सचिन का 'यॉर्कशायर', क्रिकेट से नाराज़गी और वीरान घर: वर्ल्ड कप 2019 डायरी

- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, लीड्स से, बीबीसी संवाददाता
भारत और श्रीलंका लीग मैचों का अपना आख़िरी गेम खेलने इंग्लैंड के लीड्स शहर पहुँचे हुए हैं.
हेडिंग्ले वो जगह है जहाँ 1992 में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर यॉर्कशायर क्रिकेट क्लब के लिए काउंटी क्रिकेट खेलने आए थे.
लीड्स के अंतर्गत आने वाली इस जगह में भारतीय समुदाय के कई लोगों को सचिन का खेलना आज भी याद है.
उनमें से एक 76 साल के शैलेंद्र सिंह नोटे हैं, जो पिछले चालीस सालों से यहीं पर बस चुके हैं. शुक्रवार को टीम इंडिया के नेट्स पर आने का इंतज़ार करते मिले.
उन्होंने कहा, "ये तो सचिन का यॉर्कशायर है. अफ़सोस ये है कि आज की भारतीय मूल की जेनरेशन ने उस मुंडे को खेलता नहीं देखा. काउंटी में खेलता था तो शॉट्स की आवाज़ ग्राउंड के बाहर तक जाती थी".

नाराज़गी
हेडिंग्ले स्टेडियम एक विशालकाय ग्राउंड है और इसके बाहर चारों तरफ़ रिहायशी इलाक़ा है. लेकिन इस स्टेडियम को इन दिनों लोग रग्बी के खेल से ज़्यादा जोड़ कर देखते हैं और क्रिकेट से कम.
उत्तरी इंग्लैंड में रग्बी का खेल ज़बरदस्त देखा और खेला जाता है. लीड्स की रग्बी टीम भी देश की टॉप टीमों में गिनी जाती है.

शायद यही वजह है कि हेडिंग्ले क्रिकेट स्टेडियम के गेट के भीतर घुसते ही सोविनियर शॉप पर एक नोटिस लगा है कि, "क्रिकेट को कोई भी स्टॉक नहीं है. सिर्फ़ रग्बी से जुड़ी चीज़ें, कपड़े, जैकेट वग़ैरह मिलते हैं".
स्टेडियम के दूसरे हिस्से में लीड्स रग्बी का टिकटघर है जिसके बग़ल में एक बोर्ड लगा है, "क्रिकेट वर्ल्ड कप के चलते इन दिनों यहाँ टिकट नहीं मिल रहे. असुविधा के लिए खेद है."
स्टेडियम के एक गार्ड, मार्क हैन्सलो ने कहा, "मुझे तो आज तक क्रिकेट का खेल ही नहीं समझ आया. यहाँ की नई जेनरेशन भी क्रिकेट से ज़्यादा रग्बी में दिलचस्पी रखती है".

वीरान घर
लीड्स से हेडिंग्ले पहुँचने में महज़ दस-पंद्रह मिनट लगते हैं.
बेहतरीन लाल रंग की ईंट से बने घर और गिरजाघर आपको पूरे हेडिंग्ले में दिखेंगे.
यहाँ का क्रिकेट स्टेडियम भी इन घरों के बीचोंबीच बना हुआ है.
लेकिन कई ऐसे घर मिले जो या तो जर्जर हालत में हैं और या तो उनके किराए पर उपलब्ध होने का बोर्ड लगा हुआ है.
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स्टेडियम से थोड़ी दूर 'अगली मग्स' नाम की काफ़ी शॉप में कुछ स्थानीय लोगों से बात हुई तो पता चला यहाँ का रियल एस्टेट या प्रोपर्टी मार्केट खस्ताहाल चल रहा है.
एक स्थानीय के मुताबिक़, "पुराने लोग घरों को छोड़ कर सुकून में बसने जा रहे हैं क्योंकि यहाँ भी बड़ी और गगनचुंबी इमारतों के बनाने का चलन आ गया है. ज़्यादातर लोगों को ये पसंद नहीं है."
एकाएक भारत की याद आ गई जहाँ पिछले चार सालों में रियल एस्टेट के दामों में गिरावट देखने को मिला है और दिल्ली-एनसीर या मुंबई जैसे शहरों में भी दाम बढ़ने का प्रतिशत काफ़ी कम रहा है.
लेकिन इंग्लैंड और ख़ासतौर से इस उत्तरी हिस्से में हाल और भी बुरा है क्योंकि 2012 के बाद से लीड्स के प्रोपर्टी बाज़ार में पिछले साल सबसे बड़ा उछाल देखा गया है.
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