पाकिस्तान में इमरान ख़ान की सरकार गिरने के बाद 'चौकीदार चोर है' के नारे क्यों लगे? #Social

इमरान ख़ान और क़मर अहमद बाज़वा

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भारत में 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान गूंजने वाला नारा, अब पाकिस्तान में गूंज रहा है.

ये नारा है- चौकीदार चोर है!

इमरान ख़ान के सत्ता खोने के बाद उनके समर्थक सक्रिय हैं. सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक, इमरान की पार्टी पीटीआई के समर्थक और कुछ पाकिस्तानी अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.

रविवार देर रात को इमरान के समर्थकों ने पाकिस्तान के कई शहरों में प्रदर्शन किए. इन प्रदर्शनों के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं.

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इन वीडियो में ये सुनाई देता है कि भीड़ 'चौकीदार चोर है' के नारे लगा रही है. वीडियो में नारे लगाते इन लोगों के अलावा कुछ पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर भी 'चौकीदार चोर है' लिख रहे हैं.

आगे पढ़िए कि ये लोग 'चौकीदार चोर है' के नारे लगाकर किस ओर इशारा कर रहे हैं और क्या कुछ लिख रहे हैं?

बाजवा

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चौकीदार चोर है: किस ओर इशारा?

इमरान की सरकार के मंत्री रह चुके शेख राशिद अहमद रविवार को रावलपिंडी में एक ऐसे ही जमावड़े को संबोधित कर रहे थे. शेख राशिद ने कहा था, ''अगर इस मुल्क को बचाना है तो रात के अंधेरे में फैसले नहीं करने हैं, दिन की रौशनी में फैसले करने हैं.''

उनके इतना कहते ही भीड़ कई बार नारे लगाती है- चौकीदार चोर है...

इस पर शेख राशिद भीड़ से कहते हैं, ''ऐसे नारे ना लगाओ. लाल हवेली का ये इतिहास नहीं रहा है. हम लड़ेंगे, अमन से. 29 तारीख को ईद हो जाएगी. आप तैयारी पकड़ें. हर रोज़ लाल हवेली से 'जेल भरो' चलाएंगे.''

लाल हवेली रावलपिंडी का एक इलाक़ा है, जिसका नाम वहां सालों पहले बनी एक लाल हवेली के नाम पर पड़ा है. डॉन न्यूज़ की ख़बर के मुताबिक़, इस हवेली का निर्माण क़रीब 100 साल पहले धनराज सहगल ने सियालकोट की एक नृत्य करने वाली मुस्लिम महिला बुद्धन बाई के लिए करवाया था.

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जब 'चौकीदार चोर है' के नारे लाल हवेली से लगे तो सोशल मीडिया पर ये वीडियो वायरल होने लगा.

ट्विटर पर यूज़र @Starscream2005 ने लिखा, ''किसने सोचा था कि रावलपिंडी के गढ़ में 'चौकीदार चोर है' के नारे लगेंगे. अच्छा खेले लड़कों!''

राबिया मलिक लिखती हैं, ''पूरा मुल्क़ एक साथ आवाज़ लगाए- चौकीदार चोर है''

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इमरान ख़ान

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यासीन सानी लिखते हैं, ''पूरा रावलपिंडी कह रहा है- चौकीदार चोर है.''

मोहम्मद जावेद ने लिखा, ''पाकिस्तान की राजनीति में 'चौकीदार चोर है' नारे ने जगह बनाई. ये नारा सबसे पहले राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी पर हमला बोलने के लिए इस्तेमाल किया गया था. पाकिस्तान में आवाम ये नारे लगाकर आर्मी की ओर इशारा कर रही है और उन्हें चोर कह रही है.''

इसके अलावा भी कई लोग हैं, जो पाकिस्तान में हुए सियासी फेरबदल के लिए पाकिस्तानी फौज को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. हालांकि इमरान के समर्थकों की ओर से ये इशारा किया जा रहा है कि पाकिस्तानी फ़ौज को किसी तरह से दोष ना दिया जाए या किसी तरह का कनेक्शन ना खोजा जाए.

