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जिसकी फ़िरकी के सामने ढेर हो गई टीम इंडिया
क्रिकेट के खेल की ख़ूबी यही है कि एक मुक़ाबला किसी को सुपरस्टार बना सकता है. बस आपको उस मुक़ाबले पर ऐसा असर छोड़ना है जैसा कि पुणे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया की ओर से स्टीव ओकैफ़ी का रहा.
पुणे टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने 13.1 ओवर में 35 रन देकर छह विकेट चटकाए, जबकि दूसरी पारी में 15 ओवर की गेंदबाज़ी में 35 रन पर छह विकेट. पूरे टेस्ट में 12 विकेट.
अब तक के पांच टेस्ट के करियर में स्टीव ओकैफ़ी ने पहले चार टेस्ट में 14 विकेट लिए थे, और पुणे टेस्ट में 12 विकेट.
यही वजह है कि 32 साल के इस आर्थोडॉक्स लेफ्टी स्पिनर का नाम शायद ही किसी ने सुन रखा था. यहां तक कि भारत दौरे के लिए जब उन्हें टीम में चुना गया तो शेन वॉर्न जैसे जीनियस ने उनके चयन पर सवाल उठाए थे.
उनकी गेंदबाज़ी में भी कोई ख़ास बात नहीं दिखी थी. पुणे टेस्ट से पहले उन्हें जिन चार टेस्ट मैचों में खेलने का मौका मिला था, वो अलग-अलग सिरीज़ के मैच थे.
एक दुबई में, एक सिडनी में, एक पलेकल में और एक सिडनी में. ऐसे में स्टीव ओकैफ़ी के लिए ये सिरीज़ एक तरह से आख़िरी मौका साबित होने वाला था और इस मौके को स्टीव ने अपने हाथ से जाने नहीं दिया.
श्रीलंका के ख़िलाफ़ सिरीज़ के दौरान बीते साल उन्हें बीच दौरे से ही वापस भेज दिया गया था, वे इतने निराश थे कि सिडनी में एक होटल में शराब के नशे में अभद्रता बर्ताव करने के चलते क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को उनपर जुर्माना भी लगाना पड़ा था.
लेकिन पुणे टेस्ट उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. उन्होंने जिस अंदाज़ में भारतीय बल्लेबाज़ों को आउट किया, उसमें भारत के पूर्व क्रिकेटर श्रीधरन श्रीराम की भूमिका भी अहम है.
दूसरी दिन के लंच के समय में श्रीराम के बताए टिप्स के बाद भी ओकैफ़ी की फ़िरकी का जवाब भारतीय बल्लेबाज़ नहीं तलाश पाए.
वैसे स्टीव ओकैफ़ी वैसे क्रिकेटर हैं जिनका जन्म मलेशिया में हुआ था, उनके पिता रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स में तैनात थे और जब स्टीव का जन्म हुआ तब वे मलेशिया में तैनात थे. मां नर्स का काम करती थीं.
बचपन से ही स्टीव की दिलचस्पी क्रिकेट में थी, लेकिन जूनियर क्रिकेटर में वे उस वक्त मिडियम फास्ट गेंदबाज़ी किया करते थे.
15 साल की उम्र में उन्होंने अपने कोच की सलाह पर स्पिन गेंदबाज़ी पर ध्यान देना तय किया. कोच के मुताबिक स्टीव के पास दिमाग तो तेज़ गेंदबाज़ों वाला था, लेकिन शरीर एक स्पिनर वाला.
18 साल की उम्र तक पहुंचने के बाद स्टीव ओकैफ़ी को न्यू साउथ वेल्स की मज़बूत टीम में जगह मिल गई. ऑस्ट्रेलिया के घरेलू क्रिकेट में उनकी पहचान ठीक ठाक गेंदबाज़ की बन गई थी, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम में जगह पाने में उन्हें 10 साल तक मेहनत करनी पड़ी.
उन्हें पहली बार दुबई में 2014 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ टेस्ट मैच में खेलने का मौका मिला. उन्हें ऑस्ट्रेलिया की ओर से बैगी ग्रीन टेस्ट कैप ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर डीन जोंस ने दिया था.
डीन जोंस, स्टीव ओकैफ़ी के बचपन से ही रोल मॉडल रहे है, चाहे वह क्रिकेट का बैट हो, या फिर टीशर्ट् पहनने का अंदाज़. स्टीव डीन जोंस को फ़ॉलो करते रहे.
पुणे टेस्ट में स्टीव ओकैफ़ी ने जिस अंदाज़ में 12 विकेट लिए, डीन जोंस ने भी ट्वीट करके उन्हें बधाई दी.
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