भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सिरीज: चेतेश्वर पुजारा की 'लाज बचाने वाली पारी' और 'रन आउट' कनेक्शन

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- Author, प्रदीप कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
एडिलेड ओवल में दिन की आख़िरी गेंद पर चेतेश्वर पुजारा रन आउट हुए. पूरे दिन उन्होंने जिस तरह से बल्लेबाज़ी की, उससे देखते हुए यही वो संभव तरीक़ा बचा था जिससे वे पवेलियन लौट सकते थे. आख़िरी उनके अब तक के करियर की सबसे बड़ी मुश्किल रनिंग बिटविन द विकेट ही रही है.
उनकी इस मुश्किल की बात बाद में, पहले एडिलेड ओवल में खेली गई इस बेमिसाल पारी को देख लीजिए. आउट होने से पहले पुजारा ने 123 रन बनाए. मैच के दूसरे ओवर में ही जब पुजारा बल्लेबाज़ी के लिए उतरे तब भारतीय टीम का स्कोर एक विकेट पर तीन रन था. नौवें बल्लेबाज़ के तौर पर जब वे पवेलियन लौटे तब भारत का स्कोर 250 रन था. यानी इस बीच जो 247 रन बने उसमें क़रीब आधे रन पुजारा के बल्ले से निकले.
वैसे उनकी इस पारी का अंदाज़ा इतने भर से नहीं होता, पुजारा ने 246 गेंदों का सामाना किया और विकेट पर टिक कर यह सुनिश्चित किया कि भारत 200 के नीचे नहीं सिमट जाए. कप्तान कोहली और भरोसेमंद रहाणे जैसे बल्लेबाज़ महज़ 41 रन तक पवेलियन लौट चुके थे, वैसी स्थिति में पुजारा ने नौवें विकेट के रूप में मोहम्मद शमी के साथ 40 रन जोड़कर टीम का स्कोर 250 पर ला दिया.
पुजारा ने केवल अपने दम पर भारत को ऐसे स्कोर पर ला दिया है जहां से वो टेस्ट में मुक़ाबले की स्थिति में बना रह सकता है.
करियर का 16वां शतक
वैसे पुजारा के टेस्ट क्रिकेट करियर का ये 16वां शतक है. ये टेस्ट खुद पुजारा के लिए बेहद संतोषजनक रहा होगा, क्योंकि 65 टेस्ट मैचों में ये पहला मौक़ा है जब उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई पिच पर कोई टेस्ट शतक बनाया है. पुजारा की जिन ख़ामियों की बात होती रही है उसमें विदेशी मैदान पर उम्मीद से कम प्रदर्शन भी रहा है. इस शतक से पहले पुजारा ने दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड की पिचों पर शतक ज़रूर बनाए थे, लेकिन उनके अधिकांश शतक भारतीय उपमहाद्वीप की पिचों पर ही निकले थे.
ऐसे में एडिलेड ओवल में पुजारा का ये शतक इस आलोचना को कुछ हद तक कम करने में ज़रूर मदद करेगा.

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पुजारा ने अपनी इस पारी के साथ ही टेस्ट क्रिकेट में 5000 रन पूरे कर लिए हैं. 108 पारी में इस मुक़ाम तक पहुंचने का कारनामा दिखाकर उन्होंने इस मामले में राहुल द्रविड़ की बराबरी भी कर ली है. दिलचस्प ये है कि पुजारा ने 3000 और 4000 रन पूरे करने के लिए भी उतनी ही पारियां खेली थीं जितनी राहुल द्रविड़ को खेलनी पड़ी थीं.
ये भी कम दिलचस्प नहीं है कि चेतेश्वर पुजारा को हमेशा ही राहुल द्रविड़ की विरासत को आगे बढ़ाने वाला क्रिकेटर माना गया. वे मौक़े-बेमौक़े इसे साबित भी करते रहे हैं लेकिन अपनी ख़राब फ़िटनेस और निरंतरता की कमी के चलते उनके होने से वह भरोसा अब तक नहीं जमा है कि पुजारा हैं तो सब संभाल लेंगे.
चेतेश्वर पुजारा को बेहतरीन तकनीक वाला बल्लेबाज़ माना जाता रहा है, हालांकि कलाई का ज़्यादा इस्तेमाल करने के चलते वे गेंद की लाइन को मिस करते रहे हैं लेकिन उनसे जितनी उम्मीद की जाती रही है उसके पूरा नहीं होने की सबसे बड़ी वजह उनका घुटना है.
घुटनों के ऑपरेशन
चेतेश्वर पुजारा क्रिकेट की दुनिया में संभवत इकलौते ऐसे बल्लेबाज़ हैं जिनके दोनों घुटनों के दो-दो बार ऑपरेशन हो चुके हैं. कोई दूसरा बल्लेबाज़ होता तो उसका क्रिकेट करियर परवान नहीं चढ़ पाता लेकिन अपने करियर के शुरुआती दौर में इस ऑपरेशन से गुज़रने के बाद भी पुजारा ने हिम्मत नहीं हारी.

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केवल अपने ग्रिट के सहारे वे उस मुक़ाम तक पहुंच गए हैं जिसका सपना हर क्रिकेटर देखता है. वे भारत की ओर से 65 टेस्ट खेल चुके हैं जिनमें 50 से ज़्यादा की औसत से उनके बल्ले 5000 से ज़्यादा रन बन चुके हैं और उन्हें टेस्ट क्रिकेट में एक मज़बूत बल्लेबाज़ के तौर पर देखा जाता है.
हालांकि दोनों घुटनों के इन ऑपरेशनों का असर उनके खेल पर पड़ा है, उनके पांव कई बार सही टाइम पर बॉल के पीछे नहीं आ पाते हैं लेकिन इस तकनीक को वे लगातार अपनी मेहनत और अभ्यास से ठीक करने में जुटे हैं.
रनिंग बिटविन द विकेट कमज़ोरी
इसके अलावा इन ऑपरेशनों के चलते ही उनकी रनिंग बिटविन द विकेट भी ख़राब हो चुकी है. कई बार उनकी अच्छी पारी का अंत रन आउट के चलते ही हुआ है. एडिलेड ओवल में पैट कमिंस के सटीक थ्रो से जब पुजारा रन आउट हुए तो बीते आठ साल में आठवीं बार में वे इस दुर्भाग्यपूर्ण तरीक़े से आउट हुए. ये मौजूदा समय में खेलने वाले क्रिकेटरों में सबसे ख़राब रिकॉर्ड है.

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लेकिन पुजारा की तारीफ़ करनी होगी कि अपनी लिमिटेशन के बाद भी वे क्रिकेट के मैदान में ऐसी पारियां खेलते रहे हैं जो क्रिकेट प्रेमियों में अनलिमिटेड रोमांच भर रहा है.
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