इमरान ख़ान के सलाहकार रहे डॉ शाहबाज़ गिल ट्वीटर पर अपने दिए एक बयान को री-ट्वीट करते हैं.

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इस ट्वीट में लिखा है कि शाहबाज गिल की पीटीआई समर्थकों से अपील, ''सरकारी संपत्ति को नुकसान ना पहुंचाया जाए. पाकिस्तानी आर्मी के बारे में कुछ गलत ना कहें. क्योंकि यही हमारे दुश्मन चाहते हैं. यही फर्क है पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) और हम में.''

पाकिस्तान में ट्विटर पर 'सरेंडर बाजवा' भी ट्रेंड कर रहा है. इस हैशटैग के साथ काफी लोग पाकिस्तानी के आर्मी चीफ़ क़मर जावेद बाजवा को मुल्क़ में हुए सियासी फेरबदल के लिए ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं और अमेरिका की कठपुतली बनने का आरोप लगा रहे हैं.

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नरेंद्र मोदी

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'चौकीदार चोर है' का इंडिया कनेक्शन

2019 लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी को घेरने के लिए चुनावी अभियान चलाया था. इस अभियान में राहुल गांधी अपनी चुनावी रैलियों और सोशल मीडिया पर 'चौकीदार चोर है' का इस्तेमाल करते थे.

ज़ाहिर है कि इस नारे में राहुल नरेंद्र मोदी को चौकीदार कह रहे थे. हालांकि इस नारे पर घिरने की बजाय नरेंद्र मोदी और बीजेपी ने इसे अपने पक्ष में ही इस्तेमाल किया और मोदी समेत ज़्यादातर बीजेपी नेताओं, समर्थकों ने अपने ट्विटर नाम के आगे 'चौकीदार' शब्द जोड़ लिया था और इसे 'मैं भी चौकीदार' अभियान में बदल लिया था.

मार्च 2019 में नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा था, ''आपका चौकीदार देश की सेवा के लिए खड़ा है और मैं अकेला नहीं हूं. हर वो इंसान जो भ्रष्टाचार, समाजिक बुराइयों से लड़ रहा है वो चौकीदार है. हर इंसान जो देश की उन्नति के लिए मेहनत कर रहा है वो चौकीदार है. आज हर भारतीय कह रहा है कि वो चौकीदार है.''

2019 चुनावों में मिली जीत के बाद नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर अपने नाम से 'चौकीदार' शब्द हटाने के बाद लिखा था, ''अब वक़्त आ गया है कि चौकीदार की भावना को आगे ले जाया जाए. इस भावना को हमेशा बनाए रखिए और भारत की उन्नति के लिए लगातार काम करते रहिए. मेरे ट्विटर नाम से चौकीदार शब्द हट रहा है पर ये मेरे भीतर हमेशा रहेगा. आप सबसे भी यही उम्मीद है.''

दरअसल 2019 चुनावी प्रचार में रफाल मामले को लेकर राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर नरेंद्र मोदी के लिए 'चौकीदार चोर है' का इस्तेमाल किया था.

इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी की ओर से अवमानना याचिका दाखिल की गई थी. सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि राहुल गांधी अपनी टिप्पणी में ग़लत हवाला दे रहे हैं.

जिसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल शपथ पत्र में कहा था, ''मेरा बयान सियासी प्रचार की गर्मा-गर्मी में दिया गया था. इसे मेरे विरोधियों ने ग़लत ढंग से पेश करके जान-बूझकर ऐसा जताया कि मैंने ये कहा हो कि अदालत ने कहा है कि चौकीदार चोर है. ऐसी सोच तो मेरी दूर-दूर तक नहीं थी, ये भी साफ़ है कि कोई भी अदालत ऐसा कुछ कभी नहीं कहेगी, इसलिए इस दुर्भाग्यपूर्ण संदर्भ (जिसके लिए मैं खेद व्यक्त करता हूँ) को ये न समझा जाए कि अदालत को दिया हुआ कोई निष्कर्ष या टिप्पणी है."

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