आनंद महिंद्रा ने कहा- नहर खोदने वाले लौंगी भुइंया को देंगे ट्रैक्टर

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क़रीब तीस साल के कड़े परिश्रम से अपने गाँव तक पानी पहुँचाने वाले बिहार के लौंगी भुइंया का काम आसान करने के लिए महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने उन्हें एक ट्रैक्टर देने की घोषणा की है.
शुक्रवार को बिहार के स्वतंत्र पत्रकार रोहिन कुमार ने ट्विटर पर आनंद महिंद्रा से अपील की थी कि "बिहार (गया ज़िले) के लौंगी ने अपनी ज़िंदगी के 30 साल लगाकर एक नहर खोद दी. उन्हें अभी भी कुछ नहीं चाहिए, सिवाए एक ट्रैक्टर के. उन्होंने मुझसे कहा कि अगर उन्हें एक ट्रैक्टर मिल जाए तो उनकी बड़ी मदद हो जाएगी."
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आनंद महिंद्रा ने इस ट्वीट का संज्ञान लेते हुए, शनिवार को इसके जवाब में लिखा, "उनको को ट्रैक्टर देना मेरा सौभाग्य होगा. हमारे लिए सम्मान कि बात होगी कि वो हमारा ट्रैक्टर इस्तेमाल करें. मेरी नज़र में उनकी ये नहर किसी ताजमहल या पिरामिड से कम प्रभावशाली नहीं है."
बीबीसी ने 15 सितंबर को लौंगी भुइंया पर एक विस्तृत रिपोर्ट की थी जिसमें बताया गया था कि सिंचाई के साधनों के अभाव में और अपने गाँव से पलायन को रोकने के लिए लौंगी ने तीस साल पहले एक नहर खोदनी शुरू की थी.
लंबे परिश्रम के बाद उन्होंने पहाड़ के पानी को गाँव के तालाब तक पहुँचा दिया.

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इससे पहले बरसात के दिनों में उनके क्षेत्र में बारिश तो होती थी लेकिन सारा पानी बंगेठा पहाड़ के बीच में ठहर जाता था.
बिहार की राजधानी पटना से लगभग 100 किलोमीटर दूर गया ज़िले के बांकेबाज़ार प्रखण्ड में लौंगी भुइंया का कोठिलवा गाँव है. गाँव के रहने वाले लौंगी भुइंया के बेटे भी काम-धंधे की तलाश में घर से दूर चले गए
गाँव में रहने वाले लोगों का मुख्य पेशा कृषि है, लेकिन यहाँ के लोग पहले धान और गेहूँ की खेती के बारे में सोच नहीं पाते थे, क्योंकि सिंचाई का कोई ज़रिया नहीं था.
बीबीसी से बातचीत में 70 वर्षीय लौंगी भुइंया ने कहा था, "गाँव से सटे बंगेठा पहाड़ पर बकरी चराते हुए एक बार मेरे मन में ख्याल आया कि अगर गाँव में पानी आ जाए तो पलायन रुक सकता है और फ़सल भी उगाई जा सकती है. इसके बाद पूरे इलाक़े में घूमकर मैंने पहाड़ पर ठहरे पानी को खेतों तक लाने का नक्शा तैयार किया और पहाड़ को काटकर नहर बनाने का काम शुरू किया."
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लौंगी भुइंया ने तीस साल में अकेले फावड़ा चलाकर क़रीब तीन किलोमीटर लंबी, 5 फ़ुट चौड़ी और तीन फ़ुट गहरी नहर बनाने का काम किया.
इसी साल अगस्त में लौंगी भुइंया का यह काम पूरा हुआ. अबकी बरसात में उनकी मेहनत का असर भी दिख रहा है. आसपास के तीन गाँव के किसानों को भी इसका फ़ायदा मिल रहा है. लोगों ने इस बार धान की फ़सल भी उगाई है.
वैसे तो 'माउंटेन मैन' के नाम से गया के ही दशरथ मांझी दुनिया भर में चर्चित हैं, जिन्होंने पहाड़ काटकर अपने गाँव तक रास्ता बना दिया था. अब लोग लौंगी भुइंया को 'नया माउंटेन मैन' कहने लगे हैं.
लौंगी के परिवार में कौन-कौन हैं? वो लौंगी के इस संघर्ष पर क्या कहते थे? गाँववाले लौंगी द्वारा तैयार की गई नहर के बारे में क्या कहते हैं? और इतने लंबे समय तक प्रशासन से उन्हें कोई मदद क्यों नहीं मिली?
इस सबका जवाब जानने के लिए लिंक पर क्लिक करके पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ सकते हैं: लौंगी भुइंया: पहाड़ काटकर तीन किलोमीटर लंबी नहर बना दी
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