अपने एक मलाल और धोनी-कोहली से रिश्तों पर बोले गौतम गंभीर

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, सूर्यांशी पांडेय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
2008 में दिल्ली के फ़िरोज़शाह कोटला ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ डबल सेंचुरी मारना, 2009 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ दूसरे टेस्ट मैच में 600 मिनट तक टिककर भारत के लिए 'द वॉल' बनना, 2007 वर्ल्ड टी20 के फ़ाइलन में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 75 रनों की बेशकीमती पारी खेल कर भारत को इस फ़ॉर्मेट में खेले जा रहे पहले विश्व कप का चैंपियन बनाना और 2011 के विश्व कप में सर्वाधिक 97 रनों की पारी से भारत की जीत में अहम किरदार निभाना, सब याद रहेगा.
ये वो पारियां हैं जिनकी बदौलत गौतम गंभीर भारतीय क्रिकेट में हमेशा याद किए जाते रहेंगे.
चार दिसंबर को सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर गौतम गंभीर ने क्रिकेट के सभी फ़ॉर्मैट से रिटायरमेंट की घोषणा कर दी.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
लेकिन गौतम खेल से तो रिटायरमेंट ले सकते हैं, अपने फ़ैन्स के दिलों से कभी रिटायर नहीं हो सकते. गौतम गंभीर कि रिटायरमेंट के 'कल आज और कल' की कहानी जानने हम पहुंच गए उन्हीं के पास.
जब हम उनके घर पहुंचे तो घर का बड़ा सा कोना उनकी उपलब्धियों से सजा हुआ था. वो सजी हुई ट्रॉफ़ियां मानो गौतम गंभीर के क्रिकेट करियर का आईना बनकर हमारे सामने खड़ी हो गईं.

घर में है यादों का जख़ीरा
फिर क्या हमने उनसे पूछा कि इन सभी ट्रॉफ़ियों में से सबसे ख़ास ट्रॉफ़ी आपको कौन सी लगती है?
आंखों में यादों का अंबार लिए उन्होंने 'आईसीसी टेस्ट प्लेयर ऑफ़ द इयर' की ट्रॉफ़ी की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ये बेहद ख़ास रही क्योंकि 2009 में मुझे ना सिर्फ़ 'आईसीसी टेस्ट प्लेयर ऑफ़ द इयर' का ख़िताब मिला बल्कि भारतीय टीम को भी 'टेस्ट टीम ऑफ़ द इयर' का अवॉर्ड मिला.
2009 में ही गौतम गंभीर ने न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ 600 मिनट टिककर 137 रनों की पारी दूसरे टेस्ट मैच में खेली थी.
गौतम गंभीर ने अपने करियर के सबसे ख़ास पल, सबसे बड़ा मलाल और निजी ज़िंदगी के कई अनगिनत लम्हों पर चर्चा भी की.

इमेज स्रोत, Getty Images
गौतम के लिए कौन सी पारी है ख़ास?
बातों का सिलसिला शुरू हुआ तो सबसे पहले गौतम गंभीर ने 2007 टी 20 विश्व कप और 2011 विश्व कप में अपने बेहतरीन प्रदर्शन का ज़िक्र किया.
वह कहते हैं कि ये वो जीत है जो उनके ज़ेहन में हमेशा के लिए सबसे ख़ास रहेगी. साथ ही ख़ास रहेगी 2010-11 की दक्षिण अफ़्रीका की वो टेस्ट सिरीज़ जिसे ड्रॉ करने में भारतीय टीम सफल रही थी.
उस टेस्ट सिरीज़ का ज़िक्र करते हुए वो कहते हैं, "ऑस्ट्रेलिया के अलावा कोई और टीम दक्षिण अफ़्रीका पर उन्हीं के होम ग्राउंड में दबदबा कायम करने में कामयाब नहीं हुई, ऐसे में वो टेस्ट सिरीज़ ड्रॉ करना अपने आप में एक मिसाल है."

इमेज स्रोत, Alamy
धोनी से नाराज़?
जब हमने ये पूछा कि इन दोनों मौक़ों पर धोनी की कप्तानी की सराहना कहीं ना कहीं उनके टीम को दिए गए योगदान पर भारी पड़ी थी तो गौतम गंभीर कहते हैं कि भारत में ये कमी है कि जब भी कोई बड़ा टूर्नामेंट या विश्व कप जैसे मुक़ाबलों में भारतीय टीम जीतती है तो लोग केवल कप्तान की तारीफ़ करते हैं.
ऐसा ट्रेंड विदेश में नहीं है. उन्होंने ये भी कहा, "मुझे नहीं लगता कि मेरे योगदान की अहमियत कहीं से भी कम चर्चा में रही. चूंकि कप्तान की भूमिका अहम होती है इसलिए उनकी तारीफ़ होना लाज़मी भी है."

इमेज स्रोत, Getty Images
ज़िक्र धोनी का हुआ तो ये बात भी निकलकर आई कि गौतम गंभीर महेंद्र सिंह धोनी से नाराज़ रहते हैं. गौतम गंभीर को उनके अच्छे प्रदर्शन के बावजूद 2015 के विश्व कप में जगह नहीं मिली तो क्या यह वजह है नाराज़गी की. क्या उन्हें वो विश्व कप ना खेलने का मलाल है.

