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कैंसर से बचना है तो परहेज़ भी ज़रूरी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
स्वास्थ्य संबंधी एक महत्वपूर्ण अध्ययन में कहा गया है कि जिन लोगों का वज़न ज़्यादा नहीं है उन्हें भी अगर कैंसर से बचना है तो अपना वज़न दायरे में ही रखने के बारे में गंभीरता से सोचना होगा. वर्ल्ड कैंसर रिसर्च फ़ंड यानी विश्व कैंसर शोध कोष ने लोगों के स्वास्थ्य और जीवन शैली के बारे में एक अध्ययन कराया है जिसमें यह जानने की कोशिश की गई है कि जीवनशैली का कैंसर से क्या नाता है. इस अध्ययन के बाद इस संस्था ने कुछ बेहद महत्वपूर्ण सिफ़ारिशें जारी की हैं जिनमें वयस्कों से कहा गया है कि वे वज़न बढ़ने से बचें, मीठे पदार्थ और शराब ना पिएं और सुअर का माँस भी ना खाएँ. यह भी कहा गया है कि लोगों को इस पर ध्यान देना चाहिए कि वे जितना पतला हो सकें, होने की कोशिश करें मगर यह भी ध्यान रखें कि स्वास्थ्य के लिए जितना वज़न ज़रूरी है, उससे कम वज़न ना हो जाए. बॉडी मॉस इंडेक्स यानी बीएमआई नामक फ़ॉर्मूले के अनुसार जिन लोगों का आँकड़ा 18.5 और 25 के बीच होता है उन्हें स्वस्थ माना जाता है. बीएमआई नामक फ़ॉर्मूले के तहत किसी व्यक्ति की ऊँचाई और वज़न की तुलना करके यह आँकड़ा निकाला जाता है और बताया जाता है कि किसी व्यक्ति का वज़न क्या स्वस्थ होने के दायरे में है या नहीं. बीएमआई 25 के नीचे ही इस अध्ययन में कहा गया है कि ख़तरा तब बढ़ने लगता है जब किसी व्यक्ति का यह आँकड़ा 25 को छूने लगता है और हर किसी को यह आँकड़ा 25 से नीचे ही बनाए रखनी कोशिश करनी चाहिए. मज़े की बात ये है कि इस मामले में कोई नया शोध नहीं किया गया है बल्कि पहले से ही मौजूद क़रीब सात हज़ार शोध और अध्ययन पत्रों का नए सिरे से अध्ययन करके यह नतीजा निकाला गया है. इस अध्ययन में कहा गया है कि यह बहुत इसमें व्यापक जाँच-पड़ताल के बाद यह नतीजा निकाला गया है और इससे जीवन जीने की विभिन्न शैलियों से होने वाले ख़तरों का जायज़ा लिया गया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि मोटा शरीर कैंसर विकसित होने के लिए बहुत उपजाऊ जगह होने का काम कर सकता है और इसलिए अभी तक इस पर जितना ध्यान नहीं दिया गया अब और अब वज़न कम रखने की बहुत ज़रूरत नज़र आती है. इस रिपोर्ट के लेखकों का कहना है कि उन्होंने सिर्फ़ सिफ़ारिशें जारी की हैं और ये कोई आदेश नहीं हैं जिनका लोगों के लिए पालन करना ज़रूरी ही है मगर करेंगे तो स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. इन लेखकों का कहना है, "अगर लोग वाक़ई कैंसर का ख़तरा कम करना चाहते हैं तो इन सिफ़ारिशों पर अमल करके किया जा सकता है. कैंसर किसी का भाग्य नहीं है, बस यह एक तरह का जोखिम है और अगर आप चाहें तो एक ख़ास तरह की जीवन शैली अपनाकर उस जोखिम को कम कर सकते हैं. यह बहुत ज़रूरी है कि लोग यह समझें कि वे जो कुछ कर रहे हैं उस पर उनका पूरा नियंत्रण है." प्रोफ़ेसर वाइज़मैन का कहना है कि यह भी जानना चाहिए कि कैंसर के जितने मामले होते हैं उनमें से दो तिहाई जीवन शैली की वजह से नहीं होते हैं और इन हालात में व्यक्ति के हाथ में बहुत कम नियंत्रण होता है कि वह कैंसर की स्थिति को बदलने के लिए कुछ कर सके यानी ऐसे हालात में कैंसर के कारण उसके वश से बाहर होते हैं. लेकिन प्रोफ़ेसर वाइज़मैन का यह भी कहना था कि दुनिया भर में हर साल सामने आने वाले कैंसर के क़रीब एक करोड़ मामलों में से लगभग तीस लाख ऐसे हैं जिनसे बचा जा सकता है बशर्ते कि इस अध्ययन की सिफ़ारिशों पर अमल किया जाए. | इससे जुड़ी ख़बरें 'पूरी दुनिया में फ़ैल रहा है मोटापा'25 अक्तूबर, 2007 | विज्ञान रंगीन फल खाने का फल मीठा22 अगस्त, 2007 | विज्ञान पश्चिमी खानपान के ख़तरे11 जुलाई, 2007 | विज्ञान दिल के दौरे से मोटे मरीज़ों को राहत20 जून, 2007 | विज्ञान अब मोटापा घटाने के लिए गोलियाँ30 अप्रैल, 2007 | विज्ञान त्रिफला से हो सकेगा कैंसर का इलाज18 अप्रैल, 2007 | विज्ञान चर्बी से कैंसररोधी विटामिन बेअसर10 अप्रैल, 2007 | विज्ञान मुर्गी के अंडों से कैंसर का इलाज 15 जनवरी, 2007 | विज्ञान इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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