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भारत का इंग्लैंड दौरा: विराट कोहली की सबसे कठिन परीक्षा
- Author, नीरज झा
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
विराट कोहली के सामने इंग्लैंड दौरा हमेशा से ही कठिन रहा है और इस साल भी दौरे की शुरुआत उनके लिए अच्छी नहीं रही.
आयरलैंड के ख़िलाफ़ टीम ने तो बेहतरीन बल्लेबाज़ी की लेकिन कप्तान विराट दोनों ही टी-20 मैचों में बल्ला चलाने में नाकाम रहे.
आयरलैंड के ख़िलाफ़ पहले मैच में तो वो बिना कोई रन बनाये आउट हो गए, जबकि दूसरे मैच में सिर्फ़ 9 रन ही बना पाए.
विराट का इस तरह दो मैचों में आउट होना, वो भी आयरलैंड जैसी कमज़ोर टीम के ख़िलाफ़ निश्चित तौर पर खेल प्रेमियों के लिए अच्छी खबर नहीं है.
हालांकि इस प्रदर्शन से कहीं ना कहीं इंग्लैंड की टीम को राहत ज़रूर मिली होगी.
सिरीज़ जीत की उम्मीद के साथ विराट के नेतृत्व वाली टीम अब आयरलैंड से इंग्लैंड के लिए रवाना हो चुकी हैं.
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ होने वाली तीन टी-20, तीन वनडे और पाँच टेस्ट मैचों की सिरीज में भारतीय टीम की कड़ी परीक्षा होनी अभी बाकी है.
विराट के सामने कड़ी चुनौती
विराट कोहली का नाम दुनिया के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज़ों में शुमार होता है.
उनके जादुई बल्ले ने हर जगह अपना रंग बिखेरा है. चाहे वो ऑस्ट्रेलिया की धरती हो या फिर साउथ अफ्रीका की सरज़मीं हो.
भारत ने अपनी पिछली सॉउथ अफ़्रीका की सिरीज़ में मेज़बान टीम को लिमिटेड ऑवर्स में धूल चटाई थी.
विराट कोहली ने इस सिरीज़ में रनों की बरसात कर दी थी. अगर बात आईसीसी रैंकिंग्स की करें तो वनडे में वो नंबर एक पर है और टेस्ट में दुसरे स्थान पर.
इंग्लैंड में नहीं चला कोहली का बल्ला
इंग्लैंड ही एकमात्र ऐसा देश है जहाँ विराट कोहली का ख़ुद को साबित करना बाकी है.
वो इस देश के ख़िलाफ़ अभी तक अपने बल्लेबाज़ी का जौहर दिखने में नाकाम रहे हैं.
इंग्लैंड का दौरा उनके लिए हमेशा से ही एक चुनौती रहा है और अब तक उन्होंने वहाँ कोई बड़ा स्कोर नहीं किया है.
इंग्लैंड में कोहली का टेस्ट रिकॉर्ड काफ़ी ख़राब रहा है. आपको ताज्जुब होगा कि जिस खिलाड़ी का टेस्ट मैचों में औसत क़रीब 54 का है और वो इंग्लैंड की धरती पर अब तक महज़ 13 के औसत से ही रन बना पाये हैं.
इंग्लैंड में विराट पाँच टेस्ट की 10 पारियों में सिर्फ़ 134 रन ही बना पाये हैं और उनका उच्चतम स्कोर 39 है.
हालांकि वनडे में उनकी स्थिति थोड़ी बेहतर है. उनका करियर औसत 58 है जबकि इंग्लैंड में उन्होंने 32 के औसत से रन बनाये हैं.
यही दौरा उनके लिए एक मौका है जहाँ उन्हें ना सिर्फ़ टीम को लीड करते हुए जीत दिलानी है बल्कि अपने बल्ले से भी रन बटोरना है.
विराट का फ़ॉर्म ही इस सिरीज़ का मुक़द्दर तय करेगा और पूरी दुनिया की नज़रें उन्हीं की बैटिंग पर टिकी होगी.
हर देश, हर मैदान में विराट ने अपने बल्ले से कारनामे दिखाए है लेकिन इंग्लैंड की धरती को अभी भी उनसे एक बेहतरीन पारी का इंतज़ार है.
कठिन है डगर, उम्मीद है मगर
भारतीय कप्तान विराट कोहली एक फ़ाइटर हैं और वो पूरी तैयारी के साथ मैदान पर उतरते हैं.
टीम इंडिया इंग्लैंड में 1 अगस्त से एजबेस्टन में अपने टेस्ट अभियान की शुरुआत करेगी जबकि इस दौरे का आग़ाज़ 3 जुलाई को टी-20 से होगा.
