बिहार विधानसभा चुनाव 2020: क्या गहराती जा रही है एनडीए में दरार?

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- Author, नीरज प्रियदर्शी
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए
बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और यहां भी एनडीए में सबकुछ अच्छा नहीं चल रहा है. रामविलास पासवान की एलजेपी और नीतीश कुमार की जेडीयू आमने-सामने हैं. दोनों पार्टियों के नेता एक दूसरे के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी कर रहे हैं.
एलजेपी के अध्यक्ष चिराग़ पासवान सार्वजनिक रुप से नीतीश कुमार के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर भी अपने मतभेद ज़ाहिर किए हैं.
चाहे वह पलायन के मुद्दे से जुड़े मनोज बाजपेई के भोजपुरी गीत 'बंबई में का बा' को शेयर करते हुए नीतीश कुमार को टैग करना हो या फिर नीतीश कुमार की ओर से घोषित "दलित की हत्या होने पर परिवार के सदस्य को नौकरी' के नियम पर उन्हीं को चिट्ठी लिखकर सवाल उठाना हो.
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अब पासवान की पार्टी के नेता 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़ा करने की बात कर रहे हैं. ख़ासतौर से उन्हीं सीटों पर जिसपर जदयू के उम्मीदवार खड़े होंगे.
बिहार में प्रधानमंत्री को लिखी चिराग़ पासवान की चिट्ठी की भी ख़ूब चर्चा है. ये चिट्ठी बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की नीतीश कुमार के साथ मुलाक़ात के बाद लिखी गई थी.
चिराग़ ने क्या लिखा है चिट्ठी में?
पिछले दिनों भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की नीतीश कुमार से मुलाक़ात के बाद भाजपा के शीर्ष नेताओं की तरफ़ से बयान आए कि आने वाला विधानसभा चुनाव वे नीतीश कुमार के ही नेतृत्व में लड़ेंगे.

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ऐसा लगा कि नीतीश कुमार के साथ मुलाक़ात के बाद सबकुछ ठीक हो गया है.
लेकिन इसके बाद चिराग़ पासवान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम चिट्ठी लिखी और मँगलवार को दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाक़ात भी की.
एलजेपी के प्रवक्ता अशरफ़ अंसारी बीबीसी से कहते हैं, "चिट्ठी बेहद ही गोपनीय है और उसके बारे में अध्यक्ष महोदय के सिवा वही जानता होगा जिससे उसकी चर्चा अध्यक्ष महोदय ने की होगी."
जेपी नड्डा से मुलाक़ात की बात पर अशरफ़ ने कहा, "जिस तरह जेपी नड्डा साहब ने नीतीश जी के साथ मुलाक़ात की, वैसे ही हमारे अध्यक्ष महोदय भी जेपी नड्डा साहब से मिले. उन्होंने राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति की चर्चा की होगी. और इसके अलावा क्या बात हुई यह अध्यक्ष महोदय ही बता सकते हैं."

