहले मैच में उन्होंने नम्बर तीन पर खेलते हुए 54 रन बनाए थे.

तब उन्होंने तिरुअंतपुरम में खेले गए उस मैच में केवल 30 गेंदो पर तीन चौकों और चार छक्कों की मदद से यह 54 रन बनाए थे. लेकिन उसके बाद अगले मैच में बल्लेबाज़ी में उनका नम्बर नही आया.

हालांकि, गेंदबाज़ी में उस समय भी वह कोई कमाल नहीं कर सके थे और इन दोनों मैचों में उन्हें कोई विकेट नहीं मिला.

इसके बाद वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ ही खेली गई एकदिवसीय सिरीज़ के पहले मैच में उन्होंने केवल नौ रन बनाए और गेंदबाज़ी में बिना किसी विकेट के 68 रन दिए. यह उनके एकदिवसीय करियर का एकमात्र एकदिवसीय मैच रहा है.

शिवम दुबे ने अभी तक भारत के लिए 13 टी-20 अंतराष्ट्रीय मैच खेले है और उन्होंने इनमें 54 रन के सर्वाधिक स्कोर के साथ 105 रन बनाए है और पांच विकेट हासिल किए है.

इस रिकॉर्ड के आधार पर शिवम को क्या माना जाए, एक गेंदबाज़, बल्लेबाज़ या ऑलराउंडर? विजय लोकपल्ली कहते हैं कि संभवत: उन्हें एक ऑलराउंडर के तौर पर ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 विश्व कप के लिए तैयार किया जा रहा है.

उन्होंने कहा, "ऑस्ट्रेलिया के मैदान बहुत बड़े हैं. वहां भारतीय टीम को निचले क्रम में ऐसे खिलाड़ियों की ज़रूरत है जो अच्छी गेंद को भी बाउंड्री के बाहर भेज सकें. वहां सिर्फ़ ख़राब गेंद खेलने को नहीं मिलेगी. टी-20 में अधिक समय नहीं होता. शिवम दुबे को लेकर चयनकर्ताओं को लगता है कि वह छक्के लगाकर मैच का रुख़ पलट सकते हैं."

"अब यह अलग बात है कि उन्होंने 13 मैचों में केवल 105 रन बनाए हैं. यह तो बहुत बुरा स्कोर है. वह ख़ुद भी सोच रहे होंगे कि उन्हें लगातार मौक़े मिल रहे है लेकिन वह नाकाम हो रहे है. चयनकर्ताओं ने ऋषभ पंत को भी ऐसे ही मौक़े दिए थे. बात बढ़ते-बढ़ते ऋषभ पंत और संजू सैमसन के बीच की हो गई. ऋषभ पंत रेस हारते हुए लग रहे है, क्योंकि केएल राहुल विकेटकीपर बल्लेबाज़ के रूप में छा गए है."

ऐसे में शिवम दुबे को शायद एक-दो मौक़े मिलेंगे लेकिन अगर वह इसमें भी नाकाम रहे तो फिर उनकी वापसी मुश्किल हो सकती है.

शिवम दुबे

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आगे क्या होगा?

अब सवाल यह भी कि शिवम दुबे का आत्मविश्वास कैसे लौटे? कभी उन्होंने नम्बर तीन पर बल्लेबाज़ी की है, कभी नम्बर पांच पर और कभी छह पर. इस सवाल के जवाब में विजय लोकपल्ली कहते है कि इसमें शिवम दुबे का कसूर नही है, उन्हें तो कप्तान की बात माननी पड़ेगी.

"वह टीम की ज़रूरत के हिसाब से खेल रहे हैं. अब अगर कप्तान कहते हैं कि बैट घुमाओ तो वह बैट घुमाएंगे. इसीलिए कप्तान उनके साथ हैं. कुछ ऐसा ही ऋषभ पंत भी करते रहे. अब वह अपनी जगह गंवाकर मैच खेलने की जगह बाहर बैठकर मैच देख रहे है. शिवम दुबे के साथ भी यही है कि अगर वह कोई एक अच्छी पारी खेल जाएंगे तो उनका आत्मविश्वास भी लौट आएगा और टीम को भी पता चल जाएगा कि इस खिलाड़ी में कोई प्रतिभा भी है या ऐसे ही नए खिलाड़ी को खिलाने के नाम पर इन्हें अवसर दिए जा रहे हैं."

ऐसे में सभी की निगाहें इस पर टिकी होंगी कि बुधवार से न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ शुरू होने जा रही तीन मैचों की एकदिवसीय सिरीज़ में उन्हें मौक़ा दिया जाता है या नहीं.

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