मिताली राज-रमेश पोवार विवाद से पहले जब कप्तान को कोच ने जड़ दिया था थप्पड़

हरमनप्रीत कौर, मिताली राज

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इमेज कैप्शन, वेस्ट इंडीज़ के एंटीगा में टी 20 महिला विश्व कप के सेमीफ़ाइनल का विवाद
    • Author, सूर्यांशी पांडेय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

''यह तो कुछ भी नहीं! 1995 में कोच रहीं श्रीरूपा बोस मुखर्जी ने तो टीम की कप्तान पूर्णिमा राव को सबके सामने थप्पड़ जड़ दिया था.''

जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम के अस्तित्व पर प्रश्न चिह्न रहता था उन दिनों में अपनी टीम के साथ खड़ी रहने वालीं और भारतीय महिला टीम की पहली कप्तान रहीं शांता रंगास्वामी ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में ये जानकारी दी.

उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट टीम से जुड़े कई गड़े मुर्दे उखाड़े.

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इमेज कैप्शन, 2006 में कराची के नेशनल स्टेडियम में भारतीय महिला टीम

जिस घटना का उन्होंने ज़िक्र किया वो घटना 1995 में न्यूज़ीलैंड के दौरे में घटी थी.

और जो घटना आजकल सुर्ख़ियां बटोर रही हैं. यह वेस्ट इंडीज़ के एंटीगा में टी-20 महिला विश्व कप के सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में घटी.

सेमीफ़ाइनल में मैदान पर जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम इंग्लैंड के ख़िलाफ़ उतरी तो मिताली राज प्लेइंग इलेवन में नहीं थीं.

मिताली राज

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इमेज कैप्शन, टी 20 महिला विश्व कप में पाकिस्तान और आयरलैंड के ख़िलाफ़ अर्धशतक लगाने के बावजूद उन्हें टीम में शामिल नहीं किया

टी-20 महिला विश्व कप में पाकिस्तान और आयरलैंड के ख़िलाफ़ अर्धशतक लगाने के बावजूद उन्हें टीम में शामिल नहीं किया गया जिसकी सफ़ाई अब ना सिर्फ़ महिला क्रिकेट टीम के कोच रमेश पोवार दे रहे हैं बल्कि महिला टी-20 टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर भी कोच के बचाव में बोलतीं दिख रहीं हैं.

मिताली राज का बीसीसीआई को लिखा ख़त जब मीडिया में लीक हुआ तो इस मामले पर विवाद शुरू हो गया. इस बात से शांता रंगास्वामी हैरान हैं कि बीसीसीआई जैसे प्रोफ़ेशनल संगठन से ऐसी लापरवाही कैसे हो गई कि इस तरह के विश्वसनीय ख़त मीडिया में बड़ी आसानी से लीक हो गए.

वह बताती हैं कि महिला क्रिकेट का अब स्तर बेहतर हो गया है और यह महिला क्रिकेट टीम का सुनहरा दौर चल रहा है. ऐसे में इस तरह के विवाद खेल और टीम के लिए नुक़सादायक हैं.

भारतीय महिला क्रिकेट

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इमेज कैप्शन, 1999 की भारतीय महिला क्रिकेट टीम. इंग्लैंड के साथ वन-डे खेलने से पहले की तस्वीर

जब ना था कोई कोच, ना मिलता था वेतन...

शांता रंगास्वामी ने महिला क्रिकेट का वो दौर देखा है जब महिला क्रिकेट खिलाड़ियों को किसी भी तरह का वेतन नहीं मिला करता था.

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि शांता रंगास्वामी ने अपने पूरे करियर में कभी सैलरी ही नहीं पाई. वह केवल क्रिकेट के लिए जुनून था जो उन्हें मैदान पर बल्ला घुमाने की हिम्मत देता रहा.

शांता रंगास्वामी बताती हैं कि 1984 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ दिल्ली में खेलते वक़्त स्टेडियम में उम्मीद से ज़्यादा सीटें दर्शकों से भर गई थी, जिसके चलते टीम ने मैनेजेमेंट से टिकटों के बिकने से जो मुनाफ़ा हुआ था उसमें अपने लिए भी हिस्सा मांगा था. लेकिन महिला खिलाड़ियों को उसका एक प्रतिशत भी पैसा नहीं मिला, जिसको सेकर सभी खिलाड़ियों ने वो टेस्ट मैच खेलने से मना कर दिया.

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इमेज कैप्शन, 1996 में पहला कोच नियुक्त किया गया था.

वह बताती हैं कि उस समय उन्होंने अपनी टीम को एकजुट करके काला बैंड हाथों में पहनकर मैदान पर खेलने के लिए उतरने के लिए प्रोत्साहित किया.

लेकिन उस सिरीज़ के बाद उनको ही टीम से निकाल दिया गया और फिर 1995 के बाद उनकी वापसी हो पाई.

और जानेंगे तो पता चलेगा कि उन दिनों महिला क्रिकेट टीम के पास कोई कोच तक नहीं हुआ करते थे.

यूं अंधकार में दीपक जैसे चमकने कि कोशिश करती टीम का केवल एक सहारा था और वह था कप्तान और उनका एक-दूसरे पर विश्वास.

पहला कोच 1996 में नियुक्त किया गया था.

