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निगाहें थीं भारत पाक मैच पर, लेकिन मोदी ने की प्रणीत की तारीफ़
अभी छह हफ्ते पहले ही प्रणीत ने सिंगापुर ओपन सुपर सिरीज जीता था.
इस बार उन्होंने थाईलैंड ओपन में 1,20,000 डॉलर की इनामी राशि वाला ग्रैंड प्रिक्स गोल्ड अपने नाम कर लिया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से शाम के 6 बजकर 24 मिनट पर इस उपलब्धि के लिए जिस बी साईं प्रणीत को बधाई दी गई है, वो अभी महज 24 साल के हैं.
प्रणीत की उपलब्धियों का ये सिलसिला 2013 में ही शुरू हो गया था जब उन्होंने मलेशियाई खिलाड़ी और 2003 के ऑल इंग्लैंड चैंपियन मोहम्मद हाफिज़ हाशिम को थाईलैंड ओपन ग्रांड प्रिक्स गोल्ड टूर्नामेंट के पहले ही दौर में शिकस्त दी.
प्रणीत के बैडमिंटन करियर के लिए 2013 बहुत खास रहा था.
इंडोनेशिया ओपन
इसी बरस प्रणीत ने इंडोनेशिया ओपन में इंडोनेशियाई सुपरस्टार खिलाड़ी तौफीक हिदायत को उनके फेयरवेल गेम में बुरी तरह मात दी थी.
2016 में ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप में प्रणीत ने ओलंपिक में दो बार सिल्वर मेडल जीतने वाले मलेशियाई खिलाड़ी ली चोंग वेई को पहले ही राउंड में हराया.
हालांकि चौंका देने वाली प्रतिभा के बावजूद खिताबी जीत प्रणीत से फासले पर ही रही.
लेकिन 2016 के मई में तेलंगाना के इस तेलुगू बिड्डा ने कनाडा ओपन में अपना पहला ग्रांड प्रिक्स ख़िताब जीता.
फाइनल में उन्होंने कोरियाई खिलाड़ी ली ह्यून-इल को करारी मात दी. प्रणीत के बारे में और भी कई दिलचस्प बातें हैं जो कम ही लोग जानते हैं.
ख़ास बातें
- साल 2005 में जब गोपीचंद अपनी कोचिंग अकादमी शुरू कर रहे थे तो प्रणीत उनके पहले बैच के शागिर्द बने थे.
- 2010 के बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन जूनियर वर्ल्ड कप में उन्होंने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था. यूथ ओलंपिक में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व भी किया है.
- हैदराबाद के इस शटलर ने इंटरनेशनल बैडमिंटन सर्किल में कई दिग्गज खिलाड़ियों को कोर्ट में अपने परफॉर्मेंसे से चौंकाया है.
- उनकी सबसे बड़ी समस्या फिटनेस को लेकर रही है. कई बार चोटिल होने की वजह से वे टूर्नामेंट के शुरुआती दौर से बाहर होते रहे हैं.
- 16 महीने बैडमिंटन कोर्ट से बाहर रहने के बावजूद 2015 में श्रीलंका, लागोस और बहरीन की इंटरनेशनल सिरीज में उन्होंने शानदार वापसी की.
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