महिला क्रिकेट टीम का अगला मिशन वर्ल्ड कप

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- Author, राखी शर्मा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मई में चार देशों का टूर्नामेंट जीतने के बाद अब भारतीय महिला टीम तैयार है इंग्लैंड में 24 जून से शुरू हो रहे वर्ल्ड कप के लिए.
उसे सबसे ज़्यादा उम्मीदें हैं 19 साल की दीप्ति शर्मा और पूनम राउत से. भारत का पहला मैच डर्बी में मेज़बान इंग्लैंड के ख़िलाफ़ है.
मई में दक्षिण अफ्रीका में हुए चार देशों के टूर्नामेंट में भारत ने फ़ाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराया था.
इस टूर्नामेंट में भारत और मेज़बान देश के अलावा ज़िम्बाब्वे और आयरलैंड ने हिस्सा लिया.

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उसी टूर्नामेंट में दीप्ति शर्मा और पूनम राउत ने आयरलैंड के ख़िलाफ़ पहले विकेट के लिए 320 रन जोड़े थे जोकि वर्ल्ड रिकॉर्ड है.
दीप्ति ने 188 की पारी खेली और पूनम 109 रन पर रिटायर हर्ट हुईं.
तब बीबीसी से ख़ास बात करते हुए दीप्ति शर्मा ने कहा था, "मेरे जैसे यंगस्टर इन दिनों अच्छा परफॉर्म कर रहे हैं. अगर हम ऐसे ही उपलब्धियां हासिल करते रहेंगे तो हमारा कॉन्फिडेंस हाई रहेगा. इस कॉन्फिडेंस को हम आने वाले वर्ल्ड कप में भी जारी रखेंगे."
दीप्ति कहती हैं कि खिलाड़ियों का जल्दी-जल्दी रिकॉर्डबुक में आना भारतीय महिला क्रिकेट के लिए अच्छा है.

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वहीं पूनम राउत ने भी आयरलैंड के खिलाफ रिकॉर्ड पार्टनरशिप के दौरान अपना पहला वनडे शतक लगाया था.
109 रन की पारी खेलकर पूनम चोट की वजह से नहीं, बल्कि दूसरे बल्लेबाज़ों को मौका देने के लिए पवेलियन लौटीं थीं.
उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ फ़ाइनल में भी 70 रन बनाए.
उनका भी मानना है कि उनके और दीप्ति जैसे खिलाड़ियों के उभरने से मिताली राज जैसी सीनियर खिलाड़ियों पर दबाव कम हुआ है.
वो कहती हैं, "पहले मिताली पर सबकी उम्मीदें रहती थीं. वो बहुत बड़ी खिलाड़ी हैं और बहुत सालों तक उन्होंने भारत के बल्लेबाज़ी ऑर्डर को संभाला है. लेकिन अब बहुत सी ऊर्जावान लड़कियां टीम में हैं."

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उनके अनुसार, "बीसीसीआई भी अब हमारा ज़्यादा ध्यान रख रही है. हमें ग्रेडिंग सिस्टम में शामिल कर लिया गया है. इससे लड़कियों को मोटिवेशन मिलता है. अब हमारा ध्यान विश्व कप पर है."
क्रिकेट में काफ़ी सालों तक ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की टीमों का दबदबा रहा. मेन्स क्रिकेट में भारतीय टीम इसे तोड़ने में क़ामयाब रही है.
लेकिन भारतीय महिलाओं की क्या स्थिति है इस बारे में पूनम कहती हैं, "ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीमें डॉमिनेट कर रही हैं लेकिन इंडिया भी ज़्यादा पीछे नहीं. टीम में काफ़ी सुधार आया है. बस हमें प्लानिंग को लागू करने की ज़रूरत है. इसके बिना आप बड़े गेम नहीं जीत सकते."

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पूनम और दीप्ति दोनों ही भारत की टॉप फ़ील्डर्स में गिनी जाती हैं. दीप्ति कहती हैं कि अब वो दौर जा चुका है जब भारतीय फ़ील्डर डाइव या स्किड करने से हिचकती थीं.
वो कहती हैं, "आजकल तो गर्ल्स खुद बोलती हैं कि मुझे भी डाइव सीखनी है या स्लाइड सीखनी है. अब ऐसा नहीं रह गया है कि लड़कियां डरती हैं. अब वो पूरी कोशिश करती हैं."
वहीं पूनम कहती हैं, "जब आप मैदान पर उतरते हैं तो चोट भूल जाते हैं. फिर आपको या तो रन रोकने हैं या विकेट निकालना है. उसके लिए चाहे जो भी करना पड़े. कोच तुषार अरोटे टीम पर बहुत मेहनत कर रहे हैं."
ये पूछने पर कि टीम में सबसे बढ़िया डाइव कौन लगाता है, पूनम कहती हैं, "मिताली राज, वेदा कृष्णामूर्ति, दीप्ति.. लगभग सभी खिलाड़ी अच्छी फील्डिंग करती हैं. टीम में काफ़ी यंगस्टर्स हैं तो फ़ील्ड पर काफ़ी अच्छी एनर्जी रहती है."

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युवा खिलाड़ियों से भरी भारतीय महिला टीम मैदान पर जीतने के अलावा मस्ती और मज़ाक भी जमकर करती हैं.
दीप्ति बताती हैं, "टीम में लड़कियां एक दूसरे की मिमिक्री करती हैं. पर मैं नहीं, मुझे मिमिक्री करना अच्छा नहीं लगता."
क्या उन्हें फ़िल्में देखना पसंद है. दीप्ति ने बताया, "मुझे मूवी देखना बिलकुल भी पसंद नहीं है. मुझे गाने सुनना और बैडमिंटन खेलना पसंद है."
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