इमेज स्रोत, Gareth Copley
करियर का सबसे बड़ा मलाल
गौतम गंभीर कहते हैं कि भले ही उनके करियर का सबसे बड़ा मलाल ये रहा कि वह 20 साल के करियर में 50 ओवर का एक ही विश्व कप खेल पाए (2011) और 2015 में अच्छी फॉर्म में होने पर भी टीम में शामिल नहीं किए गए. लेकिन इसके लिए ज़िम्मेदार वो किसी को नहीं मानते. वह कहते हैं कि धोनी के प्रति उनके मन में कोई खटास नहीं है.
वो उनसे किसी भी तरह से नाराज़ नहीं. इस बात पर विस्तार से बोलते हुए उन्होंने मैदान पर अपने ग़ुस्से के कारण कई खिलाड़ियों से झगड़ों का भी ज़िक्र किया.

इमेज स्रोत, Getty Images
विराट से जब आईपीएल में भिड़े थे गौतम
गंभीर कहते हैं कि 2013 में आईपीएल मैच के दौरान मेरे और विराट कोहली के बीच हुई बहस का कोई निजी कारण नहीं था. मैं चाहे विराट कोहली से भिड़ा या फिर किसी और देश के खिलाड़ियों से, मैदान पर मैं सिर्फ़ अपनी टीम के लिए खेलता हूं और लड़ता हूं.
क्योंकि क्रिकेट एक ऐसा खेल है जो जितना दिमाग़ से खेला जाता है उतना ही दिल से भी और फिर ऐसी लड़ाइयां खेल का हिस्सा बन जाती हैं. मैदान के बाहर मेरी किसी से कोई निजी लड़ाई नहीं है.

इमेज स्रोत, AFP
"क्रिकेटर से बेहतर आर्मी ऑफिसर होता"
ये तो हुई रिकॉर्ड्स, गंभीर के ग़ुस्से और क्रिकेट की बात. इस सबके बीच गौतम गंभीर यह बताते हैं कि अगर वह क्रिकेटर ना होते तो सेना में ऑफ़िसर की भूमिका में होते.
सेना और देश के प्रति अपने प्रेम को ज़ाहिर करते हुए वह बोले, "मुझे लगता है मैं क्रिकेटर से बेहतर एक आर्मी ऑफ़िसर होता. भारतीय सेना मेरा पहला प्यार है और हमेशा रहेगा."
उनका मानना है जिस तरह का उनका व्यक्तित्व है, वह गंभीर रहते हैं, सेना का करियर उनके लिए बना था.

इमेज स्रोत, Getty Images
लेकिन मॉर्डन स्कूल में पढ़ने के दौरान हर स्पोर्ट्स खेलते हुए उन्हें क्रिकेट से प्यार हुआ और वह प्यार जुनून में कब बदल गया पता ही नहीं चला.
आखिरी रणजी ट्रॉफ़ी खेल गंभीर अपने जुनून के क्रिकेट जगत को अलविदा कह चुके हैं. तो आगे क्या?
क्या हाथों में बल्ला थामने वाले गौतम गंभीर हाथ जोड़कर वोट मांगते दिखाई दे सकते हैं?

इमेज स्रोत, Getty Images
नेता जी बनेंगे गौतम गंभीर?
कई कयास लगाए जा रहे हैं कि वह राजनीति में आ सकते हैं, तो गौतम गंभीर से ही पूछ लिया. इस पर वो कहते हैं, "बिल्कुल भी नहीं!"
'मुझे समझ नहीं आता कि ये अफ़वाह क्यों उड़ रही है. मुझे देश की सेवा करनी है तो मैं अपनी फाउंडेशन के ज़रिए करूंगा ना कि किसी का 'रबर स्टाम्प' बनकर.'
गौतम गंभीर के कुछ ट्वीट को से लोग अंदाज़ा लगाते हैं कि वो बीजेपी का समर्थन करते हैं. इस पर गंभीर ने कहा, ''आप मेरा ट्वीटर हैंडल देख लीजिए मैंने बीजेपी को भी टैग करते हुए निंदा की है.''
अगर ऐसा है तो फिर वह 2014 में अमृतसर में अरुण जेटली की रैली में क्यों गए थे.
इस पर वह कहते हैं कि वह अरुण जेटली को बचपन से जानते हैं. इसके अलावा अरुण जेटली 1999 से 2013 तक डीडीसीए (दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन) के अध्यक्ष पद पर थे जिसके कारण एक प्रोफ़ेशनल रिश्ता भी था. इन रिश्तों के नाते वह गए उसके अलावा उनका और कोई नाता नहीं था.

इमेज स्रोत, Getty Images
'मेरे पत्नी, बच्चे मेरी ज़िंदगी हैं'
फिर उनसे उनकी निजी ज़िंदगी पर बात हुई. पता चला कि गौतम गंभीर जितने मैदान में गंभीर है उतने ही दिल से सोचने वाले इंसान हैं.
वह कहते हैं कि मेरी पत्नी नताशा जैन दिल से ज़्यादा दिमाग़ से सोचती हैं, जिससे उनकी ज़िंदगी में संतुलन बना रहता है.
गौतम गंभीर बताते हैं, "नताशा के पिता और मेरे पिता आपस में अच्छे दोस्त थे और इसके चलते मैं नताशा को जानने लगा और फिर दोस्ती हो गई." और इस दोस्ती को प्यार में बदलने में ज़्यादा समय नहीं लगा.
2011 में दोनों ने शादी की. गौतम गंभीर कि दो बेटियां हैं- आज़ीन और अनैज़ा. ईरानी मूल के नाम उन्होंने अपनी बेटियों को दिए हैं.
वह बताते हैं कि बेटियों को बचपन से आज तक वह एक चीज़ सीखा रहे हैं और वो है बेफिक्र होकर ज़िंदगी को जीना, कम सोचना और ज़्यादा मुस्कुराना.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















