वो खिलाड़ी जिनको मिलने वाला है वर्ल्ड कप का टिकट

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- Author, दिनेश उप्रेती
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दुनियाभर के क्रिकेट खिलाड़ी भारत में इन दिनों चल रही इंडियन प्रीमियर लीग में अपना दमखम दिखा रहे हैं. 20-20 ओवरों के इस टूर्नामेंट में खिलाड़ी अपने प्रदर्शन से अपने-अपने देश के चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचने की आख़िरी कोशिशों में जुटे हैं.
ये टूर्नामेंट इसलिए भी ख़ास है क्योंकि चयन के लिए बॉर्डर लाइन पर खड़े खिलाड़ियों के पास मौका है कि वे अपने बेहतरीन प्रदर्शन से अपने लिए वर्ल्ड कप का टिकट बुक करा सके.
मई के आख़िर में इंग्लैंड में होने वाले क्रिकेट वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम का ऐलान सोमवार को मुंबई में किया जाएगा.
टीम इंडिया को चुनने के लिए एमएसके प्रसाद की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय चयन समिति के अलावा कप्तान विराट कोहली और मुख्य कोच रवि शास्त्री भी इस बैठक में शामिल होंगे.
वर्ल्ड कप के लिए खिलाड़ियों के नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी को भेजने की आख़िरी तारीख़ हालाँकि 23 अप्रैल है, लेकिन भारतीय चयनकर्ताओं ने ये काम एक हफ्ते पहले ही करने का फ़ैसला किया है. इसके पीछे ये मंशा हो सकती है कि वे चुने गए खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत होने का पर्याप्त समय देना चाहते हैं.

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यूँ तो एमएसके प्रसाद अब से दो महीने पहले ही साफ़ कर चुके हैं कि चयनकर्ताओं के दिमाग़ में 20 ख़िलाड़ियों का पूल है और इसको लेकर किसी तरह की उलझन नहीं है. अब इनमें से 15 खिलाड़ियों को चुना जाना है. उन्होंने ये भी कहा था कि आईपीएल में प्रदर्शन को खिलाड़ी के वर्ल्ड कप टीम में चयन का आधार नहीं बनाया जाएगा. मतलब ये हुआ कि अगर टीम में लगभग पक्के माने जा रहे किसी खिलाड़ी का अगर आईपीएल में प्रदर्शन फ़ीका भी रहता है तो ये उसके टीम से पत्ता काटने का आधार नहीं बनेगा.
लेकिन इस बात से शायद ही कोई इत्तेफ़ाक रखे कि प्रसाद का ये फॉर्मूला वाक़ई सभी खिलाड़ियों के लिए है. चयन के लिए बॉर्डर लाइन पर खड़े खिलाड़ियों को इसीलिए इस आईपीएल की अहमियत भी पता होगी.
आईसीसी की वनडे रैंकिंग में नंबर एक पर काबिज भारत अब तक दो बार विश्व विजेता रह चुका है. पहली बार 1983 में भारत कपिल देव की अगुवाई में इंग्लैंड में चैंपियन बना था, जबकि दूसरी बार 2011 में अपनी ही सरज़मीं पर महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में भारत ने विश्व कप ट्रॉफ़ी हासिल की थी.

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50 ओवरों के इस फॉर्मेट के लिए इंग्लैंड में जिस तरह के हालात है उसके लिए आदर्श टीम कॉम्बिनेशन पाँच बल्लेबाज़, दो ऑलराउंडर, तीन तेज़ गेंदबाज़ और एक विकेटकीपर का माना जा रहा है.
एक नज़र उन खिलाड़ियों पर जिनका वर्ल्ड कप टिकट पक्का है और जिन्हें लेकर चयनकर्ताओं के बीच माथापच्ची हो सकती है.
टीम की ओपनिंग जोड़ी रोहित शर्मा और शिखर धवन से किसी तरह से छेड़छाड़ की उम्मीद नहीं है.

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रोहित शर्मा (उप कप्तान)
कुछ ही दिनों बाद 32 साल के होने जा रहे दाएं हाथ के इस विस्फोटक बल्लेबाज़ में किसी भी दिन अकेले दम पर टीम को जिताने की क्षमता है. 206 वनडे मैचों का अनुभव रखने वाले रोहित वनडे इतिहास में सबसे ज़्यादा तीन दोहरे शतक जड़ने वाले दुनिया के इकलौते बल्लेबाज़ हैं. तकरीबन 88 का स्ट्राइक रेट रखने वाले रोहित का औसत है 47.39 का. उनके नाम 22 सेंचुरियां और 41 हाफ़ सेंचुरियां दर्ज हैं और वो अब तक 8010 रन बना चुके हैं.
रोहित ने साल 2015 में पिछले वर्ल्ड कप में आठ मैचों में 47.14 की औसत से 330 रन बनाए थे. उनका स्ट्राइक रेट 91.66 का रहा था और इस दौरान उन्होंने एक सेंचुरी और दो हाफ़ सेंचुरियां बनाई थी.

