सोशल: एक कश्मीरी दूल्हा आपको अपनी शादी में बुला रहा है...

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- Author, सिन्धुवासिनी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उम्मीद है आप में से कइयों ने कभी न कभी किसी अजनबी की शादी में डांस ज़रूर किया होगा. शायद शादी की दावत भी उड़ाई हो. लेकिन क्या किसी अजनबी ने आपको अपनी शादी में आने का न्योता दिया है?
सवाल कुछ अजीब है. अगर कोई आपको जानता ही नहीं तो भला शादी में क्यों बुलाएगा! लेकिन कश्मीर के एक युवक ने ये अजीबोग़रीब सवाल पैदा कर दिया और इसका जवाब भी दे रहा है.

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इस शख़्स ने फ़ेसबुक पर अपनी शादी का 'ओपन इन्विटेशन' यानी 'खुला आमंत्रण' पोस्ट किया है. शादी 1 अक्टूबर को है और सारे फ़ंक्शन कश्मीर के पुलवामा ज़िले के धरम गुंड गांव में होंगे. दूल्हे का नाम है जतिन्दर पाल सिंह.

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जतिन्दर कश्मीर के अल्पसंख्यक सिख समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. इनके माता-पिता और बाकी परिवार त्राल में रहता है. त्राल वही इलाका है जहां से चरमपंथी संगठन हिज़बुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी थे.
दिलचस्प ये है कि जतिन्दर के पिता उसी स्कूल में वाइस प्रिसिंपल थे जहां बुरहान वानी के पिता प्रिसिंपल थे.

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28 साल के जतिन्दर पेशे से सॉफ़्टवेयर इंजीनियर हैं और फ़िलहाल गुड़गांव में नौकरी करते हैं. इनकी होने वाली पत्नी विपिन कौर भी कश्मीरी सिख हैं और नोएडा में काम करती हैं.
जतिन्दर फ़ेसबुक पर खुद को 'सेपियोसेक्सुअल' (बुद्धिमानी और विचारों से आकर्षित होने वाला शख़्स) और लिबरल बताते हैं जिसे विज्ञान और इतिहास में रुचि है.
उन्होंने अपनी फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा है, ''मैं 1 अक्टूबर को शादी कर रहा हूं. शादी कश्मीर के एक खूबसूरत गांव में कश्मीरी और सिख रीति-रिवाज़ों के साथ होगी. अगर आप शादी में आना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. मुझे मैसेज कीजिए.''

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पोस्ट में आगे कहा गया है, ''ज़रूरी नहीं कि हम एक-दूसरे को जानते हों या पहले कभी मिले हों. मेरे परिवार को आपकी मेज़बानी करके खुशी होगी. आपको ले जाने और सुरक्षा की ज़िम्मेदारी हमारी होगी. मैं ज़ोर देकर कह रहा हूं, आपको ये मिस नहीं करना चाहिए.''
शादी का खुला न्योता देने का विचार जतिन्दर के दिमाग़ में कैसे आया?

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ये सवाल बीबीसी ने उनसे किया तो उन्होंने जवाब दिया, ''मेरा बचपन कश्मीर में बीता है और मेरे ज़ेहन में वहां की यादें अब भी ताज़ा हैं. हिंसा और अस्थिरता ने कश्मीर की खूबसूरत छवि को काफ़ी हद तक बदल दिया है. मैं लोगों को बताना चाहता हूं कि यह अब भी वैसा ही है. ख़ूबसूरत और प्यारे लोगों का ठौर है कश्मीर.''
क्या दुल्हन और परिवार उनके इस फ़ैसले से खुश है? उन्होंने कहा, ''मैं लोगों को अपनी तरफ़ से बुला रहा हूं, इसलिए मेहमानों के स्वागत की ज़िम्मेदारी भी मेरी होगी.'' वैसे, दुल्हन के परिवार को भी ये आइडिया काफ़ी पसंद आया है.
धरम गुंड के ज़्यादातर लोग सोशल मीडिया से दूर ही हैं, इसलिए उन्हें अभी पता नहीं है कि उनके यहां आने वाले मेहमानों में कई नए चेहरे भी होंगे.
लेकिन जतिन्दर को पूरा यकीन है कि उनका गांव खुशी-खुशी सबका स्वागत करेगा. कॉरपोरेट नौकरी की व्यस्तता के बावजूद जतिन्दर साल में दो बार कश्मीर ज़रूर जाते हैं.

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उन्होंने कहा, ''हमारा गांव एक शांत जगह है जहां सभी लोग प्यार से रहते हैं. हमारे पड़ोसी भी परिवार के सदस्यों जैसे हैं. मैं भले गुड़गांव में हूं, लेकिन मेरा दिल कश्मीर में ही है...यही वजह है कि मैं लोगों को भी वहां ले जाना चाहता हूं.''

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मेहमानों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी वो कैसे ले सकते हैं? इसके जवाब में जतिन्दर कहते हैं, ''ऐसा नहीं है कि हम पहली बार गांव में कोई समारोह कर रहे हैं. इससे पहले भी हम कई बार लोगों को अपने गांव बुला चुके हैं.''
उन्होंने कहा, ''स्थानीय लोगों और पड़ोसियों से हमारे बहुत अच्छे सम्बन्ध हैं. बात अगर मेहमानों की सुरक्षा की है तो हमारे घर से महज़ 500 मीटर की दूरी पर एक पुलिस स्टेशन है और पास में ही एक आर्मी कैंप भी है.''

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अगर शादी में बहुत ज़्यादा मेहमान आ गए तो उनके स्वागत और खर्चे का इंतजाम कैसे होगा?
जतिन्दर ने कहा, ''जब मैंने फ़ेसबुक पर पोस्ट डाली थी तब मुझे इतने अच्छे रिस्पॉन्स का बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था. लेकिन जब मुझे धड़ाधड़ मैसेज आने लगे तो मैं सोचने पर मजबूर हो गया. मैंने लोगों को बताया कि मैं ज़्यादा से ज्यादा 600-700 अनजान मेहमानों का इंतज़ाम कर सकता हूं.''
अगर ये 'ओपन इन्विटेशन' है तो फिर ये लिमिट क्यों? इस सवाल के जवाब में जतिन्दर कहते हैं, ''मैं चाहता हूं कि जितने लोग शादी में आएं, वो पूरा लुत्फ़ उठा पाएं. बहुत ज़्यादा भीड़भाड़ में मज़ा किरकिरा होने का डर भी है.''
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