मोदी सरकार के नए स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया अंग्रेज़ी के कारण हुए ट्रोल

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नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल से बुधवार को रविशंकर प्रसाद, डॉ हर्षवर्धन और प्रकाश जावडेकर जैसे वरिष्ठ मंत्रियों का इस्तीफ़ा हुआ.
दूसरी तरफ़, ज्योतिरादित्य सिंधिया और अनुराग ठाकुर जैसे अपेक्षाकृत युवाओं को कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया गया.
मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार प्रत्याशित था लेकिन जिन लोगों को हटाया गया वो अप्रत्याशित रहा. प्रधानमंत्री मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार और कई वरिष्ठ मंत्रियों से इस्तीफ़ा लेने के फ़ैसले को अलग-अलग नज़रिए से देखा जा रहा है.
डॉ हर्षवर्धन को अटल बिहारी वाजपेयी स्वास्थ्यवर्धन कहा करते थे लेकिन पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल में उन्हें चलता कर दिया गया. उनकी जगह पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात के मनसुख मंडाविया ने ली है. मनसुख मंडाविया भारत के नए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री बनाए गए हैं.
49 वर्षीय मंडाविया गुजरात से राज्यसभा सांसद हैं. मंडाविया के स्वास्थ्य मंत्री बनते ही गूगल पर उनके परिवार, निर्वाचन क्षेत्र, शिक्षा और बायोडेटा की खोज शुरू हो गई. कुछ गड़े मुर्दे भी उखाड़े गए और लोगों ने पुराने ट्वीट में अंग्रेज़ी को लेकर मज़ाक बनाना शुरू कर दिया.

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पुराने अंग्रेज़ी ट्वीट्स को लेकर बना मज़ाक
सोशल मीडिया पर मंडाविया के कुछ पुराने ट्वीट्स वायरल होने लगे.
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शिवांगी तोमर नाम की ट्विटर यूज़र ने उनके कुछ पुराने ट्वीट्स शेयर किए और कटाक्ष करते हुए लिखा, ''ये हमारे नए स्वास्थ्य मंत्री हैं!'' इन ट्वीट्स में मांडविया ने independence और try की स्पेलिंग ग़लत लिखी थी.
नवीन नाम के ट्विटर यूज़र ने लिखा, मैं तो बस हमारे देश के भाग्य के बारे में सोच रहा हूँ. ''मुझे गो कोरोना गो और थालियाँ बजाने वाले दिन याद आ रहे हैं.''
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मोहम्मद निज़ामुद्दीन ने ट्वीट किया, ''ईश्वर इस देश को बचाए!''
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समर्थन में भी उतरे लोग
ट्विटर और फ़ेसबुक पर कई पोस्ट्स में उनकी अंग्रेज़ी का मज़ाक बनाया जा रहा है. लेकिन सोशल मीडिया पर एक वर्ग उनके समर्थन में भी दिख रहा है.
लोगों का कहना है कि मंडाविया को उनके काम के आधार पर आँका जाना चाहिए न कि अंग्रेज़ी भाषा के आधार पर.
जानी-मानी पत्रकार बरखा दत्त ने ट्वीट किया है, "कृपया नए मंत्रियों की अंग्रेज़ी को निशाना बनाना बंद कीजिए. यह पूरी तरह से घिनौनी आभिजात्यता है. इस आभिजात्यपन का राजनीतिक विरोध होता रहा है.''
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अमित नाम के एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, "अंग्रेज़ी के कारण मनसुख मंडाविया को नीचा दिखाने वाली टिप्पणियाँ करने वालों से एक सवाल है- क्या आप सबके साथ ऐसा ही करते हैं? अपने दोस्त, परिवार, सहकर्मी और जूनियरों के साथ भी? अगर हाँ, तो यह आभिजात्य रूप दिखाने के लिए शुक्रिया."
तहसीन पूनावाला ने ट्वीट किया, "अंग्रेज़ी में कुशल नहीं होने के कारण मंडाविया को ट्रोल करना दुर्भाग्यपूर्ण है. उनके मंत्रालय के काम के आधार पर उनकी आलोचना कीजिए."
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वहीं, कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स का यह भी कहना है कि अगर आपको अंग्रेज़ी नहीं आती तो अपनी मातृभाषा में बोलिए या लिखिए.
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एनडीटीवी की पत्रकार पूर्वा चितनिस ने ट्वीट किया, ''अगर कोई व्यक्ति अच्छी अंग्रेज़ी बोल या लिख नहीं सकता/सकती तो उसे इसलिए अपमानित नहीं किया जा सकता. किसी व्यक्ति का आकलन उसके काम पर होना चाहिए न कि भाषा के आधार पर. अगर आप अंग्रेज़ी लिख या बोल नहीं सकते तो इसे लेकर परेशान होने की ज़रूरत नहीं है.''

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आयुर्वेद की तारीफ़ और महामारी के दौरान काम
इसके अलावा, मनसुख मंडाविया के वे ट्वीट्स भी शेयर किए जा रहे हैं जिसमें उन्होंने होम्योपैथी और आयुर्वेद की तारीफ़ की है.

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उन्होंने साल 2015 के एक ट्वीट में लिखा था, "जहाँ एलोपैथी फ़ेल हो जाती है वहाँ आयुर्वेद काम आता है."

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दूसरी तरफ़, कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स यह भी याद दिला रहे हैं कि कोरोना महामारी के दौरान मंडाविया ने कैसे 'बेहतरीन' काम किया है.

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मंडाविया के वे ट्वीट्स भी शेयर किए जा रहे हैं जिनमें उन्होंने रेमडेसिवियर का उत्पादन 10 गुना बढ़ाने और ऑक्सीजन की कमी से निबटने के लिए उठाए गए क़दमों की जानकारी दी है.
अनुराग ठाकुर और सिंधिया की चर्चा
मनसुख मंडाविया के अलावा अनुराग ठाकुर और ज्योतिरादित्य सिंधिया को कैबिनेट में जगह मिलने पर भी चर्चा हो रही है.
सोशल मीडिया में अनुराग ठाकुर के उस वाक़ये को यादकर उनकी आलोचना भी की जा रही है, जब उन्होंने एक सभा में 'गोली मारो...' के नारे गए लगवाए थे.
वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने पर लोग सचिन पायलट को भी याद कर रहे हैं.
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एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, "सिंधिया ने उड़ान भर ली है और पायलट अब भी ज़मीन पर हैं."
श्रेया ने सिंधिया की तस्वीर शेयर करते हुए ट्वीट किया, "धैर्य ही कुंजी है."
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राहुल गांधी के क़रीबी रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछले साल मार्च में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे.
अब उन्हें मोदी सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री बनाया गया है.
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