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शिखर धवन
33 साल के बाएं हाथ के बल्लेबाज़ धवन टीम में साथियों के बीच गब्बर नाम से लोकप्रिय हैं. 128 वनडे मैचों का अनुभव रखने वाले धवन 16 शतक जड़ चुके हैं और 44.62 की औसत से कुल मिलाकर 5355 रन बना चुके हैं.
धवन का आईसीसी टूर्नामेंटों में बेहतरीन रिकॉर्ड रहा है. धवन ने 2013 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी में 5 मैचों में एक शतक के साथ 363 रन बनाए थे और उनका औसत रहा था 90.75. भारत इस टूर्नामेंट का विजेता रहा था.
2015 वर्ल्ड कप में धवन में 8 मैचों में 412 रन बनाए थे, जिसमें दो शतक शामिल हैं. ऑस्ट्रेलिया-न्यूज़ीलैंड की मेजबानी में हुए इस टूर्नामेंट में धवन का औसत 91.75 का रहा था.
इंग्लैंड में खेली गई 2017 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी में भी धवन ने 5 मैचों में 67.60 की औसत से 338 रन बनाए थे, जिसमें एक शतक और दो अर्धशतक शामिल हैं.
विराट कोहली (कप्तान)

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आईसीसी की बल्लेबाज़ों की वनडे रैंकिंग में नंबर एक बल्लेबाज़ विराट कोहली को 227 वनडे मैचों का अनुभव है. 30 साल के कोहली वनडे मैचों में 41 शतक और 49 अर्धशतक जड़ चुके हैं और उनके नाम 10843 रन हैं.
विराट कोहली का ये तीसरा वर्ल्ड कप होगा. 2011 के वर्ल्ड कप में कोहली ने 9 मैचों में 282 रन बनाए थे, जिसमें एक शतक शामिल है.
2013 की आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी में कोहली ने 5 मैचों में 176 रन बनाए थे और उनका औसत रहा था 58.66 का.
2015 वर्ल्ड कप में कोहली ने 8 मैचों में 50.83 की औसत से 305 रन बनाए थे, जिसमें एक शतक शामिल है.
2017 की आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी में कोहली ने 5 मैचों में 258 रन बनाए और उनका औसत रहा था 129 का.
अंबाटी रायुडू या विजय शंकर

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भारतीय थिंक टैंक को चौथे नंबर को लेकर माथापच्ची करनी होगी. इस नंबर के लिए अंबाटी रायुडू और विजय शंकर के बीच ज़ोरदार टक्कर मानी जा रही है.
वैसे भी इस नंबर को लेकर प्रयोग लंबे समय से होते रहे हैं. टीम मैनेजमेंट ने पूर्व में इस स्थान पर केएल राहुल, धोनी, सुरेश रैना, केदार जाधव, और मनीष पांडेय को आजमाया, लेकिन पहले एशिया कप और फिर वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ अंबाटी रायुडू ने इस स्थान पर बेहतरीन प्रदर्शन कर अपनी सीट लगभग पक्की कर ली थी.
न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ पाँचवें वनडे में 90 रन की उनकी मैच जिताऊ पारी से चयनकर्ता इस जगह को लेकर बेफिक्र ही होने जा रहे थे कि ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ घरेलू वनडे सिरीज़ में रायुडू पहले तीन वनडे में 13, 18 और दो रन ही बना सके और फिर उन्हें आख़िरी दो वनडे मैचों से बाहर कर दिया गया था. हैदराबाद के 33 साल के रायुडू को 55 वनडे मैचों का अनुभव है और उनका औसत रहा है 47 का.
ये सही है कि शायद रायुडू बहुत अच्छी फॉर्म में नहीं हैं, लेकिन क्रिकेट में ही तो ये कहावत है- फॉर्म इज़ टेम्पोररी, क्लास इज़ परमानेंट.