पिछली बार इंग्लैंड दौरे पर फ़्लॉप हुए कोहली इस बार पूरी तरह से एकाग्र हैं और इसी को ध्यान में रखकर उन्होंने अफ़गानिस्तान के ख़िलाफ़ बेंगलुरु में खेले जाने वाले एकमात्र टेस्ट मैच में हिस्सा नहीं लिया.
आईपीएल का सीज़न ख़त्म होने के बाद कोहली सीधे लंदन की सरे काउंटी टीम में खेलने वाले थे, लेकिन चोट की वजह से वो काउंटी क्रिकेट में हिस्सा नहीं ले पाये.
ये सब बातें साफ़तौर पर ये साबित करती हैं कि विराट इंग्लैंड की सिरीज़ को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं.
हालांकि कोहली ने परोक्ष रूप से चोट के कारण काउंटी के तीन मैचों से हटने को अच्छा ही बताया और ये भी कहा कि इस मुश्किल दौरे के लिए वो पूरी तरह से फ़िट हैं.
उन्होंने कहा कि भारत को इंग्लैंड में खेले हुए 4 साल हो गए हैं. ऐसे में वह उन हालातों के लिए ख़ुद को बेहतर ढंग से तैयार करना चाहते थे, लेकिन फ़िट होना उनके लिए ज़्यादा मायने रखता है.
क्या कहते हैं क्रिकेट के दिग्गज
क्रिकेट के कई बड़े पूर्व खिलाडी मानते हैं कि टीम की पूरी प्लानिंग विराट के अपने व्यक्तिगत फ़ॉर्म पर निर्भर करेगी.
वो ये भी मानते हैं कि क्रिकेट पंडितों को इतिहास में ज़्यादा झाँकने की ज़रूरत नहीं है. साल 2014 के विराट और अभी के विराट में काफ़ी अंतर है.
पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज़ बल्लेबाज़ और सलेक्टर इंज़माम उल-हक़ का मानना है कि विराट की गिनती आल टाइम ग्रेट्स की लिस्ट में होती है और उन्हें उम्मीद है कि वो अपने नाम के अनुरूप इंग्लैंड में भी धूम मचायेंगे.
इंज़माम कहते हैं कि भले ही विराट का प्रदर्शन अभी तक इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अच्छा नहीं रहा हो लेकिन टीम में उनके जैसे खिलाड़ी के रहने मात्र से ही विरोधी कैंप में हड़कंप मचा रहता है.
उधर पूर्व ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ग्लेन मैक्ग्रा का कहना है कि इसमें कोई शक नहीं है कि विराट अब एक अनुभवी क्रिकेटर हैं, लेकिन इंग्लिश कंडिशंस बेहद चुनौतीपूर्ण होती हैं. ख़ासकर जब उनके पास जेम्स एंडरसन जैसा अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ हो जो उन कंडिशंस को और बेहतर जानता है. तो विराट के लिए चुनौती और भी कड़ी हो जाती हैं.
मैक्ग्रा ये भी मानते हैं कि विराट को इंग्लैंड दौरे पर क़ामयाब होने के लिए एंडरसन के ख़िलाफ़ ख़ास तैयारी करनी होगी.
उन्हें पहले उन कंडिशंस से तालमेल बैठाना होगा. तभी उन्हें अपनी पारी को आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा.
मैक्ग्रा ने कहा, "मैं कोहली और एंडरसन के संघर्ष को देखने के लिए बेताब हूँ."
इंग्लैंड भी बेहतरीन फ़ॉर्म में
इंग्लैंड की टीम ने अपने प्रबल प्रतिद्वंद्वी ऑस्ट्रेलिया का वनडे सिरीज़ में 5-0 के एकतरफ़ा अंतर से सफाया कर दिया.
यही नहीं, टी-20 में भी उन्हें इंग्लैंड ने धूल चटायी. इस वाइट-वॉश के बाद इंग्लैंड की टीम विश्वास से भरी हुई है.
ऐसे में भारतीय टीम के लिए यह दौरा मुश्किलों भरा साबित नहीं होने वाला है.
हालांकि विराट कोहली की टीम के लिए इंग्लैंड को उनके घर में हारने का ये एक बेहतरीन मौक़ा है.
अगर भारत इसमें सफल हो पाया तो इसका दूरगामी असर कहीं न कहीं अगले साल इसी समय इंग्लैंड में होने वाले वर्ल्ड कप में देखने को मिल सकता है.
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