ख़ुद को सुच्चा साबित करने की चुनौती

सुच्चा सिंह छोटेपुर

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    • Author, नितिन श्रीवास्तव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

आम आदमी पार्टी की वेबसाइट पर सुच्चा सिंह छोटेपुर को 'आम लोगों का नेता' बताया गया है.

आप की वेबसाइट के मुताबिक़ 'सुच्चा सिंह को तमाम राजनेताओं ने अपनी कैबिनेट में शामिल होने का न्योता दिया, लेकिन सुच्चा ने अपने निजी नहीं बल्कि पंजाबियों के हितों को ज़्यादा तरजीह दी.'

फ़िलहाल, पंजाब के आम आम आदमी पार्टी प्रमुख सुच्चा सिंह छोटेपुर पर पार्टी से बर्खास्त किए जाने का ख़तरा मंडरा रहा है.

सुच्चा सिंह पर टिकट वितरण के एवज़ में पैसे लेने के कथित आरोप हैं जिसका एक कथित वीडियो भी बन चुका है.

शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुच्चा सिंह ने कहा, "पंजाब में आप पार्टी को खड़ा करने में मैंने बहुत मेहनत की है. मैं पार्टी के फ़ैसलों की इज़्ज़त करता हूँ."

कुछ ख़बरों के अनुसार सुच्चा ने 'पैसे लेने की बात से इनकार नहीं किया है' लेकिन कथित तौर से सफ़ाई दी है कि 'ये पैसे पार्टी फंड के लिए थे.'

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अरिवंद केजरीवाल समेत आप पार्टी के बड़े नेता जल्द ही सुच्चा सिंह पर एक फ़ैसला ले सकते हैं.

अगर ये फ़ैसला विपरीत होता है तो इसका मतलब एक ऐसे राजनीतिक सफ़र पर 'झटका लगना' बताया जाएगा जिसने सुच्चा को तमाम दलों से गुज़रकर यहाँ पहुँचते देखा था.

कांग्रेस पार्टी और अकाली दल में रह चुके सुच्चा सिंह छोटेपुर को अपने स्वतंत्र विचारों के लिए जाना जाता रहा है.

हालांकि उनके आलोचकों ने उनके कई दफ़ा पार्टी बदलने की निंदा की है, लेकिन दबे स्वर में ये भी स्वीकार किया है कि सुच्चा की छवि पाक-साफ़ ही रही है.

65 साल के सुच्चा सिंह को ख़ुद अरविन्द केजरीवाल ने क़रीब दो वर्ष पहले पंजाब में आम आदमी पार्टी के एक प्रमुख नेता के तौर पर उतारा था.

पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला की सरकार में मंत्री रह चुके सुच्चा सिंह को एक ज़माने में संत हरचंद सिंह लोंगोवाल और गुरचरण सिंह तोहड़ा का क़रीबी बताया जाता था.

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पंजाब में कांग्रेस पार्टी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से भी सुच्चा सिंह के सम्बन्ध 'अच्छे' बताए जाते हैं और अमरिंदर ने कुछ दिन पहले ही सुच्चा सिंह को 'बेदाग़ राजनीतिक करियर' वाला नेता कहा था.

अख़बारों में छपने वाली ख़बरों के अनुसार सुच्चा सिंह छोटेपुर के क़रीबी मानते हैं कि 'वे एक षड्यंत्र का शकार हो रहे हैं' जबकि विपक्षी बताते हैं कि 'उनकी केजरीवाल से ज़्यादा बन नहीं रही थी'.

हक़ीक़त यही है कि सुच्चा सिंह छोटेपुर मामले के रूप में आम आदमी पार्टी के सामने पंजाब चुनाव से पहले ही बड़ी कश्मकश आ खड़ी हुई है.