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रायुडू को चौथे नंबर के लिए टक्कर दे सकते हैं विजय शंकर. शंकर ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ वनडे सिरीज़ में चार मैचों में 30 की औसत और 112 की स्ट्राइस से 120 रन बनाकर कप्तान कोहली और चयनकर्ताओं को प्रभावित किया है. इसके अलावा को अच्छी गेंदबाज़ी भी कर लेते हैं.
ये नहीं भूलना चाहिए कि 2003 के वर्ल्ड कप में वीवीएस लक्ष्मण की जगह दिनेश मोंगिया को भी कुछ इन्हीं वजहों से टीम में शामिल किया गया था और 2011 के वर्ल्ड कप में युवराज सिंह ने बल्लेबाज़ के साथ पाँचवें गेंदबाज़ की भी भूमिका बखूबी निभाई थी. युवराज ने पूरे टूर्नामेंट में 15 विकेट चटकाए थे.
महेंद्र सिंह धोनी

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37 साल के धोनी इकलौते कप्तान रहे हैं, जिन्होंने अपने नेतृत्व में आईसीसी के तीनों टूर्नामेंट टीम को जिताए हैं. 341 वनडे मैचों का अनुभव रखने वाले विकेटकीपर बल्लेबाज़ धोनी 50.72 की औसत से 10,500 रन बना चुके हैं. उनके नाम 10 शतक और 71 अर्धशतक दर्ज हैं.
धोनी का ये चौथा वर्ल्ड कप टूर्नामेंट होगा.
वेस्ट इंडीज़ में 2006-07 में खेले गए अपने पहले वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में धोनी को कुछ दिखाने का ख़ास मौका नहीं मिला था. धोनी तीन मैचों में सिर्फ़ 29 रन ही बना सके थे.
लेकिन इसके चार साल बाद 2011 में उन्होंने अपनी कप्तानी में टीम को विश्व चैंपियन बनाया था. धोनी ने टूर्नामेंट में 9 मैचों में 48.20 की औसत से 241 रन बनाए थे.
2015 के वर्ल्ड कप में भी धोनी का बल्ला खूब चला था. धोनी ने 8 मैचों में 59.25 की औसत से 237 रन बनाए थे, जिसमें दो अर्धशतक शामिल हैं.
केदार जाधव या दिनेश कार्तिक?

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केदार जाधव की भूमिका टीम में कमोबेश ऑल राउंडर की है. दाएं हाथ के बल्लेबाज़ 34 साल के जाधव को 59 वनडे मुक़ाबलों का अनुभव है. ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ हाल ही में संपन्न घरेलू सिरीज़ में जाधव ने 81, 11, 26, 10 और 44 रन बनाए. जाधव वनडे में 27 विकेट भी ले चुके हैं.
दिनेश कार्तिक टीम में जगह बना पाएंगे या नहीं ये तो ठीक-ठीक नहीं कहा जा सकता, लेकिन वे ऐसे बल्लेबाज़ हैं जो विकेटकीपर होने के साथ-साथ नंबर एक से लेकर आख़िर तक किसी भी क्रम पर बल्लेबाज़ी करने का दम रखते हैं. श्रीलंका में हुई निदहास ट्रॉफ़ी में कार्तिक ने दिखाया था कि वो न केवल तेज़ी से स्ट्राइक बदलने में माहिर हैं, बल्कि कुछ मैच तो उन्होंने अपने दम पर जिताए भी.
33 साल के कार्तिक को 91 वनडे मैचों का अनुभव है. उन्होंने 31 की औसत से 1738 रन बनाए हैं, जिसमें 9 अर्धशतक शामिल हैं. रिज़र्व विकेटकीपर के रूप में टीम में शामिल होने की उनकी दावेदारी में काफ़ी वज़न है.
हार्दिक पांड्या या रवींद्र जडेजा

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2018 में एशिया कप से पहले तक हार्दिक पांड्या का ग्राफ़ तेज़ी से ऊपर जा रहा था और यहाँ तक कि कई क्रिकेट विश्लेषक तो उन्हें 'दूसरा कपिल देव' तक बताने लगे थे. लेकिन चोट के कारण उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा. उनकी ग़ैरमौजूदगी में रवींद्र जडेजा को भरपूर मौका मिला. कुछ महीनों के बाद हार्दिक पांड्या टीम में लौटे, लेकिन एक बार फिर उन्हें टीम से बाहर बैठना पड़ा. इस बार वजह चोट नहीं, बल्कि उनका एक टीवी प्रोग्राम में दिया गया बयान बना था.
ख़ैर, अपनी बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी से हार्दिक कई मर्तबा ख़ुद को टीम के लिए उपयोगी साबित कर चुके हैं. हार्दिक को 45 वनडे मैचों का अनुभव है और वो 29 से अधिक की औसत से 731 रन बना चुके हैं. इसके अलावा उनके नाम 44 वनडे विकेट भी दर्ज हैं. न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ आख़िरी दो मैचों में हार्दिक ने 16 और 45 रनों की पारियां खेली थी.
हार्दिक पांड्या को अंतिम एकादश के लिए ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा से टक्कर मिल सकती है. 151 वनडे मुकाबलों का अनुभव रखने वाले 30 साल के जडेजा 2035 रन बनाए हैं और उनका औसत है 29.92 का. बाएं हाथ से गेंदबाज़ी करने वाले जडेजा 174 विकेट चटका चुके हैं.
जडेजा को अगर इस बार मौका मिला तो ये उनका दूसरा वर्ल्ड कप होगा. 2015 के वर्ल्ड कप में जडेजा ने 8 मैचों में 57 रन बनाए थे. इसके अलावा उन्होंने टूर्नामेंट में 9 विकेट भी चटकाए थे.
भुवनेश्वर कुमार

