सोशल: गोरखपुर त्रासदी पर नरेंद्र मोदी ने जो कहा, क्या वो काफ़ी है?

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15 अगस्त, दिन मंगलवार को भारत अपना 71वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चौथी बार लाल किले से भाषण दिया.
इससे पहले उन्होंने लोगों से नमो ऐप पर अपने भाषण के लिए सलाह भी मांगी थी. लोग उम्मीद कर रहे थे कि प्रधानमंत्री गोरखपुर में बच्चों की मौत पर कुछ ठोस बातें कहेंगे.

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पीएम मोदी ने अपने भाषण में गोरखपुर त्रासदी का ज़िक्र तो किया लेकिन मुश्किल से चंद शब्दों में. उन्होंने भाषण की शुरुआत में मासूमों की मौत पर अफ़सोस ज़ाहिर किया. पहले उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की बात की और फिर बच्चों की मौत पर दुख जताया.

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प्रधानमंत्री के इस रवैये से लोग ख़ासे निराश दिखे. ऋषभ श्रीवास्तव ने फ़ेसबुक पर लिखा, ''दो दिन पहले सरकार ने कहा कि सेलिब्रेशन नहीं रुकेगा तो लोगों ने कहा 60 बच्चों की मौत को नहीं भूलने देंगे. सरकार तो नहीं भूली है, अपना काम कर रही है. जनता ज़रूर भूल गई.''
स्वाति मिश्रा तंज़ कसते हुए लिखती हैं,''शब्द बचाते हुए एक ही वाक्य में 'प्राकृतिक आपदा' और 'अस्पताल में बच्चे मरे'. मोदी जी ने कहा नहीं, गोरखपुर को रिक्त स्थान में आप ख़ुद भर लीजिए.''

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अनीता आज़ादी की सालगिरह पर मुबारकबाद तो देती हैं लेकिन लौट कर न आने वाले बच्चों को याद करने की बात भी कहती हैं. बिलाल जाफ़री कहते हैं, ''हालात-ए-मुल्क देख के रोया न गया, कोशिश तो की पर मुँह ढक के सोया न गया.''

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स्वतंत्र मिश्रा ने अपनी फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा, ''गोरखपुर में 70 बच्चों के मारे जाने पर आज परेड, तोपों की सलामी और झांकी व जलसों को थोड़ा बंद कर देते तो ठीक होता. इस मौके पर भाषण तो बिल्कुल भी नहीं अच्छा लगेगा.''

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अभय चावला ने पूछा, ''गोरखपुर में इतने बच्चों की मौत हो गई. कैसी आज़ादी?'' कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने भी पीएम मोदी के इस तरीके की आलोचना की है.

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उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी ने बड़े ही हल्के अंदाज़ में अन्य प्राकृतिक आपदाओं के साथ गोरखपुर त्रासदी का ज़िक्र कर दिया. उन्हें सतर्क रहना चाहिए था.''
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