सोशल : ‘फ़ैसला तो सही है, पर देर से आया’

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सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों के सभी ज़िलों में गोहत्या रोकने के नाम पर हिंसा करने वालों पर लगाम कसने के लिए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को नोडल अफ़सर के तौर पर तैनात करने का आदेश दिया है.
एक याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस अमिताव रॉय और एएम ख़ानविलकर ने कहा कि ये नोडल अफ़सर इस पर नज़र रखेंगे कि कथित गोरक्षक क़ानून अपने हाथ में ना लें और उनके ख़िलाफ़ जल्द मामला दर्ज़ किया जाए.

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मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी.
ज़्यादातर लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले का स्वागत किया है. विसाल पधान लिखते हैं कि यह एक बहुत अच्छा फ़ैसला है और इस पर कार्यवाही भी होनी चाहिए.
अदालत का कहना है कि गोरक्षा के नाम पर राष्ट्रीय राजमार्गों पर पहरा देने वालों के संबंध में राज्य सरकारों ने क्या क़दम उठाए हैं, इसके बारे में अदालत को जानकारी दी जाए.

अक़बर अली ने कहा कि फ़ैसला बिल्कुल सही है लेकिन फ़ैसला आने में देर हुई है. हालांकि बहुत से लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने गौ-हत्याओं को भी रोकने की बात कही है.
राहुल सैने ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट को गौ-तस्करों पर भी लगाम कसनी चाहिए. वहीं सैफ लिखते हैं कि क़ानून को अपने हाथ में लेने का हक़ किसी को नहीं है.
अभिषेक राणा लिखते हैं कि सुप्रीम कोर्ट को गौ हत्या पर भी रोक लगानी चाहिए. गायों की तस्करी को भी रोकना चाहिए.












