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रवि शास्त्री में नहीं थी प्रतिभा: कपिल देव
भारत के पूर्व कप्तान कपिल देव ने कहा है कि रवि शास्त्री में क्रिकेटीय प्रतिभा नहीं थी, लेकिन जीतने की दृढ़ इच्छा शक्ति की वजह से वो लंबे समय तक भारतीय टीम में बने रहने में कामयाब रहे.
1983 में जिस भारतीय टीम ने पहला क्रिकेट विश्व कप जीता था, कपिल देव उसके कप्तान थे और रवि शास्त्री टीम के सदस्य थे.
क्रिकेटर आकाश चोपड़ा की किताब 'नंबर्स डू लाइज़' के विमोचन समारोह में कपिल देव ने कहा, "रवि शास्त्री जैसा कोई खिलाड़ी जिसमें कोई प्रतिभा नहीं हो और वो इतने लंबे समय तक क्रिकेट खेलता है, मैं समझता हूँ कि यही उसकी उपलब्धि है."
कपिल ने कहा, "क्रिकेटर दो तरह के होते हैं, एक वो जिनमें क्षमता होती है, लेकिन वो कम खेल पाते हैं, दूसरे वो जिनमें योग्यता नहीं होती और वो ज़्यादा खेलते हैं."
रवि शास्त्री की दृढ़ इच्छा शक्ति की तारीफ़ करते हुए कपिल ने कहा, "रवि शास्त्री की इच्छा शक्ति कमाल की थी. टीम में हम इस चीज़ की कद्र करते हैं. हम कहा करते थे कि रवि 30 ओवर तक खेलो, भले ही रन सिर्फ़ 10 बनाओ, कोई बात नहीं. तुम्हारा 30 ओवर खेलना अच्छा होगा क्योंकि बाद में जब गेंद ढीली हो जाएगी तो हम तेज़ गेंदबाज़ों को निशाना बना सकते थे."
कपिलदेव ने कहा कि वो ये बात रवि शास्त्री के सामने भी कह सकते हैं कि वो नहीं समझते कि वो (शास्त्री) प्रतिभाशाली हैं. वो उनकी (शास्त्री की) प्रशंसा इसलिए करते हैं कि वो सर्वश्रेष्ठ एथलीटों में से एक हैं.
कपिल ने प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा, "मेरे ख़्याल से मेरे 30-40 साल के क्रिकेट जीवन में मैंने लक्ष्मण शिवरामाकृष्णन से बेहतर प्रतिभावान क्रिकेटर नहीं देखा, लेकिन वो 10 टेस्ट मैच भी नहीं खेल सके."
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