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इंग्लैंड के विकेटों पर भुवनेश्वर कुमार की स्विंग बेहद कारगर और मारक साबित हो सकती है. भुवनेश्वर का दावा तीन तेज़ गेंदबाज़ों के कोटे में अहम माना जा रहा है.
29 साल के भुवनेश्वर को 105 वनडे मैचों का अनुभव है. उन्होंने 118 विकेट लिए हैं. भुवनेश्वर उन गेंदबाज़ों में शामिल हैं, जिन पर निचले क्रम में बल्लेबाज़ी पर कुछ भरोसा किया जा सकता है.
कुलदीप यादव

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पिछले कुछ महीनों में कुलदीप यादव ने अपनी गेंदबाज़ी की विविधता से विपक्षी बल्लेबाज़ों की जमकर परीक्षा ली है. वो गेंद को फ्लाइट कराने से नहीं डरते और पिटाई होने पर जल्दी घबराते नहीं हैं.
कुलदीप को 44 वनडे मुकाबलों का अनुभव है और वो अपने खाते में अब तक 87 विकेट जमा कर चुके हैं. 2018 में दक्षिण अफ्रीका में वनडे सिरीज़ में उन्होंने 17 विकेट झटककर अपना लोहा मनवाया था. इंग्लैंड में भी उन्होंने तीन मैचों में 9 विकेट हासिल किए. 2018 के एशिया कप में कुलदीप ने 10 विकेट चटकाए थे, जबकि भारत की मेजबानी में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ खेली गई वनडे सिरीज़ में भी उन्होंने इतने ही विकेट लिए.
युजवेंद्र चहल

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कुलदीप के साथ युजवेंद्र की जोड़ी 'कुलचा' के नाम से मशहूर है. 23 साल के चहल को लेगब्रेक गुगली में महारत हासिल है. उन्हें कुल मिलाकर 41 वनडे मैचों का अनुभव है और वो 72 विकेट चटका चुके हैं.
दक्षिण अफ्रीका में चहल ने 6 मैचों में 16 विकेट चटकाए थे. न्यूज़ीलैंड सिरीज़ में भी चहल भारत के लिए तुरुप का इक्का साबित हुए थे और उन्होंने 5 मैचों में 9 विकेट चटकाए थे.
जसप्रीत बुमराह

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कप्तान कोहली अपने गेंदबाज़ों में से अगर किसी पर सबसे ज़्यादा भरोसा कर सकते हैं तो वो नाम है जसप्रीत बुमराह.
पिछले कुछ मैचों में बुमराह ने आखिरी ओवरों में कप्तान के भरोसे को बनाए रखा है. वो अपनी गेंदबाज़ी की विविधता से न केवल बल्लेबाज़ों को बांधने की क्षमता रखते हैं, बल्कि विकेट उखाड़ने का दमखम भी रखते हैं. बुमराह टी20, वनडे और टेस्ट मैचों में गेंदबाज़.
हालाँकि क्रिकेट विशेषज्ञ आशंका जता रहे हैं कि कहीं आईपीएल की थकान जसप्रीत जैसे गेंदबाज़ पर असर न डाले वो वर्ल्ड कप में अपने सर्वश्रेष्ठ न दे सकें.
25 साल के बुमराह को 49 वनडे मुक़ाबलों का अनुभव है और वो अपने खाते में 85 विकेट जमा कर चुके हैं.
मोहम्मद शमी

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दाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी को तीसरे तेज़ गेंदबाज़ के रूप में टीम में जगह मिल सकती है. 28 साल के शमी को 63 वनडे मुकाबलों का अनुभव है.
शमी वनडे इंटरनेशनल करियर में 113 विकेट चटका चुके हैं और छह बार किसी मैच में चार विकेट लेने का कारनामा कर चुके हैं.
शमी चुने गए तो ये उनका दूसरा वर्ल्ड कप होगा. 2015 के वर्ल्ड कप में शमी ने 7 मैचों में 17 विकेट चटकाए थे.
इसके अलावा चयनकर्ता जिन कुछ और नामों पर चर्चा कर सकते हैं, उनमें प्रमुख हैं दिल्ली के विस्फोटक विकेटकीपर बल्लेबाज़ ऋषभ पंत, केएल राहुल, आजिंक्य रहाणे, रविचंद्रन अश्विन और सुरेश रैना.
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