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विराट कोहली को गुस्सा क्यों आता है?
- Author, भरत शर्मा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
5 जनवरी से पहले स्पोर्ट टीवी चैनल पर एक विज्ञापन आ रहा था, जिसमें कहा जा रहा था कि हमें 25 साल का बदला लेना है. बदला उन ज़ख़्मों का जो बार-बार सिरीज़ हारने से मिले हैं.
अब वो शायद ना आए. 5 जनवरी को सिरीज़ शुरू हुई और 17 जनवरी को दो मैचों के बाद ये साफ़ हो गया कि 'बदला-वदला' कुछ नहीं होता. हम बात कर रहे हैं दक्षिण अफ्रीका में टेस्ट सिरीज़ खेल रही टीम इंडिया की.
भारतीय टीम 2-0 से सिरीज़ हार चुकी है. दौरा शुरू होने से पहले ये कहा जा रहा था कि अफ़्रीकी सरज़मीं पर टेस्ट सिरीज़ जीतने का ये सुनहरा मौका है क्योंकि टीम के पास ऐसे गेंदबाज़ हैं जो टेस्ट मैच में विरोधी टीम के 20 विकेट ले सकते हैं.
गेंदबाज़ों की कमाई, बल्लेबाज़ों ने गंवाई
आधी बात सच साबित हुई. गेंदबाज़ों ने इस सिरीज़ में अब तक कमाल का प्रदर्शन किया है. न सिर्फ़ टीम को मैच में वापस लाए बल्कि उसे जीतने लायक मैच बनाकर भी दिया लेकिन भारतीय बल्लेबाज़ी ने धोखा दे दिया.
ज़ाहिर है, कप्तान विराट कोहली के लिए भी ये बड़ा झटका है. सेंचुरियन टेस्ट हारने के बाद उन्होंने कहा, ''एक बार फिर गेंदबाज़ों ने अपना काम किया लेकिन बल्लेबाज़ों ने निराश किया और इसलिए हम यहां खड़े हैं.''
इस मैच में भुवनेश्वर कुमार को बाहर बैठाने और पहले मैच में नाकाम साबित होने के बावजूद रोहित शर्मा को मौक़ा देने पर कोहली को सवालों का सामना करना पड़ रहा था.
कोहली को क्यों आया गुस्सा?
लेकिन जब मैच हारने की निराशा के बीच एक बार फिर ये सवाल उनके सामने आया तो वो अपना गुस्सा नहीं रोक पाए. उनसे पूछा गया कि टेस्ट मैच को फॉर्म में निरंतरता चाहिए होती है जबकि आपने जितने मैचों में अब तक कप्तानी की, हर बार टीम बदली.
इस पर कोहली ने गुस्से में कहा, ''हमने 30 में से कितने मैच जीते? 21 मैच जीते, दो हारे.'' सामने से सवाल आया, ''इनमें से कितने मैच आपने भारत में खेले?'' कोहली ने कहा, ''इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता. हम हर बार जीतने की कोशिश करते हैं. मैं यहां आपके सवालों का जवाब देने के लिए आया हूं, लड़ने के लिए नहीं.''
कोहली ने एक और सवाल के जवाब में कहा, ''हमें ये मानकर ही चलना है कि हम बेस्ट हैं. अगर हम ख़ुद पर यक़ीन ना रखते कि यहां आकर सिरीज़ जीत सकते हैं तो फिर यहां आने का फ़ायदा क्या होता. दक्षिण अफ़्रीका, भारत में खेलते हुए कितनी बार मैच जीतने के करीब आई है? गिनकर बता सकते हैं.'' सामने से कहा गया, ''लेकिन वो पिचों की वजह से.''
'हमने कोई शिकायत नहीं की'
कोहली बोले, ''हमने केपटाउन को लेकर भी शिकायत नहीं की थी. हमने पिच को लेकर भी कुछ नहीं किया. दोनों मैचों के जीतने के हमारे पास बराबर मौके थे. मैं अपने सभी खिलाड़ियों को ख़ुद से सवाल करने के लिए कह रहा हूं.''
कोहली का गुस्सा समझा जा सकता है क्योंकि वो ऐसे खिलाड़ी माने जाते हैं जो हर मैच जीतना चाहते हैं. अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश करते हैं. ये उनकी बल्लेबाज़ी, फ़ील्डिंग और कप्तानी में भी दिखता है.
सेंचुरियन टेस्ट में भी सिर्फ़ उनका बल्ला बोला, बाकी ख़ामोश रहे. पहली पारी में कोहली ने 153 रनों की शानदार पारी खेली लेकिन बाकी 10 बल्लेबाज़ों ने मिलकर 142 रन बनाए. दूसरी पारी में बाकी 10 बल्लेबाज़ों ने 141 रन बनाए लेकिन कोहली महज़ 5 रन बनाकर आउट हुए. नतीजा, भारत 135 रनों से मैच हार गया.