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कुछ समाचार एजेंसियों ने लोजपा के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि जेपी नड्डा से मुलाक़ात में चिराग़ पासवान ने कहा है कि बिहार में इस वक़्त नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ लहर है और इसलिए भाजपा को जदयू से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए.
लोजपा प्रवक्ता अशरफ़ अंसारी सीटों की दावेदारी को लेकर कहते हैं, "संसदीय दल की बैठक में सदस्यों ने पहले ही यह राय जता दी है कि हमारी तैयारी 143 सीटों पर है. और अब अगला फ़ैसला अध्यक्ष महोदय को लेने के लिए स्वीकृत किया गया है. वह जो भी फ़ैसला लें!."
लोजपा और जदयू के बीच बयानबाज़ी
चिराग़ पासवान जब भी नीतीश कुमार को लेकर कुछ कहते हैं, जदयू के नेता उनके ख़िलाफ़ हमलावर हो जाते हैं.
लोजपा के नेताओं ने जब ये कहा कि वे 143 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं तो जदयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने पलटवार करते हुए कहा, "जदयू और भाजपा सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं".
इसके पहले जब चिराग़ पासवान ने नीतीश कुमार के नेतृत्व पर सवाल उठाया था तब जदयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने यह बयान दिया, "चिराग़ पासवान कालीदास हैं. जिस डाल पर बैठते हैं, उसी को काटते हैं."
लोजपा और जदयू के बीच तल्ख़ी कम होने का नाम नहीं ले रही.
क्या यह एनडीए में फूट का कारण बन सकती है?
जदयू के प्रवक्ता और बिहार सरकार में आईपीआरडी मंत्री नीरज कुमार कहते हैं, "हमारा जुड़ाव भाजपा से है. और उसके टूटने का कोई सवाल ही नहीं है. अगर भाजपा के शीर्ष नेता यह कह रहे हैं कि हमारे नेता नीतीश कुमार हैं तो फिर चिराग़ पासवान की बात ही कहां रह जाती है?"
नीरज ने कहा, "बिहार की सरकार में लोजपा का कोई योगदान नहीं है. भाजपा के साथ मिलकर हम सरकार चला रहे हैं इसलिए सीटों की शेयरिंग की बात भी उन्हीं से होगी. उन्हें कितनी सीटों पर चुनाव लड़ना है या नहीं लड़ना है, वे यह भाजपा से तय करें".
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बीजेपी की ख़ामोशी
जदयू और एलजेपी की ज़ुबानी लड़ाई में सबसे दिलचस्प है भाजपा की चुप्पी. यह कहने के सिवा कि "नीतीश कुमार चुनाव में हमारे नेता हैं", वे एलजेपी के स्टैंड पर कुछ नहीं बोल रहे.
भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद बीबीसी से कहते हैं, "एनडीए के अंदर अलग-अलग विचारधारा वाले एक नहीं, बहुत से नेता हैं. ज़रूरी नहीं कि सबकी एक बात पर सहमति हो. लेकिन हमारी अधिक से अधिक बातों पर सहमति है इसलिए ही यह अलायंस चल रहा है. जहां तक बात असहमतियों की है तो बातचीत के ज़रिए उन्हें जल्द ही सुलझा लिया जाएगा."
निखिल आनंद फिर से इस बात पर ज़ोर दिलाते हैं कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह और यहां तक कि प्रधानमंत्री भी कई मौक़ों पर यह कह चुके हैं कि बिहार चुनाव में एनडीए के नेता नीतीश कुमार ही होंगे.
क्या टूट संभव है?

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एलजेपी और जेडीयू के बीच चल रही रस्साकशी एनडीए में फूट का कारण बन सकती है?
वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि इस वजह से एनडीए में टूट होने वाली है. यहां प्रेशर पॉलिटिक्स चल रहा है. सीटों का बँटवारा होना है. वह होते ही सब सही हो जाएगा. गठबंधन में शामिल हर पार्टी चाहती है उसे अधिक से अधिक सीटें मिल जाएं. एलजेपी और जेडीयू भी यही कर रहे हैं. और यह केवल एनडीए के अंदर नहीं बल्कि विपक्षी महागठबंधन में भी है."
बिहार विधानसभा के कुल सीटों की संख्या 243 है. एनडीए की बात करें तो वर्तमान में सबसे अधिक सीटें 71 सीटें जदयू की जीती हुई हैं, जबकि भाजपा के पास 52 विधायक हैं. ज़्यादा विधायकों की पार्टी होने के नाते जदयू का दावा है कि उसे अधिक से अधिक सीटें मिले.
दूसरी तरफ़ लोजपा भी अपने लिए कम से कम उतनी सीटें माँग रही है जितने पर (42) उन्होंने पिछले बार चुनाव लड़ा था.
हालांकि उन्हें जीत सिर्फ़ दो ही सीटों पर मिल पाई थी.
मणिकांत ठाकुर कहते हैं कि एलजेपी के लिए सीटों की लड़ाई इसलिए भी ज़रूरी हो गई है क्योंकि जीतन राम मांझी भी अब एनडीए का हिस्सा बन गए हैं. उसमें भी ख़ास यह है कि वे दलित समाज से आते हैं. जिनके प्रतिनिधित्व का दावा पहले से लोजपा करती आ रही है. यह तय है कि एनडीए में सीट शेयरिंग की जब भी बात होगी, तब जीतन राम मांझी की भी बात होगी. ऐसे में नुक़सान अधिक लोजपा को ही होगा."
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