महिला क्रिकेट

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इमेज कैप्शन, बीसीसीआई ने 2006 से टीम को संगठन के अंतरगत संचालित करने का फ़ैसला लिया

यहां तक कि 2006 तक बीसीसीआई ने नहीं बल्कि विमेन क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया ने टीम की ज़िम्मेदारी उठाई.

शांता रंगास्वामी के मुताबिक शरद पवार और अनुराग ठाकुर ने जब बीसीसीआई कि कमान संभाली तो भारतीय महिला क्रिकेट टीम का मानो पुनर्जन्म हुआ.

उनके चलते बीसीसीआई ने 2006 से टीम को संगठन के अंतरगत संचालित करने का फ़ैसला लिया और महिला खिलाड़ियों को फ़िक्स सैलरी भी मिलने लगी.

हरमनप्रीत कौर

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इमेज कैप्शन, टी20 कप्तान हरमनप्रीत कौर रमेश पोवार के सुर में सुर मिलाती दिखीं

कौन ग़लत-कौन सही

आज महिला क्रिकेट टीम इस मुक़ाम पर खड़ी है कि मिताली राज का एक ख़त कई दरवाज़े खटखटा रहा है, जवाब मांगने की हैसियत रख रहा है.

मिताली राज और टीम की मेहनत से 2017 के विश्व कप से बदली ये छवि महिला क्रिकेट को आज बराबरी पर खड़े होने कि हिम्मत दे रही है.

तो फिर 36 साल कि मिताली राज को क्यों रखा गया सेमीफ़ाइनल से बाहर. रमेश पोवार, महिला टी20 टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर, उप-कप्तान स्मृति-मंधाना और सेलेक्टर सुधा शाह ने सेमीफ़ाइनल के मुक़ाबले से पहले प्लेइंग इलेवन तय करने के दौरान मिताली राज को टीम में ना रखने का फ़ैसला किया.

मिताली राज

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इमेज कैप्शन, मिताली को विश्व टी20 के सेमीफ़ाइनल से बाहर रखा गया

इस फ़ैसले पर कुछ क्रिकेट विशेषज्ञ रमेश पवार और मैनेजेमेंट का साथ देते दिखाई दे रहे हैं तो कुछ मिताली राज के साथ खड़े हैं.

क्रिकेट विशेषज्ञ का तर्क यह है कि चूंकि सेमीफाइनल से पहले ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए मुक़ाबले में जो भारत को जीत हासिल हुई थी और उसमें जो प्लेइंग इलेवन थी उसको ही सेमीफाइनल में उतारने का फ़ैसला लिया गया था.

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ हुए मुक़ाबले में मिताली राज को नहीं खिलाया गया था.

मिताली राज

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इमेज कैप्शन, मिताली राज और टीम की मेहनत से 2017 के विश्व कप से बदली ये छवि महिला क्रिकेट को आज बराबरी पर खड़े होने कि हिम्मत दे रही है.

साथ में यह भी तर्क दिया जा रहा है कि 36 वर्षीय मिताली राज टी-20 जैसा फॉर्मेट खेलने के लिए उतनी सक्षम नहीं हैं, वह पॉवरप्ले में कई डॉट-बॉल्स देतीं हैं.

हालांकि क्रिकेट विशेषज्ञ विजय लोकपल्ली इस बात से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते. उनके मुताबिक अगर मिताली राज के प्रदर्शन पर इतने ही प्रश्न चिन्ह थे तो उन्हें टी-20 विश्व कप में लेकर ही क्यों गए. उन्हे टी 20 विश्व कप के मुक़ाबले क्यों खिलाए.

उन्होंने कहा कि प्रदर्शन पर सवाल उठाने वालों को देखना चाहिए कि टी 20 विश्व कप के जिन मुक़ाबलों में मिताली राज को खिलाया गया, उन सभी मुक़ाबलों में उन्होंने अर्धशतक मारा और टीम को जिताने में अहम भूमिका निभाई. ऐसे में प्रदर्शन के सवालों पर वहीं पूर्ण-विराम लग जाता है.

मिताली राज

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इमेज कैप्शन, टी 20 विश्व कप के जिन मुक़ाबलों में मिताली राज को खिलाया गया, उन सभी मुक़ाबलों में उन्होंने अर्धशतक मारा

प्लेइंग इलेवन पर विजय लोकपल्ली कहते हैं कि अगर प्लेइंग इलेवन में जीत दिलाने वाले खिलाड़ियों को रखना था तो भारतीय महिला क्रिकेट टीम में वेदा कृष्णमूर्ति के ख़राब प्रदर्शन के बावजूद उन्हें टी-20 विश्व कप के हर मुक़ाबले में खिलाया गया.

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इमेज कैप्शन, 2017 में 50 ओवर के विश्व कप में 12 साल बाद फ़ाइनल में पहुंचना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी

आयरलैंड के ख़िलाफ़ 9 रन, तो ऑस्टेलिया के ख़िलाफ़ 3 रन, पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 8 रन बनाकर वह ऑउट हुई.

वैसे इस पूरे विवाद का एक सच यह भी है कि मिताली राज का व्यक्तित्व इस विवाद पर भारी है. 2017 में 50 ओवर के विश्व कप में 12 साल बाद फ़ाइनल में पहुंचना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी.

उस वक्त टीम से ज़्यादा तारीफ़ अकेले मिताली राज की हुई थी और अब टीम की उपलब्धि का श्रेय लेने के लिए दूसरे अहम खिलाड़ी भी मौजूद हैं.

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