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मोबाइल से कैंसर होना संदिग्ध | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल से सेहत पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को लेकर हुए ताज़ा अध्ययन में इससे कैंसर होने की संभावना को संदेह के घेरे में रखा गया है. अध्ययन में कहा गया है कि हालाँकि मोबाइल के इस्तेमाल से दिमाग और कान पर कुछ असर हो सकता है. लेकिन जहाँ तक कैंसर का सवाल है, तो इससे कैंसर होने की संभावना संदिग्ध है. शोध में 10 से 15 साल तक मोबाइल इस्तेमाल करने वालों में आमतौर पर कैंसर के लक्षण नहीं दिखाई दिए. अध्ययन ब्रिटेन में 2001 में शुरु हुए टेलीफ़ोन और स्वास्थ्य शोध कायर्क्रम ने सर विलियम स्टीवर्ट की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट को सही बताया है. सरकार और मोबाइल फ़ोन उद्योग द्वारा दिए गए 88 लाख पाउंड की आर्थिक सहायता वाले कार्यक्रम की एक स्वतंत्र प्रबंधन समिति भी है. इस समिति के अधिकतर सदस्य विश्वविद्यालयों से लिए गए हैं. इसके तहत मोबाइल फ़ोन और बेस स्टेशन को लेकर 2001 के अंत में शुरु किए गए 28 में से 23 अध्ययन अब तक पूरे हो चुके हैं. आशंका इसके तहत किए गए कुछ अध्ययन बताते हैं कि मोबाइल फ़ोन के प्रयोग से मस्तिष्क और कान का ट्यूमर होने की आशंका अधिक है. वहीं कुछ और शोध बताते हैं कि मोबाइल की रेडियो फ्रीक्वेंसी दिमाग को भी प्रभावित करती है, जिससे रक्त दाब और दिल की बीमारी जैसी समस्याएँ हो सकती हैं. अध्ययन बताते हैं कि ये सभी समस्याएँ मोबाइल फ़ोन, कंप्यूटर और टेलीविज़न की देन है. स्टीवर्ट ने 2000 में जारी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि मोबाइल के प्रयोग से कोई नुक़सान नहीं होता है. उन्होंने इस संबंध में और अध्ययन की आवश्यकता बताई थी. वहीं 2005 में जारी अपनी रिपोर्ट में उन्होंने सलाह दी कि ऐहतियात के तौर पर आठ साल तक के बच्चों को मोबाइल की पहुँच से दूर रखना चाहिए. असर शोधकर्ता बताते हैं कि उनके अध्ययन में पिछले 15 साल से अधिक समय से मोबाइल का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता कम ही थे. उन्होंने बताया कि आप कहाँ बैठकर मोबाइल से बात कर रहे हैं, इसका भी आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है. अब तक इस अध्ययन पर 60 लाख पाउंड ख़र्च हो चुके हैं. अब मोबाइल फ़ोन का बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव और इससे होने वाली गंभीर बीमारियों का अध्ययन किया जाएगा. जिसके तहत कैंसर, अल्जाइमर और पारकिंसन जैसी बीमारियां होने की संभावना पता लगाई जाएगी. इस अध्ययन में लगभग दो लाख लोगों को शामिल किया गया. इसमें ब्रिटेन के साथ-साथ डेनमार्क, फिनलैंड और स्वीडन के वैज्ञानिक भी शामिल थे. अध्ययन में शामिल प्रोफ़ेसर लावरी चैलिस लोगों को सलाह देते हैं कि वे मोबाइल फ़ोन का सीमित प्रयोग करें. | इससे जुड़ी ख़बरें बुढ़ापे की कहानी, 'तिल' की ज़ुबानी13 जुलाई, 2007 | विज्ञान आरएनए शोध के लिए नोबल पुरस्कार02 अक्तूबर, 2006 | विज्ञान मोबाइल फोन बढ़ाता है ब्लड प्रेशर14 सितंबर, 2006 | विज्ञान 'मोबाइल फ़ोन से कैंसर का ख़तरा नहीं'30 अगस्त, 2005 | विज्ञान पिज़्ज़ा बचाए कैंसर से?22 जुलाई, 2003 | विज्ञान मुँह के कैंसर का ख़तरा05 मार्च, 2003 | विज्ञान कैंसर के मुक़ाबले कूची06 जनवरी, 2003 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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