कौन सी सेटिंग की बात कर रहे थे सहवाग?

भारतीय टीम के विस्फ़ोटक बल्लेबाज रहे वीरेंद्र सहवाग ने जब से क्रिकेट का मैदान छोड़ा है, तभी से विवादों ने उनका दामन थाम लिया है.

हाल ही में सहवाग ने भारतीय टीम के कोच पद के लिए आवेदन किया था, हालांकि इस पद पर बाज़ी मारी पूर्व भारतीय खिलाड़ी और टीम इंडिया के मैनेजर रह चुके रवि शास्त्री ने.

अब वीरेंद्र सहवाग ने कहा है कि वे टीम इंडिया के कोच इस वजह से नहीं बन सके, क्योंकि बीसीसीआई में उनकी 'सेटिंग' नहीं थी. एक निजी टीवी चैनल इंडिया टीवी के शो में शामिल होने आए वीरू ने यह बात कही.

इंडिया टीवी के शो में वीरू से पूछा गया कि क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद इतनी जल्दी आपने टीम इंडिया का कोच बनने के बारे में क्यों सोचा?

इसके जवाब में सहवाग ने कहा ''मैने कभी कोच बनने के बारे में नहीं सोचा था, मेरे पास बीसीसीआई के सेक्रेटरी अमिताभ चौधरी और श्रीधर आए थे, उन्होंने मुझे कोच पद के लिए अप्लाई करने की बात कही थी.''

कोच बनने का कभी नहीं सोचा

सहवाग ने बताया कि आवेदन करने से पहले उन्होंने विराट कोहली से भी बात की थी, विराट ने भी जब इसमें सहमति जताई, तभी उन्होंने अप्लाई किया.

फिर सहवाग से पूछा गया कि जब बीसीसीआई के बड़े अधिकारी और टीम का कप्तान आपको कोच बनाना चाह रहे थे फिर आप कोच बने क्यों नहीं?

इसके जवाब में सहवाग ने हंसते हुए कहा कि उनकी कोई बड़ी सेटिंग नहीं थी इसलिए वे कोच नहीं बन सके.

इसके तुरंत बाद सहवाग ने अपनी बात पूरी करते हुए कहा, ''मै ऐसा बिलकुल नहीं कहूंगा कि रवि शास्त्री की कोई सेटिंग थी, बीसीसीआई ने एक बेहतर निर्णय लिया है.''

सहवाग ने कहा, ''कोच चुनने वाले पैनल में सभी मेरे दोस्त हैं, इस पद के लिए 10 लोगों ने आवेदन किया था, और पैनल को उन सभी में रवि शास्त्री सबसे बेहतर लगे.''

क्या दो लाइन लिखकर किया था अप्लाई?

वीरेंद्र सहवाग ने जब टीम इंडिया के कोच पद के लिए आवेदन किया था तब मीडिया में ऐसी खबरें आई थी कि उन्होंने सिर्फ दो लाइन लिखकर इस पद के लिए अप्लाई किया है.

सहवाग ने इस बात को मीडिया द्वारा फैलाई गई झूठी ख़बर बताया, उन्होंने कहा, ''किसी मीडिया हाउस ने यह नहीं दिखाया कि मैने 8-10 पेजों की प्रेजेंटेशन बनाई थी.'' उन्होंने मज़ाक में कहा, ''क्या मेरा करियर सिर्फ दो लाइन में सिमट जाने लायक है.''

रवि शास्त्री ने कहा था दोबारा ग़लती नहीं करूंगा

रवि शास्त्री के कोच बनने के सवाल पर सहवाग ने कहा कि अगर उन्हें पता होता कि रवि शास्त्री भी इस पद के लिए अप्लाई कर रहे हैं तो शायद मेरे आवेदन करने की नौबत ही न आती.

सहवाग ने बताया, ''मैने एक बार रवि शास्त्री से इस मसले पर बात की थी, तब शास्त्री ने कहा था कि मै एक बार यह ग़लती कर चुका हूं दोबारा ग़लती नहीं करूंगा.''

ट्विटर के बोल बच्चन हैं सहवाग

क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद से ही सहवाग ट्विटर पर जबरदस्त तरीके से एक्टिव हो गए. अपने हंसी-मज़ाक और शरारती ट्वीट्स की वजह से वे हमेशा सुर्खियों में बने रहते हैं.

हालांकि कुछ मौकों पर अपने ट्वीट्स की वजह से उन्हें आलोचनाएं भी झेलनी पड़ी. इसी सिलसिले में एक मामला डीयू की छात्रा गुरमेहर कौर से जुड़ा हुआ था.

करगिल युद्ध के दौरान मारे गए कैप्टन मनदीप सिंह की बेटी गुरमेहर कौर ने अपनी एक तस्वीर शेयर की थी, जिसमें वे प्लेकार्ड लिए खड़ी थी जिसका संदेश था कि ''मेरे पिता को पाकिस्तान ने नहीं मारा बल्कि युद्ध ने मारा.'' यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी.

इसके बाद सहवाग ने भी एक प्लेकार्ड पकड़कर अपनी तस्वीर ट्वीट की थी जिसपर लिखा था ''दो तिहरे शतक मैंने नहीं बनाए. मेरे बल्ले ने बनाए.'' सहवाग को अपने इस ट्वीट के बाद काफ़ी आलोचना झेलनी पड़ी थी. अंत में सहवाग को इस मामले में अपनी तरफ से सफ़ाई देने वाला ट्वीट करना पड़ा था.

धोनी के साथ मतभेद की ख़बरें

वीरेंद्र सहवाग और टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के बीच मतभेद की ख़बरें भी मीडिया में खूब चलती रहीं. महेंद्र सिंह धोनी ने कप्तान बनने के बाद टीम में रोटेशन पॉलिसी और फ़िटनेस के मुद्दे उठाए थे, जिसके चलते कई सीनियर खिलाड़ियों को टीम से बाहर भी होना पड़ा था.

विश्व कप 2011 जीतने के बाद सहवाग ने एक कार्यक्रम ने कहा था कि, सिर्फ महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी के कारण ही भारत ने विश्व कप क्रिकेट नहीं जीता. उन्होंने कहा था कि, "धोनी को एक मज़बूत टीम मिली थी. जब आपको एक मज़बूत टीम मिलती है, आपके लिए अच्छा प्रदर्शन करना आसान हो जाता है.''

हालांकि महेंद्र सिंह धोनी के साथ किसी भी तरह के मतभेद को सहवाग हमेशा ही नकारते रहे हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)