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शनिवार, 16 फ़रवरी, 2008 को 14:14 GMT तक के समाचार
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कैंसर से लड़ने में तनाव एक बाधा
कोशिका
तनाव, महिलाओं में गर्भाशय का कैंसर फैलाने वाले वायरस से लड़ने की क्षमता कम कर देता है.
यूं तो तनाव से कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है लेकिन अमरीकी वैज्ञानिकों के एक नए शोध में पता चला है कि तनाव की वजह से महिलाओं में गर्भाशय के कैंसर से लड़ने की क्षमता भी कम होती जाती है.

गर्भाशय के कैंसर की प्रमुख वजह एचपीवी यानी ह्यूमन पैपिल्लोमा वायरस का संक्रमण है. यह संक्रमण यौन संबंध बनाने के दौरान ही होता है और केवल कुछ ही महिलाओं में यह कैंसर का रूप लेता है.

अमरीकी शोधकर्ताओं की ‘एन्नल्स बिहैवियरल मेडिसिन’ में छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि तनाव में रहने वाली औरतों में इस वायरस से लड़ने की क्षमता कम होती जाती है.

लेकिन यह अध्ययन ये नहीं सिद्ध कर पाया कि क्या केवल तनाव ही इस समस्या की प्रमुख वजह है.

शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र कुछ इस तरह से काम करता है कि जब एचपीवी शरीर के संपर्क में आता है तो प्रतिरक्षा तंत्र इसे निरस्त कर देता है लेकिन अगर ऐसा न हो पाया और संक्रमण फैल गया तो वायरस गंभीर समस्या पैदा कर देता है.

कई मामलों में कुछ महिलाओं में ये वायरस शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र से नष्ट हो जाता है तो कुछ के शरीर में इसका लगातार संक्रमण बढ़ता जाता है जो बाद में कैंसर में परिवर्तित हो जाता है.

फिलाडेल्फ़िया स्थित ‘फॉक्स चेज़ कैंसर सेंटर’ के हाल में किए गए अध्ययन में ये पता लगाया गया कि कुछ महिलाओं में प्रतिरोधी तंत्र एचपीवी वायरस को क्यों नहीं ख़त्म कर पा रहा है.

इस अध्ययन के दौरान 78 महिलाओं से ‘स्मियर टेस्ट’ के बाद पिछले महीने के उनके दैनिक जीवन के तनाव से जुड़े सवालों का जवाब मांगा गया और किसी क़रीबी की मौत या लम्बे समय से तलाक जैसी घटनाओं के बारे में भी पूछा गया.

 अधिक तनाव में रहने वाली महिलाओं में एचपीवी से लड़ने की क्षमता कम होती है
डॉक्टर कैरोलिन फ़ैंग, शोधकर्ता

स्मियर टेस्ट, कैंसर से जुड़ा वह परीक्षण होता है जिसमें संक्रमित कोशिका की में जाँच की जाती है.

इस तरह से महिलाओं में वायरस से लड़ने की क्षमता की जाँच पूरी की गई.

ऐसा ही एक परीक्षण 28 महिलाओं का किया गया जिनका स्मियर टेस्ट नहीं किया गया था और प्राप्त परिणामों की तुलना की गई.

शोध से ये बात सामने आई कि उन महिलाओं में प्रतिरोधक क्षमता कम थी जिनके तनाव का स्तर अधिक था, हलांकि, प्रतिरक्षा क्षमता और घटनाओं की संख्या में कोई संबंध नहीं है.

मुख्य शोधकर्ता डॉक्टर कैरोलिन फ़ैंग ने कहा, “अधिक तनाव में रहने वाली महिलाओं में एचपीवी से लड़ने की क्षमता कम होती है. इसका मतलब ये होता है कि उनमें गर्भाशय के कैंसर की संभावना भी अधिक हो जाती है क्योंकि उनका प्रतिरक्षा तंत्र बीमारी फैलाने वाले वायरस से नहीं लड़ पाते हैं.”

शोधकर्ताओं ने माना है कि हालाँकि, शोध की रूपरेखा के आधार पर यह सिद्ध करना असंभव है कि प्रतिरक्षा के प्रभाव की वजह तनाव ही है.

कैंसर रिसर्च यूके' के प्रवक्ता का कहना है कि इसे सिद्ध करने के लिए अभी और शोध की ज़रूरत पड़ेगी.

प्रवक्ता ने कहा, “इस जानकारी से हमें गर्भाशय से जुड़े कैंसर से बचाने वाला टीका बनाने में मदद मिलेगी जिससे इस वायरस को नष्ट किया जा सकेगा.”

उन्होंने कहा कि यह अध्ययन यह बताने के लिए काफ़ी नहीं है कि तनाव भरा जीवन प्रतिरक्षा तंत्र को कमज़ोर करता है जिससे कैंसर होता है.

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