'मुझे भी लंबी पैटरनिटी लीव दें, मेनका जी'

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- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
बीबीसी दफ़्तर में 22 जनवरी, 2010 को मुझे नाइट शिफ्ट करनी थी जो रात 10 बजे शुरू होनी थी.
बाहर कोहरा इतना घना था कि गाड़ी सड़क पर रेंग रही थी और हम बहुत ही मुश्किल से रात दो बजे दफ्तर पहुंचे.
मेरे बच्चे की पैदाइश क़रीब थी इसलिए सुबह मुझे बीवी को चेकअप के लिए ले जाना था.
उसके बाद हम चार दिन अस्पताल में ही रहे, क्योंकि मेरी बेटी का जन्म बताए गए समय से काफी पहले हो गया.
इसीलिए मैं उस रात के बाद, अगले दिन की नाइट शिफ्ट करने नहीं जा सका. दफ्तर से पता चला कि नए बने पिता को एक हफ़्ते की पैटरनिटी लीव मिलती है.
बीवी को मिलने वाली तीन महीने या 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव का पहले से पता था.

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लौटते हैं 24 अगस्त, 2016 को, यानी आज सुबह. अपनी छह साल की बेटी को नाश्ते में ब्रेड-चीज़ सैंडविच बना कर दिया था और उसके स्कूल बैग में पेन्सिल बॉक्स की पेंसिलों को रोज़ की तरह चेक कर रहा था.
लेकिन एक नज़र घडी पर थी क्योंकि स्कूल बस का समय क़रीब था. दूसरी नज़र मोबाइल में टैक्सी ऐप पर थी क्योंकि बीवी के दफ्तर जाने के लिए टैक्सी बुक करनी थी.
इन दिनों बीवी ने ख़ुद कार चलाना कम कर दिया है क्योंकि हम दोनों अपने दूसरे बच्चे के इंतज़ार में हैं.
तभी नज़र पड़ी इंडियन एक्सप्रेस अखबार पर.
तब से महिला और बाल कल्याण मंत्री मेनका गाँधी का एक बयान दिल को कचोट रहा है.
"पुरुषों या नवजात के पिता को बच्चे की देखरेख की छुट्टी देने में मुझे ख़ुशी होगी, लेकिन उनके लिए वो सिर्फ एक छुट्टी( हॉलिडे) होगी."
मेनका गाँधी को पिछले कुछ दिनों में खासी 'शाबाशी' मिली है क्योंकि उनके मंत्रालय और केंद्र में भाजपा सरकार ने भारत के संगठित क्षेत्र में मैटरनिटी लीव को 12 हफ़्ते से बढ़ाकर 26 हफ़्ते कर दिया है और इसके लिए क़ानून बनाया है.

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हम मियाँ-बीवी पिछले कुछ हफ़्तों से इस खबर की ख़ुशी में कई दफ़ा बाहर खाना भी खा चुके हैं! दोनों को लगता है कि ये बेहतरीन फ़ैसला है.
2010 में बेटी के जन्म के बाद, तीन महीने की मैटरनिटी लीव ख़त्म होने पर मेरी बीवी ने तीन महीने बिना तनख्वाह की छुट्टी ली थी.
उसके बाद, हम दोनों की बारी-बारी से कोशिश रही है कि बेटी को ज़्यादा से ज़्यादा समय दें.
मेनका जी, मैं अपनी बेटी या होने वाली औलाद के प्रति कम ज़िम्मेदार नहीं हूँ.
और ये ज़िम्मेदारी मैं अपने हक़ के चलते लेता हूँ.
बेटी के स्कूल या डे-केयर में छुट्टी होने पर बीवी जितनी छुट्टी लेती है, मैं उससे कम नहीं लेता.

अब बेटी 6 साल की हो चुकी है और हम तीनों घर में चौथे सदस्य का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं.
आपने, मेनका जी, हमें इस बात की बड़ी ख़ुशी दी है कि बीवी को छह महीने की मैटरनिटी लीव मिलेगी.
लेकिन आपके इस बयान से हमें बड़ा धक्का भी लगा कि 'बतौर बाप बच्चे की ज़िम्मेदारी के नाम पर मैं छुट्टी मना सकता हूँ'.
आपके ज़माने में कौन सा पिता अपने बच्चों के लिए कितना ज़्यादा या कम करता था, हमें पता नहीं.
लेकिन बतौर पिता मुझे अपने बच्चे को सुलाने, नहलाने और खिलाने के लिए सिर्फ़ एक हफ़्ते की छुट्टी देना थोड़ा नहीं, बहुत कम लगता है.
आप पैटरनिटी लीव अभी बढ़ा नहीं सकतीं तो कोई बात नहीं, लेकिन हमें ठेस तो न पहुंचाएं.