गुस्से पर आंकड़े हावी
विराट कोहली को पत्रकारों के सवालों पर झल्लाहट हो सकती है लेकिन वो इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते. वजह कई हैं. आंकड़े भी उनके लिए गवाही नहीं देते. कड़वा सच ये है कि भारतीय टीम अब तक दक्षिण अफ़्रीका में कोई सिरीज़ नहीं जीत सकी है.
पिछले आठ साल के आंकड़े इस हार को और निराशाजनक बनाते हैं. भारतीय टीम में साल 2010-11 में दक्षिण अफ़्रीका का दौरा किया था और सिरीज़ 1-1 से बराबर कराने में कामयाब रही. साल 2013-14 में वहां गई टीम इंडिया 1-0 से सिरीज़ हारी थी.
दूसरे देशों की बात करें तो साल 2011 में उसे इंग्लैंड में 4-0, 2011-12 में ऑस्ट्रेलिया में 4-0, 2013-14 में न्यूज़ीलैंड में 1-0, 2014 में इंग्लैंड में 3-1 और 2014-15 में ऑस्ट्रेलिया में 2-0 से हार का सामना करना पड़ा.
एशिया के बाहर हालत ख़राब
साल 2015 में श्रीलंका टूर से भारतीय टीम ने नौ सिरीज़ जीती लेकिन सेंचुरियन में पासा पलट गया. एशिया के बाहर हार का सिलसिला जारी है. अगर वेस्टइंडीज़ को छोड़ दिया जाए तो भारत ने आठ सिरीज़ एशिया से बाहर खेली हैं और एक भी नहीं जीती.
इस सिरीज़ की बात करें तो सेंचुरियन में कोहली के 153 रन छोड़कर भारत के विशेषज्ञ बल्लेबाज़ों में से कोई भी अर्धशतक नहीं लगा पाया है. शीर्ष छह बल्लेबाज़ों का औसत 20.45 है. 153 रन वाली पारी हटा दी जाए तो ये घटकर 14.08 पर आ जाता है.
इससे पहले किसी दक्षिण अफ़्रीकी टूर पर भारत के शीर्ष छह बल्लेबाज़ों ने इतना ख़राब प्रदर्शन नहीं किया.
1992-93 में ये औसत 24.42 रहा था जबकि साल 2013-14 टूर पर छह बल्लेबाज़ों का औसत 44.78 रहा था और इसमें दो शतक और पांच अर्धशतक शामिल हैं.
रहाणे का रिकॉर्ड क्या कहता है?
कोहली के टीम सेलेक्शन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने अजिंक्ये रहाणे के बजाय दोनों मैचों में रोहित शर्मा को मौका दिया. शर्मा का रिकॉर्ड घर के वनडे मैचों में शानदार है लेकिन बाहर हालत ख़स्ता है.
विदेश में खेले 16 टेस्ट में उनका औसत महज़ 25.35 है जबकि घर में खेले नौ टेस्ट में 85.44. दूसरी ओर दोनों मैचों में बाहर बैठे रहाणे का विदेशी सरज़मीं पर रिकॉर्ड कहीं बेहतर रहा है.
घर में खेले 19 टेस्ट मैचों में उनका बल्लेबाज़ी औसत 33.63 रहा है जबकि विदेशी सरज़मीं पर ये बढ़कर 53.44 का हो जाता है. रहाणे ने घर में तीन तो विदेश में छह टेस्ट शतक लगाए हैं.
लापरवाही भी हार की वजह?
सुनील गावस्कर ने भी भुवनेश्वर कुमार को बाहर बैठाने और रहाणे को मौक़ा न दिया जाने पर सवाल उठाए थे.
लेकिन कोहली की हताशा भी समझी जा सकती है. जैसा कि उन्होंने कहा, हर कप्तान बेस्ट टीम के साथ मैदान में उतरता है और मैच का नतीजा आने के बाद बेस्ट टीम पर सवाल उठना थोड़ा अजीब है.
हार में उनके साथियों का काफ़ी योगदान है. 'नई दीवार' चेतेश्वर पुजारा दोनों पारियों में विकेट रनआउट की भेंट चढ़ा दें, हार्दिक पंड्या पिच पर चहलकदमी करते आउट हों, सलामी बल्लेबाज़ विकेट तोहफ़े में दें तो कप्तान के फ़ैसलों के साथ-साथ टीम की गंभीरता पर सवाल उठने चाहिए.
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