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अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र में वायरस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र पर एक बाहरी तत्व दाखिल हो गया है. ये बाहरी तत्व और कोई नहीं बल्कि एक वायरस है जिसने अंतरिक्ष केंद्र के कंप्यूटर पर कब्ज़ा कर लिया है. अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इसकी पुष्टि कर दी है. नासा का कहना कि पिछले महीने जुलाई में अंतरिक्ष केंद्र पर धरती से जो कंप्यूटर लैपटॉप ले जाए गए थे उनमें 'गैमिमा डॉट एजी' नाम का वायरस था जो इन लैपटॉप से अंतरिक्ष केंद्र के कंप्यूटर में चला गया. 'गैमिमा डॉट एजी' नाम का ये वायरस सबसे पहले अगस्त 2007 में धरती पर मिला था जो 'ऑनलाइन' खेले जाने वाले कंप्यूटर खेलों यानी 'वीडियो गेमों' के लॉगइन चुरा लेता है. नासा का कहना है कि ये कोई पहला मौक़ा नहीं है जब किसी वायरस ने अंतरिक्ष स्टेशन के कंप्यूटरों में प्रवेश कर लिया हो. नासा का कहना है कि वो इस बात की जाँच कर रहा है कि इस वायरस ने अंतरिक्ष स्टेशन के कंप्यूटरों को कितना प्रभावित किया है. कैसे मिली जानकारी? कंप्यूटर के इस वायरस के बारे में सबसे पहले अंतरिक्ष के बारे में ख़बरें देने वाली वेबसाइट 'स्पेसरेफ़' में बताया गया था. नासा ने स्पेसरेफ़ को बताया कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की किसी भी 'कमांड' या किसी भी 'कंट्रोल सिस्टम' को इस वायरस की वजह से किसी तरह का कोई ख़तरा नहीं है. जिन लैपटॉप को धरती से अंतरिक्ष केंद्र पर ले जाया गया था वो वहाँ रह रहे अंतरिक्ष यात्रियों के खान-पान के प्रोग्राम का ब्यौरा रखते थे और हर हफ़्ते धरती पर ईमेल भेजा करते थे. धरती से ले जाए गए इन लैपटॉप पर किसी तरह का कोई 'एंटी वायरस सॉफ्टवेयर' नहीं था जिससे वो अपने लैपटॉप को वायरस से बचा सकें. कितना ख़तरनाक है ये वायरस? 'गैमिमा डॉट एजी' नाम का ये वायरस किसी कंप्यूटर पर जाने के बाद सबसे पहले उसका 'पासवर्ड' और 'लॉगइन' पढ़ता है और उसके बाद ये इंटरनेट के ज़रिए केंद्रीय 'सर्वर' को इसकी जानकारी भेजता है जिससे वो कंप्यूटर जुड़ा होता है. ये वायरस ज़्यादातर पूर्वी देशों में खेले जाने वाले कंप्यूटर गेमों जैसे 'मैपल स्टोरी', 'ह्यूआंग याई ऑनलाइन' और 'टेल्सवीवर' जैसे खेलों को अपना शिकार बनाता है. नासा, सॉफ्टवेयर के अपने सहयोगियों के साथ इस बात की जाँच करने में जुटा है कि सबसे पहले ये 'वायरस' लैपटॉप में दाखिल कैसे हुआ.
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र का इंटरनेट से सीधा कोई जुड़ाव या 'कनेक्शन' नहीं है और धरती से जो भी डाटा या जानकारी केंद्र पर भेजी जाती है वो 'स्कैन' की जाती है. ऐसा माना जा रहा है कि 'गैमिमा डॉट एजी' नाम का वायरस किसी अंतरिक्ष यात्री की 'फ़्लैश' या 'यूएसबी ड्राइव' के ज़रिए अंतरिक्ष केंद्र तक गया भी हो सकता है. अंतरिक्ष एजेंसी नासा अब भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा के भरपूर इंतज़ाम कर रहा है. नासा ने 'वायर्ड न्यूज़' नाम की वेबसाइट को बताया कि पहले भी कई बार इस तरह के वायरस अंतरिक्ष केंद्र के कंप्यूटरों तक पहुँचे हैं लेकिन इन्होंने किसी तरह का कोई नुक़सान वहाँ के कंप्यूटरों को नहीं पहुँचाया है. |
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